देश के सांस्कृतिक समुदाय के 180 से अधिक लोगों ने, पीएम मोदी को खत लिखने पर 49 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के मामले की निंदा की है। इन लोगों में अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, सिनेमेटोग्राफर आनंद प्रधान, इतिहासकार रोमिला थापर और सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर शामिल हैं।
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रामचंद्र गुहा
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सात अक्टूबर को लिखे पत्र में इन सांस्कृतिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों ने सवाल पूछा है कि आखिर प्रधानमंत्री को खुला पत्र लिखना किस तरह से राजद्रोह हो सकता है। बता दें कि पिछले हफ्ते बिहार के मुजफ्फरपुर में फिल्मकार अपर्णा सेन, अडूर गोपालकृष्णन और इतिहासकार रामचंद्र गुहा सहित 49 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
- फोटो : Social media
इन लोगों ने पीएम मोदी का पत्र लिख कर देश में मॉब लिचिंग की बढ़ती घटनाओं पर चिंता प्रकट की थी। उन्होंने पूछा कि क्या हमारे सांस्कृतिक समुदाय के इन 49 लोगों के खिलाफ एफआईआर महज इसलिए की गई है क्योंकि आम समाज के सम्मानित सदस्य होने के नाते उन्होंने अपने कर्तव्य को निभाया है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया था कि क्या इस काम को राजद्रोह कहा जा सकता है या फिर यह अदालत के दुरुपयोग से लोगों को परेशान करके उन्हें खामोश करने की कोशिश है। इस पर हस्ताक्षरकर्ताओं में लेखक अशोक वाजपेई, जेरी पिंटो, इरा भास्कर, कवि जीत तायल, लेखक शम्सुल इस्लाम जैसे लोगों के नाम भी हैं।
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मणिरत्नम, पीएम नरेन्द्र मोदी और अनुराग कश्यप
- फोटो : सोशल मीडिया
गौरतलब है कि भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत तीन अक्टूबर को एफआईआर दर्ज की गई थी। फिल्म निर्माता मणिरत्नम, अनुराग कश्यप, श्याम बेनेगल, अभिनेता सौमित्र चटर्जी और गायक शुभा मुद्गल सहित 49 सेलेब्स पर देशद्रोह के आरोप लगे थे।
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