फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Education ›   JUTA Opposes West Bengal Bill on Inter-University Transfer of University Staff

जादवपुर विश्वविद्यालय: कर्मचारियों के तबादले वाले विधेयक पर क्यों भड़के शिक्षक? शिक्षक संघ ने जताई आपत्ति

Tue, 08 Sep 2026 07:54 PM IST
आकाश कुमार जॉब्स डेस्क, अमर उजाला
जॉब्स डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Tue, 08 Sep 2026 07:54 PM IST
सार

JUTA: पश्चिम बंगाल में विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के अंतर-विश्वविद्यालय तबादले की योजना का जादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने विरोध किया है। संघ ने इसे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा पर हमला बताया है।
 

विज्ञापन
JUTA Opposes West Bengal Bill on Inter-University Transfer of University Staff
जादवपुर विश्वविद्यालय - फोटो : एएनआई (फाइल )फोटो

विस्तार

JUTA: पश्चिम बंगाल में विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के अंतर-विश्वविद्यालय तबादले की सुविधा देने वाले प्रस्तावित विधेयक को लेकर विवाद शुरू हो गया है। वामपंथी रुझान वाले जादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेयूटीए) ने राज्य सरकार की इस योजना की आलोचना की है।

विज्ञापन


संघ ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि इस तरह की व्यवस्था विश्वविद्यालयों की आत्मनिर्भरता और कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा पर सीधा हमला है। संघ का कहना है कि प्रत्येक विश्वविद्यालय के अपने नियम और काम करने की अलग व्यवस्था होती है। इन्हीं नियमों के आधार पर वहां कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती है।

विज्ञापन

सरकार क्या बदलाव करने जा रही है?

सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा था कि राज्य के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के अंतर-विश्वविद्यालय तबादले की सुविधा देने वाला विधेयक विधानसभा में पेश किया जाएगा। इसके लिए 10 सितंबर को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत एक विश्वविद्यालय में काम करने वाले शिक्षक या गैर-शिक्षण कर्मचारी का दूसरे विश्वविद्यालय में तबादला किया जा सकेगा। इसी प्रस्ताव को लेकर जादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने सवाल उठाए हैं।

जादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ को किस बात पर आपत्ति है?

जेयूटीए का कहना है कि प्रत्येक विश्वविद्यालय की अपनी कार्यप्रणाली और सेवा संबंधी नियम हैं। ऐसे में किसी कर्मचारी को जबरन पूरी तरह अलग नियमों और परिस्थितियों में काम करने के लिए भेजना उचित नहीं है।

संघ ने इसे प्राकृतिक न्याय के खिलाफ बताया है। उसका कहना है कि कर्मचारियों की मौजूदा सेवा शर्तों में उनकी सहमति के बिना इस तरह का बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।

विज्ञापन

क्या तबादले के कानून का इस्तेमाल सरकार के आलोचकों के खिलाफ हो सकता है?

जेयूटीए ने प्रस्तावित कानून के एक अन्य पहलू पर भी सवाल उठाया है। संघ ने आशंका जताई कि क्या नए तबादला कानून का इस्तेमाल सरकार की नीतियों की आलोचना करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ किया जा सकता है।

संघ का कहना है कि सरकार जिस तरह पूरी व्यवस्था को केंद्रीकृत करने की कोशिश कर रही है, उससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कमजोर होगी।

विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर क्या कहा गया?

  • जेयूटीए ने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता उच्च शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • संघ के अनुसार, प्रस्तावित केंद्रीकृत तबादला व्यवस्था विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कमजोर कर सकती है।
  • शिक्षक संघ ने इसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मूल सिद्धांतों के भी विपरीत बताया है।

शिक्षकों की भूमिका को लेकर संघ ने क्या कहा?

जेयूटीए ने कहा कि किसी उच्च शिक्षण संस्थान की गुणवत्ता और उत्कृष्टता में शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में शिक्षकों के स्थानांतरण से जुड़ी ऐसी व्यवस्था के दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। संघ ने दावा किया कि इस तरह का तबादला मॉडल किसी अन्य राज्य में, केंद्र स्तर पर या विदेशों में मौजूद नहीं है।

जेयूटीए की क्या मांग है?

जादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने मांग की है कि विश्वविद्यालय कर्मचारियों पर नई सेवा शर्तें जबरन लागू नहीं की जानी चाहिए। संघ के अनुसार, ऐसी शर्तें कर्मचारियों की मौजूदा नियुक्ति और सेवा शर्तों के खिलाफ होंगी।

संघ ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों की सेवा शर्तों और संस्थानों की स्वायत्तता को ध्यान में रखते हुए ही किसी भी नए प्रावधान को लागू किया जाना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed