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Apna Adda 06: मैं स्ट्रगल करने नहीं, मुंबई में काम लेकर आई, पोस्टर पर फोटो देख चौड़ा हो गया पापा का सीना

Wed, 07 Feb 2024 10:40 AM IST
दीक्षा पाठक अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: दीक्षा पाठक Updated Wed, 07 Feb 2024 10:40 AM IST
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Actor Rrama Sharma from dadri uttar pradesh shares his journey in Bollywood in apna adda series
रमा शर्मा - फोटो : अमर उजाला

छोटे शहरों से आकर मुंबई महानगर की सपनों की दुनिया में धीरे धीरे ही सही पर अपनी ठोस पहचान बनाने में कामयाब हो रहे कलाकारों की मेहनत का लेखाजोखा है, अमर उजाला की खास सीरीज ‘अपना अड्डा’। इस सीरीज में आज बारी है दादरी, उत्तर प्रदेश की रमा शर्मा की। अपने नाम रमा की वर्तनी में वह दो आर लगाती हैं। वजह पूछे तो बताती हैं, ‘मुझे भीड़ में नहीं दिखना। मुझे अपनी अलग पहचान बनानी है और इसकी शुरुआत मैंने अपने नाम की वर्तनी से की।’ एमटीवी की सीरीज ‘निषेध’ के पोस्टर पर जब रमा शर्मा की फोटो दिखी तो उनके घरवालों को खूब बधाइयां मिलीं। और, पापा! उनका तो सीना ही घर की इस बिटिया ने चौड़ा कर दिया। तो आइए जानते हैं, रमा शर्मा की रीयल जिंदगी से लेकर उनके रील तक सफर के बारे में..


 

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Actor Rrama Sharma from dadri uttar pradesh shares his journey in Bollywood in apna adda series
रमा शर्मा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
जैसा कि आप बताती हैं कि आपके परिवार में सभी अफसर, डॉक्टर, प्रोफेसर हैं तो आपको ये अभिनेत्री बनने का ख्याल कैसे आया?
मुझे बचपन से ही नाच, गाना, ड्रामा, नाटक पसंद रहा है। कला की तरफ मेरा रुझान था। 10 साल की थी जब मैं एक दिन अपने पापा डी सी शर्मा को लेकर अपने घर के पास एक फिल्म अकादमी पहुंच गई, वहां एडमिशन लेने। जावेद जाफरी का वहां पोस्टर लगा रहता था। दावा यही होता था कि वह भी वहां एक्टिंग सिखाने आते हैं। लेकिन, पता चला कि फीस डेढ़ लाख रुपये है। मध्यमवर्गीय परिवार के लिए ये बहुत बड़ी रकम थी। फिर स्कूल के नाटकों में ही सक्रिय होने लगी। कॉलेज में मेरी अभिनय यात्रा ने टेक ऑफ लिया। माता सुंदरी कॉलेज, दिल्ली की ड्रामा सोसायटी की फाउंडिंग मेंबर बनी और थियेटर करते करते साल 2019 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (सिक्किम) पहुंच गई।
 

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रमा शर्मा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
तो पापा की क्या प्रतिक्रिया रही बेटी के हीरोइन बनने के विचार पर?
पहले तो मैंने घर पर बताया ही नहीं कि मेरा ऐसा कुछ विचार है। मैंने एक साल सरकारी नौकरी की भी तैयारी की। लेकिन, मुखर्जी नगर में रहते हुए मैंने खुद से सवाल किया कि क्यों इस दौड़ का हिस्सा हूं। ये तो मेरी मंजिल ही नहीं है। मैंने फिर पापा को बताया और उन्होंने किसी भी काम के लिए कभी मुझे रोका नहीं। इसमें मेरी बड़ी बहन लक्ष्मी शर्मा का भी मुझे साथ मिला। मां के न रहने के बाद दीदी ने ही मेरी देखभाल की, उनकी जो जगह मेरे जीवन में है, उसे मैं शब्दों में बता नहीं सकती।
 

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रमा शर्मा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, सिक्किम से लौटने के बाद दिल्ली का मंडी हाउस आपका अड्डा बना, फिर मुंबई कैसे आना हुआ?
मंडी हाउस जाना, वहां के लोगों से मिलना मेरे लिए एक अनोखा अनुभव रहा। हर रोज नए नए कलाकारों से मुलाकात ने मेरे हौसले को उड़ान दी। और, उन्हीं दिनों कोरोना का संक्रमण फैल गया। ओटीटी का विस्तार हो रहा था। कलाकारों को घरों से ही ऑडिशन भेजने को कहा जा रहा था। यही सब करते मुझे जीशान अयबू की सीरीज ‘लल्ला’ मिल गई। तो कह सकते हैं कि मैं मुंबई काम लेकर आई, स्ट्रगल करने के लिए नहीं।
 

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रमा शर्मा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मुंबई में आपका शुरुआती अनुभव कैसा रहा?
दादरी से मुंबई का सफर मेरा रियलिटी चेक था। मुंबई बिल्कुल भी वैसा नहीं है जैसा हम फिल्मों और टीवी पर देखते हैं। यह बहुत ही साधारण सी जगह है। यहां सब अपनी मेहनत के बूते कुछ बड़ा करने का सपना लेकर आते हैं। लेकिन, सपने देखने के साथ साथ जो लोग लगातार मेहनत करते रहते हैं, हिम्मत नहीं हारते हैं। उन्हें सफलता मिल ही जाती है। यहां आकर ऑडिशंस देने शुरू ही किए थे कि मुझे निर्माता-निर्देशक तिग्मांशु धूलिया की सीरीज ‘गर्मी’ में काम करने का मौका मिल गया।
 

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