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जब प्रधानमंत्री ने नहीं लिया था अपना वेतन, भूखा था देश
Wed, 02 Oct 2019 02:47 PM IST
Garima Garg
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Garima Garg
Updated Wed, 02 Oct 2019 02:47 PM IST
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लाल बहादुर शास्त्री जयंती विशेष
2 अक्तूबर को यानी आज दो बड़े महापुरुषों की जयंती मनाई जा रही है। बता दें कि गांधी जी की 150वीं और शास्त्री जी की 115वीं जयंती मनाई जा रही है। लाल बहादुर शास्त्री को सादगी और सरलता की मिसाल माना जाता है। उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में जन्मे लाल बहादुर शास्त्री के लिए जितनी जरूरी देश की भलाई थी उतना ही जरूरी देश का स्वाभिमान था। इसलिए वे अमेरिका की धमकी के सामने नहीं झुके और उन्होंने देश को भी नहीं झुकने दिया। पढ़ते हैं आगे..
lal bahadur shastri
- फोटो : social media
प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु के बाद लाल बहादुर शास्त्री को पीएम बनाया गया। नेहरू जी के जाने के बाद देश की स्थिति कुछ खास ठीक नहीं थी। उस वक्त देश को एक ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी जो पूरे देश का कार्यभार अपने हाथों में ले ले। लाल बहादुर शास्त्री 9 जून, 1964 को देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने थे। उसी बीच 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध भी छिड़ा। ये शास्त्री जी की सूझबूझ ही थी, जिसने भारत को सफलता दिलवाई।
lal bahadur shastri
- फोटो : social media
चूंकि नेतृत्व लाल बहादुर शास्त्री कर रहे थे इसलिए जवाबदेही भी उन्हीं की थी। युद्ध के दौरान देश में अनाज की कमी हो गई थी। एक तरफ तो भुखमरी के कारण लोगों की जान जाने का डर और दूसरी तरफ देश का स्वाभिमान था। ऐसे में शास्त्री जी ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसने लोगों के मन में उनके प्रति मान बढ़ा दिया। उन दिनों उन्होंने अपनी तनख्वाह उठानी बंद कर दी और अपना खर्च बचाने के लिए अपना काम खुद करने लगे।
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lal bahadur shastri
- फोटो : social media
एक समय ऐसा भी आया जब पूरे देश में खाद्यान्न की कमी हो रही थी और अमेरिका ने धमकी दी कि वे भारत में खाद्यान्न के निर्यात रोक देंगे। ऐसे में देश पर एक बड़ा खतरा मंडरा रहा था। उस वक्त उन्होंने जनता से बात की और कहा कि आप लोग हफ्ते के एक दिन का खाना खाना छोड़ दें। ये वक्त जल्दी निकलेगा। आप सब सहयोग करें।
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देश में ऐसा पहली बार हुआ जब शास्त्री जी द्वारा की गई अपील पर लोगों ने कहा कि अब छोटे से छोटे बड़े से बड़े घर, रेस्तरां, हॉटल आदि में एक हफ्ते तक चूल्हा नहीं जलेगा।
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