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2 करोड़ इनाम जीतने का मौका: युवाओं के लिए दिल्ली में शुरू हुआ सेवा-फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज, जानें क्या करना होगा

Mon, 21 Sep 2026 12:13 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Mon, 21 Sep 2026 12:13 PM IST
सार

Seva-First Innovation Challenge 2026: दिल्ली के उच्च शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने डीटीयू में ‘सेवा-फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ शुरू किया। 100 दिन की इस प्रतियोगिता में 2 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि है। प्रतिभागी खेती, शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और कचरा प्रबंधन जैसी समस्याओं के समाधान बनाएंगे।
 

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Seva-First Innovation Challenge 2026: ₹2 Crore Prize Pool, Mentorship and Startup Support
Seva-First Innovation Challenge 2026 - फोटो : sewafirstryic.dtu.ac.in

विस्तार

Seva-First Innovation Challenge 2026: दिल्ली के उच्च शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (डीटीयू) में ‘सेवा-फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ की शुरुआत की। यह 100 दिन चलने वाली प्रतियोगिता है। इसमें युवाओं को समाज से जुड़ी असली समस्याओं के लिए तकनीक आधारित समाधान तैयार करने का मौका मिलेगा।

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इस प्रतियोगिता के तहत कुल 2 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि रखी गई है। इसके साथ प्रतिभागियों को विशेषज्ञों से मार्गदर्शन, सरकारी सहयोग और अपने शुरुआती उत्पाद को तैयार करने और जांचने का मौका भी मिलेगा।

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क्या है ‘सेवा-फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’?

‘सेवा-फर्स्ट’ का मकसद ऐसी समस्याओं का समाधान तलाशना है, जिनका सामना लोग अपने रोजमर्रा के जीवन में करते हैं। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को पहले समस्या पहचाननी होगी। इसके बाद उसके समाधान का विचार तैयार करना होगा और उसका शुरुआती मॉडल यानी प्रोटोटाइप बनाना होगा।

इसके बाद इन प्रोटोटाइप को विशेषज्ञों की मदद से जांचा जाएगा। अच्छे और काम के समाधान को आगे बढ़ाकर कारोबार और स्टार्टअप में बदलने में भी मदद दी जाएगी।

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किन क्षेत्रों की समस्याओं पर काम होगा?

प्रतियोगिता में कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें प्रमुख हैं:

  • कृषि और खेती
  • शिक्षा
  • कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण
  • स्वास्थ्य
  • स्वच्छ ऊर्जा
  • ग्रामीण विकास
  • ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन को बेहतर बनाने से जुड़े समाधान


प्रतिभागी इन क्षेत्रों से जुड़ी स्थानीय या देश की बड़ी समस्याओं की पहचान कर उनके लिए तकनीक आधारित समाधान तैयार कर सकेंगे।

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कौन ले सकता है हिस्सा?

  • यह पहल दिल्ली समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिभागियों के लिए खुली है।
  • इसमें विद्यार्थी, आईटीआई और पॉलिटेक्निक के छात्र, स्कूल, स्टार्टअप और उद्योग शामिल हो सकते हैं।
  • प्रतियोगिता का दायरा दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, चंडीगढ़ और लद्दाख तक रखा गया है।

डीटीयू की क्या भूमिका होगी?

  • दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी इस पूरी पहल की मुख्य संस्था होगी।
  • डीटीयू प्रतियोगिता के तहत होने वाली गतिविधियों और 100 दिन की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाएगा।
  • इस दौरान प्रतिभागियों को अपने विचार को शुरुआती उत्पाद में बदलने और उसे परखने के लिए जरूरी मदद दी जाएगी।

2 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि के साथ क्या मिलेगा?

इस प्रतियोगिता में कुल 2 करोड़ रुपये का पुरस्कार पूल है। इसके अलावा चुने गए नवाचारों को दिल्ली स्टार्टअप नीति के तहत इनक्यूबेशन फंडिंग का सहयोग भी मिलेगा।

इसका मकसद केवल प्रतियोगिता जीतने तक सीमित नहीं है। अच्छे विचारों को आगे बढ़ाकर टिकाऊ स्टार्टअप और कारोबार बनाने में मदद करना भी इस पहल का हिस्सा है।

बड़े स्टार्टअप संस्थापकों से मिलेगा मार्गदर्शन

प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को प्रमुख स्टार्टअप संस्थापकों से मार्गदर्शन मिलने की भी व्यवस्था है। इनमें वीबा के विराज बहल, जिप इलेक्ट्रिक के आकाश गुप्ता, कैशकरो की स्वाति भार्गव और एस्ट्रोटॉक के पुनीत गुप्ता शामिल हैं। इन विशेषज्ञों से मिलने वाला मार्गदर्शन प्रतिभागियों को अपने विचार और उत्पाद को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

100 दिनों में क्या करना होगा?

प्रतियोगिता को 100 दिन की एक तय प्रक्रिया के रूप में तैयार किया गया है। इसमें मुख्य तौर पर तीन चरण होंगे।

पहला चरण: समस्या की पहचान
प्रतिभागियों को खेती, स्वच्छ ऊर्जा, कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में ऐसी समस्याएं तलाशनी होंगी, जिनका व्यावहारिक समाधान जरूरी है।

दूसरा चरण: प्रोटोटाइप तैयार करना
समस्या की पहचान के बाद टीमों को समाधान का विचार तैयार करके उसका काम करने वाला शुरुआती मॉडल बनाना होगा। उद्योग विशेषज्ञ इन मॉडलों की जांच और पुष्टि में मदद करेंगे।

तीसरा चरण: उद्यम तैयार करना
जिन नवाचारों में आगे बढ़ने की क्षमता होगी, उन्हें सरकारी इनक्यूबेशन सहयोग, विशेषज्ञों की मदद और उद्यम नेटवर्क तक पहुंच दी जाएगी। इसका लक्ष्य इन विचारों को टिकाऊ स्टार्टअप में बदलना है।

प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य क्या है?

‘सेवा-फर्स्ट’ का मुख्य उद्देश्य युवाओं के नए विचारों को समाज की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना है। इसके जरिए स्थानीय समस्याओं के लिए ऐसे समाधान तैयार करने पर जोर है, जिन्हें आगे बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा सके। इस पहल में विचार से लेकर प्रोटोटाइप और फिर स्टार्टअप बनाने तक की पूरी यात्रा पर काम किया जाएगा।

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