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कोलकाताः एकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स में रंटू लहकर की पेंटिंग्स, असम के गांव और नदियों की जीवंत झलक

Thu, 21 Aug 2025 03:15 PM IST
शाहीन परवीन एन. अर्जुन, कोलकाता
एन. अर्जुन, कोलकाता Published by: शाहीन परवीन Updated Thu, 21 Aug 2025 03:15 PM IST
सार

Academy of Fine Arts: कोलकाता के एकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स में लगी प्रदर्शनी में रंटू लहकर की पेंटिंग्स ने असम के गांव, खेत, नदियों और वहां की संस्कृति को जीवंत कर दिया है। उनकी कलाकृतियां सिर्फ रंग नहीं दिखातीं, बल्कि असम के गांव, खेत, नदियां और वहां की संस्कृति को जिंदा कर देती हैं।

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Rantu Lahkar’s Art Brings the Vibrant Spirit of Assam to Kolkata’s Academy of Fine Arts
एकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स में रंटू लहकर की पेंटिंग्स - फोटो : अमर उजाला

Rantu Lahkar: कोलकाता के एकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स की दीर्घा में कदम रखते ही सबसे पहले आंखों में रंगों की एक बाढ़ उतर आती है। कोई चित्र नीली लहरों के साथ बहती ब्रह्मपुत्र का अहसास कराता है, तो कोई लाल-पीले रंगों में सजे असमिया उत्सव की गूंज सुनाता है। हॉल में हल्की-सी रोशनी, दीवारों पर सजे कैनवास और उनके सामने ठहरे दर्शकों की आंखों में चमक- सब मिलकर वातावरण को किसी मेले सा जीवंत बना देते हैं।

Rantu Lahkar’s Art Brings the Vibrant Spirit of Assam to Kolkata’s Academy of Fine Arts
एकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स में रंटू लहकर की पेंटिंग्स - फोटो : अमर उजाला

असम की मिट्टी से कोलकाता तक

1982 में असम के तिनसुकिया जिले के डूमडूमा में जन्मे रंटू लहकर जब कहते हैं कि “गांव मुझे पुकारते हैं”, तो उनके शब्दों का अर्थ दीवारों पर सजे चित्र खुद बयान कर देते हैं। हरे-भरे खेत, मिट्टी से लिपटी कच्ची पगडंडियां, नदियों का फैलाव और गांव की चहल-पहल-ये सब उनके कैनवास पर सिर्फ रंगों से नहीं, बल्कि असम की आत्मा से बने हैं।

उनकी पेंटिंग्स में हर स्ट्रोक प्रकृति से संवाद करता है। कहीं धूप खेतों पर सुनहरी चादर बिछा रही है, तो कहीं दूर तक फैली ब्रह्मपुत्र अपने भीतर जीवन की अनगिनत कहानियां समेटे बह रही है।

Rantu Lahkar’s Art Brings the Vibrant Spirit of Assam to Kolkata’s Academy of Fine Arts
एकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स में रंटू लहकर की पेंटिंग्स - फोटो : अमर उजाला

गुरु से मिली राह

रंटू कहते हैं कि 2002 का साल उनके लिए मोड़ साबित हुआ, जब उनकी मुलाकात प्रसिद्ध चित्रकार रवीन बार से हुई। वे बताते हैं- “बार सर ने मुझे सिर्फ कला नहीं सिखाई, बल्कि रंगों में जीवन ढूँढना सिखाया। वे आज भी मेरे गुरु हैं।” यही कारण है कि उनकी पेंटिंग्स में केवल तकनीक नहीं, बल्कि एक गहरी संवेदनशीलता भी दिखती है।

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Rantu Lahkar’s Art Brings the Vibrant Spirit of Assam to Kolkata’s Academy of Fine Arts
एकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स में रंटू लहकर की पेंटिंग्स - फोटो : अमर उजाला

दीर्घा में दर्शकों की आंखें

प्रदर्शनी में आए दर्शक भी इन रंगों में खो जाते हैं। एक युवा दर्शक दीवार पर सजी ‘नदी और गांव’ नामक पेंटिंग के सामने ठहरकर कहती हैं-"ऐसा लग रहा है जैसे हवा में असम की मिट्टी की खुशबू घुल गई हो।" वहीं एक बुजुर्ग कला प्रेमी ब्रह्मपुत्र के चित्र के सामने खड़े होकर धीमे स्वर में कहते हैं- "ये सिर्फ पेंटिंग नहीं, अपनेपन की एक नदी है, जो दिल तक पहुंचती है।"

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Rantu Lahkar’s Art Brings the Vibrant Spirit of Assam to Kolkata’s Academy of Fine Arts
एकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स में रंटू लहकर की पेंटिंग्स - फोटो : अमर उजाला

कला ही जीवन

इंडोनेशिया और श्रीलंका तक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके रंटू लहकर आज भी मानते हैं कि यह सफर अधूरा है। वे कहते हैं-"भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं, जरूरत है उन्हें निखारने की। पूर्वोत्तर में कला है, लेकिन कलाकारों को सही राह और अवसर चाहिए।" कला के प्रति उनकी दीवानगी उनके इस कथन में झलकती है- "कला ही मेरा जीवन है। इसके बिना मैं कुछ सोच ही नहीं सकता।"

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