उत्तर प्रदेश संघ लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) के द्वारा आयोजित सम्मिलित राज्य / प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा होती है। अपने निर्माण काल से लेकर आज तक एकमात्र सिविल सेवा परीक्षा ही ऐसी है, जिसने अपने गौरव, प्रतिष्ठा, और स्तर को बनाए रखा है, यही कारण है कि अभी भी युवाओं में इसका आकर्षण न केवल बरकरार है बल्कि दिनो प्रतिदिन बढता ही जा रहा है। राज्य लोक सेवा आयोग में सबसे प्रतिष्ठित उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने पी.सी.एस.परीक्षा -2019 व 2020 का कैलेन्डर जारी कर दिया है। यह पहली बार है कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने अगले वर्ष का कैलेन्डर पहले ही जारी कर दिया है। अब इससे सुनहरा मौका कोई और नहीं हो सकता।
UPSC : IAS मुख्य परीक्षा का पूरा पैटर्न है यहां, जानें क्या हुए हैं बदलाव
मुख्य परीक्षा का क्या है प्रारूप :
मुख्य परीक्षा में कुल 8 पेपर होते हैं। जिनमें 6 पेपर अनिवार्य होते हैं, तथा 1 वैकल्पिक विषय के 2 पेपर होते हैं। आप कोई भी वैकल्पिक विषय (ऑप्शनल पेपर) चुन सकते हैं, आवश्यक नहीं कि आपने ग्रेजुएशन में उस विषय को पढ़ा ही हो। अतः आप ग्रेजुएशन से भिन्न विषय भी ले सकते हैं।
निवार्य विषयों में सबसे पहला पेपर सामान्य हिन्दी का होता है, जो 150 अंकों का होता है। इसमें पहला प्रश्न दिये गये गद्यांश में रेखांकित वाक्याशों की व्याख्या का होता है, दूसरा प्रश्न संक्षेपण का होता है अर्थात् दिये गये गद्यांश को लगभग एक तिहाई शब्दों में इस तरह से लिखना कि गद्यांश का मूल मन्तव्य तो वही रहे परन्तु शब्द चयन लेखक का स्वयं का हो। इसके अतिरिक्त पत्र लेखन, विलोम शब्द, पर्यायवाची, तत्सम तद्भव, मुहावरे व लोकोक्ति, तथा हिन्दी भाषा के प्रयोग में होने वाली अशुद्धियां आदि पूछे जाते हैं।
दूसरा पेपर निबंध का होता है, यह भी 150 अंकों का होता है। इसमें कुल 9 निबंध आते हैं, जो 3 खण्डों में बंटे होते हैं, तथा प्रत्येक खण्ड से एक निबन्ध लिखना होता है। साहित्य व संस्कृति, सामाजिक क्षेत्र, राजनीतिक क्षेत्र, आर्थिक क्षेत्र, विज्ञान व पर्यावरण, कृषि, राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय घटनाक्रम, प्राकृतिक आपदा, तथा योजनाओं में से प्रत्येक क्षेत्र से एक-एक निबन्ध आता है।
प्रत्येक निबन्ध 50 अंक का होता है तथा 700 शब्दों में लिखना होता है। शब्द-सीमा का ध्यान रखना लाभदायक ही होता है। निबन्ध सहज, सुबोध, और कसा हुआ होना चाहिये। महापुरुषों के वाक्य, यथोचित शेर, कविता या श्लोक आदि का निबन्ध में उल्लेख आपके निबन्ध को और ज्यादा आकर्षक बना देता है। निबन्ध हिन्दी, अंग्रेजी या उर्दू में से किसी एक भाषा में लिखे जा सकते हैं।
सामान्य अध्ययन-1
इस पेपर में भारत का इतिहास, प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक कला साहित्य, वास्तुकला और भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन, स्वतंत्रता के पश्चात देश के अंदर एकीकरण और पुर्नगठन विश्व का इतिहास।भारत का समाज और संस्कृति की मुख्य विशेषताएं :
इसमें महिलाओं से जुड़े मुद्दे, जनसंख्या, गरीबी, शहरीकरण, उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण, साम्प्रदायिकता, क्षेत्रवाद, धर्मनिरपेक्षता से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।भारत एवं विश्व का भूगोल :
इसके अन्तर्गत जल, मिट्टी, वन, भूकम्प, सुनामी, ज्वालामुखी, चक्रवात,जल-धाराओं, पवन, भारत का सामुद्रिक संसाधन, मानव प्रवास (शरणार्थी समस्या), भारत के संबंध में सीमा विवाद आदि से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसके साथ-साथ उत्तर-प्रदेश का इतिहास, कला, संस्कृति, वास्तुकला, त्योहार, लोक-नृत्य, साहित्य, पर्यटन, मानव एवं प्राकृतिक संसाधन, जलवायु, मिट्टीयां, वन, वन्य-जीव, खनिज और सिंचाई से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।सामान्य अध्ययन-2
इस पेपर में भारतीय संविधान- इसकी विशेषताएं,संघीय ढांचे, केन्द्र-राज्य संबंध, विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, नीति आयोग, सरकारी नीतियों से संबंधित प्रश्न पछे जाते हैं। इसके अतिरिक्त NGO, SHG, ई-गवर्नेन्स, सिविल सेवा, भारत के पड़ोसी देशों से संबंध, विदेशी करार, महत्वपूर्ण अन्तरराष्ट्रीय संस्थानों, घटनाओं से जुड़े प्रश्न भी पूछे जायेंगे।सामान्य अध्ययन-3
इस पेपर में भारतीय अर्थव्यवस्था के अन्तर्गत- आर्थिक नियोजन, नीति आयोग, गरीबी, बेरोजगारी, बजट, फसलों, MSP, खाद्य सुरक्षा,खाद्य-प्रसंस्करण, भूमिसुधार, आधारभूत संरचना आदि से जुड़े प्रश्न पूछे जायेंगे। इसके अलावा विज्ञान- प्रौद्योगिकी के अन्तर्गत सूचना, संचार, अंतरिक्ष एवं जैव- प्रौद्योगिकी, पर्यावरण-सुरक्षा, जैव-विविधता, प्रदूषण, आपदा प्रबंधन, भारत की आन्तरिक सुरक्षा की चुनौतियों से संबंधित प्रश्न भी पूछे जायेंगे।सामान्य अध्ययन-4
इस पेपर में नीतिशास्त्र, अभिवृत्ति, संवेगात्मक बुद्धि, भारत व विश्व के महान नैतिक-विचारकों, दार्शनिकों, लोक-प्रशासकों में लोक/सिविल सेवा मूल्य तथा नीतिशास्त्र, शासन व्यवस्था आदि से जुड़े प्रश्न पूछे जायेंगे।
प्रत्येक पेपर में 2 खण्ड होते हैं, प्रत्येक खण्ड में 4-4 प्रश्न होते हैं। प्रत्येक खण्ड से कम से कम 2 प्रश्न करने होते हैं, तथा कुल 5 प्रश्न करने होते हैं। चूंकि वैकल्पिक (ऑप्शनल) विषयों के पेपर बहुत लंबे होते हैं, अतः घर पर ही प्रश्नों के उत्तर लिखने की अभ्यास बहुत आवश्यक होता है।
व्यक्तित्व परीक्षण /मौखिक परीक्षा /इंटरव्यू :
इंटरव्यू 100 अंकों का होता है तथा कुल सीटों की संख्या के 3 गुना अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिये चयनित होते हैं। इंटरव्यू में अभ्यर्थी की सामान्य जागरूकता, बुद्धि, चरित्र, अभिव्यक्ति की क्षमता, व्यक्तित्व एवं सेवा के लिये सामान्य उपयक्तता को ध्यान रखते हुये सामान्य अभिरुचि के प्रश्न पूछे जाते हैं। इंटरव्यू के समय ही अभ्यर्थी से सभी अर्ह पदों का वरीयता क्रम भरवा लिया जाता है। अन्तिम चयन मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू दोनों के अंकों को जोड़कर किया जाता है। अभ्यर्थी द्वारा भरे गये पदों के वरीयता क्रम के आधार पर अन्तिम चयन किया जाता है। प्रत्येक पद की कट-ऑफ अलग-अलग होती है। प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) का कोई प्रावधान नहीं है। सामान्य वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति व जनजाति की कट -ऑफ भिन्न-भिन्न जाती है। महिलाओं के लिये श्वैतिज आरक्षण की व्यवस्था है।
इन बातों कारखना है विशेष ध्यान :
सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी से लेकर चयन एक लंबी एवं दुरूह प्रक्रिया है, लगन, और जुनून के दम पर ही जीता जा सकता है। इस परीक्षा में आपसे किसी विषय विशेष का विशेषज्ञ होने की आशा नहीं की जाती, बल्कि सभी विषयों के सामान्य ज्ञान की अपेक्षा की जाती है। अतः इस परीक्षा के लिए अत्यंत तीक्ष्ण बुद्धि का होना आवश्यक शर्त नहीं है, बल्कि एक सामान्य बुद्धि का और सामान्य पृष्ठभूमि का अभ्यर्थी भी इस परीक्षा को निकाल सकता है। बस आवश्यकता है तो जुनून ,अपार धैर्य और सही रणनीति की। कुछ खास बातें हैं जिनका आपको विशेष ध्यान रखना है-1. नकारात्मक प्रकृति के लोगों से दूर रहिये, ऐसे लोग ना केवल आपको हताश-निराश करेंगे बल्कि आपके आत्मविश्वास को भी गिरा देंगे। ध्यान रखिये संघर्ष के दौर में आपको अकेला ही लड़ना होता है, हां, सफलता के बाद श्रेय लेने सब लोग आ जाते हैं। इसलिये किसी के भी निगेटिव कमेन्ट को लेकर परेशान मत होईये।
2. बहुत सारी किताबों को इकट्ठा करने के चक्कर में मत पड़िये। बहुत सारे प्रतियोगी बढ़िया-बढ़िया किताबों को खरीद तो लेते हैं लेकिन पढ़ ही नहीं पाते और असफल हो जाते हैं। ध्यान रखिये चार किताबों को पढ़ने से बेहतर है, एक ही किताब को चार बार पढ़ना। अर्थात् किताबों को पढ़ने के साथ-साथ उन्हें आत्मसात भी करिये।
3. सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जितना महत्वपूर्ण ये है कि आपको क्या पढ़ना है, उतना ही महत्वपूर्ण ये है कि आपको क्या नहीं पढ़ना है। और ये जानने का सबसे सरल तरीका है- किसी भी अध्याय को पढ़ने के बाद उस अध्याय से सम्बन्धित प्रश्नों कोहलकर जाईये, इससे आपको ये अन्दाजा हो जायेगा कि किस टॉपिक से कैसे और कितने प्रश्न बनते हैं।
4. मुख्य परीक्षा में, विशेषकर निबन्ध में अच्छे अंक लाने के लिये आवश्यक है कि रोज लिखने का अभ्यास कीजिये। इससे न केवल आपकी स्पीड बढ़ेगी, बल्कि भाषा शैली, शब्द चयन, वाक्य विन्यास भी सुधरेगा। एक बात का ध्यान अवश्य रखियेगा कि जितना भी लिखियेकसा हुआ लिखिये, सार-गर्भित लिखिये। अनावश्यक उत्तर को फैलाईये मत। उत्तर की गुणवत्ता को बनाये रखिये।
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