Bhojpuri Actresses: काम के बदले इन भोजपुरी अदाकाराओं से हुईं अश्लील मांगें, सुनकर आपको भी आ जाएगी शर्म
अक्षरा सिंह
भोजपुरी इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्रियों में शुमार अक्षरा सिंह के लिए लोगों की दीवानगी बेहिसाब है। उनकी पॉपुलैरिटी का आलम यह है कि लोग उन्हें प्यार से भजपुरी क्वीन कहकर पुकारते हैं। सबकी पसंदीदा एक्ट्रेस की पर्सनल और प्रोफेशनल दोनों ही लाइफ सुर्खियों में बनी रहती है। लोग उनके बारे में हमेशा ही जानने के लिए उत्सुक रहते हैं। ऐसे में अपने फैंस के साथ एक इंटरव्यू में अक्षरा ने साझा किया था कि पवन सिंह से ब्रेकअप के बाद कई निर्देशकों ने उनसे काफी भद्दे डिमांड किए थे। अभिनेत्री को कई अश्लील कमेंट्स का सामना भी करना पड़ा था।
रानी चटर्जी
अपनी खूबसूरती के लिए लोगों के बीच मशहूर रानी चटर्जी के अभिनय की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है। रानी चटर्जी आज बेशक भोजपुरी इंडस्ट्री पर राज करती हों लेकिन एक समय ऐसा था जब अभिनेत्री को उनके मोटापे के लिए खूब ट्रोल किया जाता है। इतना सब झेलने वाली रानी चटर्जी ने मी टू कैंपेन के दौरान साजिद खान पर आरोप लगाया था। अभिनेत्री का कहना था कि साजिद ने उन्हें एक आइटम सॉन्ग के लिए अपने स्टूडियो बुलाया था। इस दौरान निर्देशक ने रानी ने उनकी जांघे दिखाने के डिमांड की थी। यही नहीं, साजिद ने रानी ने उनका ब्रेस्ट साइज भी पूछा था।
अल्फिया शेख
बॉलीवुड में जहां कुछ अभिनेत्रियों को उनके आइटम नंबर के लिए जाना जाता है, वहीं भोजपुरी सिनेमा में भी बहुत सी प्रसिद्ध आइटम गर्ल्स हैं। इन आइटम गर्ल्स में अल्फिया शेख का नाम भी शामिल है। दर्शकों को अपनी अदाओं से मदहोश करने वाली अल्फिया के साथ भी कुछ इस तरह की ही अश्लीलता हुई थी। अल्फिया शेख ने भोजपुरी सिनेमा के अभिनेता और फिल्म डायरेक्टर हैदर काजमी पर 'मी टू' का आरोप लगाया था। अभिनेत्री ने हैदर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।
किसी जमाने में भोजपुरी फिल्मों की जान माने जाने वाली पाखी हेगड़े यूं तो अब इंडस्ट्री से दूरी बना चुकी हैं, लेकिन वह अभी भी किसी न किसी वजह से सुर्खियों में बनी रहती हैं। एक इंटरव्यू के दौरान पाखी ने चौंकाने वाला खुलासा कर सबको हैरान कर दिया था। पाखी ने खुलासा किया था कि करियर के शुरुआती दिनों में निर्देशक काम के बदले उनसे समझौता करने को कहते थे। इतना ही नहीं अभिनेत्री ने बताया था कि मना करने पर कास्टिंग काउच की शिकार होना पड़ता था, जल्दी फिल्में नहीं मिलती थीं और खाली बैठे रहने पर डिप्रेशन होता था।