1973 में रिलीज हुई राज कपूर की फिल्म ने अपने 46 साल पूरे कर लिए हैं। फिल्म बॉबी की लोकप्रियता का आलम ये था कि कस्बों से बड़े शहरों के थिएटरों के लिए विशेष बसें चलती थीं जिन्हें 'बॉबी बस' कहा जाता था। इसी फिल्म से डिंपल कपाड़िया ने मात्र 16 साल की उम्र में बॉलीवुड में डेब्यू किया था। राजकपूर साहब ने अपने बेटे ऋषि कपूर को लॉन्च करने के लिए उनके अपोजिट डिंपल कपाड़िया को चुना था।
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'बॉबी' एक जबरदस्त हिट साबित हुई। बॉबी के रिलीज होने के बाद एक अफवाह खूब फैली थी कि डिंपल, राज कपूर और नरगिस की बेटी हैं। दरअसल उस राज कपूर और नरगिस का अफेयर जगजाहिर था। साल 1970 में राजकपूर अपनी ड्रीम प्रोजेक्ट फिल्म 'मेरा नाम जोकर' लेकर आये थे। यह फिल्म उस वक्त नहीं चल पायी थी।
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वास्तव में फिल्म को पूरा करने में 5-6 साल लग गए और नतीजतन राज कपूर की पत्नी को अपने गहने बेचने पड़े, पूरा कपूर खानदान कर्ज से डूब गया लेकिन राजकपूर ने कर्ज से बाहर आने के लिए ऋषि कपूर को बॉबी से लांच कर दिया। फिल्म जबरदस्त हिट हुई और राजकपूर के दिन फिर गए।
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इंडस्ट्री में लोग फिर से राजकपूर को महान डायरेक्टर मानने लगे. वे लोग भी उनके साथ हो गए जो कहने लगे थे कि राज निर्देशन भूल गया है। बॉबी को असल मायनों में हिंदी फिल्मों की पहली टीनएज लव स्टोरी कहना शायद गलत नहीं होगा। ऋषि कपूर के बेपरवाह बाप के रोल में प्राण साहब, बॉबी पर जान छिड़कने वाले पिता के रूप में प्रेमनाथ और मिसेज ब्रिगेंन्जा के रोल में दुर्गा खोटे जैसे किरदार एक से बढ़कर एक थे।
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बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक बॉबी बनाते वक़्त इंडस्ट्री के बड़े-बड़े लोग धर्मेंद्र, प्राण साहब, राजेंद्र कुमार ने उनसे कहा था कि आरके बैनर को फिर से खड़ा करने के लिए वे लोग बिना पैसे लिए काम करेंगे। लेकिन राज कपूर ने सबका शुक्रिया अदा करते हुए कहा था, “इस वक्त मेरी फिल्में फ़्लॉप हो चुकी हैं इसलिए मेरा लेवल नीचे है और आपका ऊपर। हम तब साथ काम करेंगे जब हमारा और आपका लेवल बराबर हो जाएगा।”