100 Years Of Raj Kapoor: बॉलीवुड के शोमैन राज कपूर की आज 100वीं जयंती है। इस खास मौके पर सभी प्रशंसक और सितारे जश्न मना रहे हैं। राज कपूर की विरासत को आज भी उनके पोते रणबीर कपूर द्वारा याद किया जाता है। इसका उदाहरण रणबीर कपूर गोवा में भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) में दिया था, जहां उन्होंने राहुल रवैल से बातचीत के दौरान अपने दादा राज कपूर के बारे में कई दिलचस्प बातें साझा की थीं। ऐसे में चलिए राज कपूर की 100वीं जयंती पर आपको रणबीर कपूर द्वारा बताए गए कुछ रोचक बातों के बारे में बताते हैं...
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रणबीर कपूर
- फोटो : अमर उजाला
दादा से रिश्वत में मिलती थीं टॉफियां
दादा राज कपूर को याद करते हुए रणबीर कपूर ने कहा था, 'मेरी उनसे जुड़ी सबसे पुरानी यादें एक बड़े आदमी की तरह हैं, जिनकी नीली आंखें थीं। वह हमें अपने कमरे में ले जाते थे और अपने फ्रिज में ये कारमेल टॉफियां छिपा देते थे। वह हमें एक लाइन में खड़ा करते थे- सभी चचेरे भाई-बहन, करीना, करिश्मा, मेरी बहन, मैं और हमसे सलाम करने और आवारा हूं' गाना गाने के लिए कहते थे।'
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रणबीर कपूर
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ऐसे उठाया लाडले होने का फायदा
एक खास बात साझा करते हुए रणबीर कपूर ने कहा, 'मेरी उनसे जुड़ी यादें बहुत निजी हैं। मैं उन्हें तब और बेहतर तरीके से जान पाया, जब मैंने फिल्मों को समझना शुरू किया, जब मैंने समझना शुरू किया कि वह कौन थे, उनका सिनेमा में क्या योगदान था। मैं उनका पहला पोता था और मुझे बहुत प्यार मिला। जब भी मेरी मां मुझ पर चिल्लातीं तो मैं उन्हें फोन करता। वह मेरी मां को फोन करके डांट देते थे। मैंने इसका फायदा उठाया।'
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रणबीर कपूर
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जब राज कपूर का हुआ निधन
राज कपूर के निधन के बारे में बात करते हुए रणबीर ने कहा, 'जब मैं छह साल का था, तब उनका निधन हो गया और मुझे उस दिन की एक स्पष्ट याद है। हम सभी बच्चे ऊपर खेल रहे थे और जब हमने नीचे देखा तो हमें लोगों का एक समुद्र दिखाई दिया। मैंने अपने जीवन में इतने सारे लोगों को कभी नहीं देखा था। उस दिन मुझे समझ में आया कि ठीक है, इस आदमी का कुछ रुतबा है, कुछ मूल्य है, उन्होंने कुछ किया है, इसलिए इतने सारे लोग उसे श्रद्धांजलि देने आए हैं। वह याद हमेशा मेरे साथ रहेगी।'
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रणबीर कपूर
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नैतिक मूल्यों के साथ बनाईं मजबूत फिल्में
राज कपूर की फिल्म निर्माण पर चर्चा करते हुए रणबीर कपूर ने अपने दादा की अपने करियर के दौरान विभिन्न सामाजिक विषयों से निपटने की क्षमता के बारे में बात की थी। उन्होंने कहा था, 'अगर आप ‘आवारा’ देखें तो यह जातिवाद पर आधारित थी। 'श्री 420’ लालच और वंचितों के बारे में बात करती है। अपनी बाद की फिल्मों में उन्होंने भारतीय नैतिक मूल्यों के साथ मजबूत फिल्में बनाईं। उनकी पिछली कुछ फिल्में समाज के बारे में ईमानदारी से बात करती थीं, लेकिन फिर भी वे उन्हें व्यावसायिक और वास्तव में मनोरंजक बनाने में कामयाब रहे।'