{"_id":"5dedf2388ebc3e1b895e7d01","slug":"ias-nishant-jain-strategy-for-crack-upsc-exam-success-story","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"इंटरव्यू में हिंदी-अंग्रेजी भाषा के सवाल पर ये दिया जवाब, 13वीं रैंक पाकर बने IAS टॉपर","category":{"title":"Education","title_hn":"शिक्षा","slug":"education"}}
इंटरव्यू में हिंदी-अंग्रेजी भाषा के सवाल पर ये दिया जवाब, 13वीं रैंक पाकर बने IAS टॉपर
Tue, 10 Dec 2019 09:28 AM IST
Garima Garg
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Garima Garg
Updated Tue, 10 Dec 2019 09:28 AM IST
विज्ञापन
ias topper
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC - Union Public Service Commission) की परीक्षाओं में हर साल लाखों उम्मीदवार शामिल होते हैं। सबसे पहले प्रारंभिक और फिर आता है मुख्य परीक्षा देने का समय। इन दोनों पड़ावों को पार करने के बाद उम्मीदवार आखिर में साक्षात्कार के पड़ाव तक पहुंचते हैं। यूपीएससी परीक्षा 2014-15 में उत्तर प्रदेश के मेरठ के निशांत जैन हिंदी माध्यम से परीक्षा देने वालों में अव्वल रहे। वरीयता सूची में उनका 13वां स्थान रहा। इतनी बड़ी सफलता निशांत ने आखिर कैसे पाई? आगे पढ़ते हैं इनकी पूरी स्ट्रेटजी...
ias topper
- फोटो : social media
निशांत ने बताया कि जब रिजल्ट आया तो वे 13वीं रैंक पाकर बड़े खुश हुए। उन्हें पता था कि इस बार उनका सिलेक्शन हो जाएगा। पर इतनी अच्छी रैंक मिलने की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने बताया कि यूपीएससी परीक्षा के लिए ये उनका दूसरा प्रयास था।
ias topper
- फोटो : social media
जब उनसे उनकी प्रेरणा के बारे में पूछा गया तो निशांत ने बताया कि मुझे राशन कार्ड से इसकी प्रेरणा मिली थी। राशन कार्ड को खाद्य रसद अधिकारी द्वारा जारी किया जाता है। बचपन में वे अपने परिवार के राशन कार्ड पर अधिकारी शब्द को देखते थे, तो उन्हें वह बहुत आकर्षित लगता था। जब दसवीं क्लास में आए, तब समझ आया कि अधिकारी बनने के लिए सिविल सेवा की परीक्षा पास करनी होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ias topper
- फोटो : social media
सपना तो मैट्रिक से ही था, लेकिन परिस्थितियों और संघर्ष के चलते सीधे ग्रेजुएशन के बाद इस एग्जाम में बैठने की उनकी हिम्मत नहीं हुई। वे अपने करियर को सेफ जोन में रखकर आईएएस की तैयारी करना चाहता थे, इसलिए जब वे लोकसभा में हिंदी असिस्टेंट के पद पर नौकरी करने लगे, तब उन्होंने अपने सपने के लिए प्रयास शुरू किए।
विज्ञापन
ias topper
- फोटो : social media
शुरुआत उनके मन में थोड़ा डर भी था कि इस एग्जाम के लिए लोग जी जान से जुड़कर मेहनत करते हैं वहां मैं नौकरी करते हुए आईएएस बनने का सपना देख रहा हूं। लेकिन, जब पढ़ाई शुरू की, तो उनके लिए यह अपने विषयों का रिविजन ही था, क्योंकि हिंदी साहित्य उनका विषय था। दूसरा, स्कूल में जिन विषयों को पढ़ा था, वे उन्हें भूले नहीं थे। उनका कहना है कि अगर आपका लक्ष्य स्पष्ट हो, तो उस तक पहुंचने का रास्ता आप ढूंढ ही लेते हैं।
कमेंट
कमेंट X