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Apna Adda 02: नादिरा बब्बर के थियेटर ग्रुप ने चमकाया, 800 विज्ञापन फिल्मों में काम और अक्षय से मिला ये नाम..

Tue, 02 Jan 2024 05:10 PM IST
ज्योति राघव अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: ज्योति राघव Updated Tue, 02 Jan 2024 05:10 PM IST
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Jai Shankar Tripathi interview Amar Ujala Mumbai Initiative Apna Adda OMG Rowdy Rathore Crime Petrol Nadira
जय शंकर त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला

करीब 800 विज्ञापन फिल्मों में काम कर चुके जय शंकर त्रिपाठी ने हिंदी फिल्मों में तमाम सहायक भूमिकाएं की हैं। 'राउडी राठौड़' में पत्रकार की भूमिका से लेकर 'ओएमजी' में वकील की भूमिका तक और उसके अलावा भी दर्शकों ने जयशंकर त्रिपाठी के किरदारों को खूब नोटिस किया। अभिनेता अक्षय कुमार उन्हें ‘..और क्राइम पेट्रोल’ कहकर बुलाते हैं। इस सीरीज में जय शंकर ने खूब काम किया है। जौनपुर के मुगरा बादशाहपुर के रहने वाले जय शंकर त्रिपाठी का फिल्मी सफर ही हमारी सीरीज ‘अपना अड्डा’ की दूसरी कड़ी है...

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जय शंकर त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

शुरू से शुरू करते हैं..
जौनपुर जिले का मुगरा बादशाहपुर हमारी पैतृक भूमि है। मेरी पैदाइश मुंबई की है। मेरे पिता बलराम त्रिपाठी यहां बीईएसटी में नौकरी करते थे। प्रारंभिक शिक्षा गांव में हुई, उन दिनों मम्मी सरोजिनी त्रिपाठी गांव में ही रहती थीं। 1986 में मुंबई आया और सांताक्रुज के पोद्दार स्कूल से छठवीं से बारहवीं तक  पढ़ाई किया। उसी दौरान मैं स्कूल के सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने लगा। वहीं से एक्टिंग के प्रति मेरा रुझान हुआ। हालांकि, इस बीच वापस गांव जाने पर ने मैंने प्रतापगढ़ से आईटीआई भी किया।

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जय शंकर त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

उसके बाद..?
आईटीआई करने के बाद मुझे कानपुर में एक स्कूटर कंपनी में नौकरी भी मिल गई। लेकिन, भाग्य में अभिनय ही लिखा था। किसी काम से इलाहाबाद (अब प्रयागराज) आया था वहां पर नादिरा बब्बर का एक नाटक 'यहूदी की लड़की' देखा। ये 1997 के आस पास की बात है। नाटक खत्म होने पर उनसे मिला तो उन्होंने मुंबई में मिलने की बात कही। बस, नौकरी छोड़कर मैं मुंबई आ गया। नादिरा जी हर साल एक कार्यशाला का आयोजन करती हैं, और उसके माध्यम से ही अपने नाटकों के लिए कलाकारों का चयन करती हैं। मैंने नादिरा बब्बर के साथ करीब 45 नाटकों में काम किया। पहला नाटक था, 'एक घोड़ा तीन सवार'।

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जय शंकर त्रिपाठी, जिमी शेरगिल व अन्य - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

कैमरे के सामने पहला मौका कैसे मिला?
ये मौका मुझे राजश्री प्रोडक्शन्स के सीरियल 'प्यार के दो नाम एक राधा एक श्याम' में साल 2002 में मिला। शशि सुमित उस शो के लेखक थे। उस समय मेरी उम्र 25 साल की रही होगी और सीरियल में मैंने 60 के बुजुर्ग का किरदार निभाया था। मैंने ऑडिशन दिया और मेरा चयन हो गया। यह शो स्टार प्लस  पर आता था। इसमें मैंने रमेश देव जी के मुनीम की भूमिका निभाई थी। यह सीरियल काफी लंबा चला। शो की कास्टिंग डायरेक्टर गायत्री सिंह का अभी अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस है। वह वेब सीरीज बनाती रहती हैं।

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जय शंकर त्रिपाठी, कार्तिक आर्यन व अनन्या पांडे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्मों में शुरुआत कैसे हुई?
फीचर फिल्मों में पहले मेरी शुरुआत विज्ञापन फिल्मों से हुई। उस समय टाटा इंडिकॉम का एक मोबाइल लांच होने वाला था। उस ऐड से मेरी शुरुआत हुई और अब तक करीब 800 विज्ञापन फिल्मों में काम कर चुका हूं। यह सब काम मुझे थियेटर की ही वजह से मिला। थियेटर की वजह से ही पंकज पाराशर मुझे अपनी एक टेलीफिल्म 'गिल गिल गट्ठा' में काम दिया। इस फिल्म में रवीना टंडन और आरिफ जकारिया थे। फिल्मों में मुझे सबसे पहले प्रकाश झा की फिल्म 'अपहरण' में काम करने का मौका मिला। अलंकृता श्रीवास्तव ने तब मेरी कास्टिंग की थी।

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