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Chandrayaan 2: इसरो ने पहली बार नहीं कहा है 'खौफ के 15 मिनट',  जानें कहां से आए ये शब्द

Fri, 13 Sep 2019 01:24 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Fri, 13 Sep 2019 01:24 PM IST
सार

  • चंद्रयान 2 की लॉन्चिंग के समय इसरो प्रमुख ने कहा था - 'खौफ के 15 मिनट'
  • पहली बार इसरो में नहीं हुआ है इन शब्दों का प्रयोग

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Chandrayaan 2 ISRO K Sivan said 15 minutes of terror for Vikram Lander, Where these words came from
चंद्रयान 2 के लिए इसरो ने कहा था - 'खौफ के 15 मिनट' - फोटो : अमर उजाला

चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO - Indian Space Research Organisation) ने चार शब्द कहे थे, जिसे सुनकर हर कोई थोड़ा सहम गया था। ये शब्द थे - '15 Minutes of Terror' यानी 'खौफ के 15 मिनट'। 



ऐसा क्यों कहा गया था, इस बारे में तो आपने पढ़ा और सुना होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसरो ने पहली बार ऐसा नहीं कहा है।  क्या आपको पता है कि पहली बार इन शब्दों का इस्तेमाल कब और किसने किया था? आखिर कहां से आए हैं ये शब्द? इस बारे में हम आपको आगे बता रहे हैं।

Chandrayaan 2 ISRO K Sivan said 15 minutes of terror for Vikram Lander, Where these words came from
चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग - फोटो : इसरो

पहले हम आपको वो बातें याद दिला रहे हैं जिस कारण चंद्रयान 2 के मामले में ये शब्द कहे गए। 
 


दरअसल, जब चंद्रयान 2 लॉन्च होने वाला था, तभी इसरो प्रमुख डॉ. के. सिवन ने कहा था कि विक्रम लैंडर के चांद पर उतरने में जो अंतिम 15 मिनट लगेंगे, वे बेहद मुश्किल होंगे। अगर इन 15 मिनट में सब सही रहा, तो हम इतिहास रच देंगे। क्योंकि ये प्रक्रिया काफी जटिल है, इसलिए इस दौरान किसी भी अनहोनी की आशंका है। ये खौफ के 15 मिनट (15 Minutes of Terror) होंगे।  आखिर के पलों में इसरो प्रमुख की ये आशंका सही साबित हो गई।

अब आपको बताते हैं कि ये शब्द आए कहां से?

Chandrayaan 2 ISRO K Sivan said 15 minutes of terror for Vikram Lander, Where these words came from
नासा का क्यूरियॉसिटी रोवर (ग्राफिक्स) - फोटो : NASA, JPL

चंद्रयान 2 की लॉन्चिंग से करीब आठ साल पहले, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने एक क्यूरियॉसिटी लैंडर लॉन्च किया था। नवंबर 2011 में इसे मंगल ग्रह पर पहुंचाने के लिए लॉन्च किया गया था। लॉन्चिंग के करीब 10 महीने बाद, यानी 6 अगस्त 2012 को नासा के क्यूरियॉसिटी को मंगल ग्रह की सतह पर उतरना था। मंगल की कक्षा (orbit) में प्रवेश करने से लेकर उसकी सतह पर उतरने में इसे करीब 7 मिनट का समय लगना था। ये प्रक्रिया काफी जटिल थी। आगे पढ़ें फिर क्या हुआ था?

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NASA

क्यूरियॉसिटी को लैंड कराने का पूरा कमांड नासा के जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी (JPL) के हाथ में था। चंद्रयान 2 की तरह ही क्यूरियॉसिटी का प्रोग्रामिंग भी पूरी तरह ऑटोमेटिक थी। जेपीएल इसकी सिर्फ निगरानी कर सकता था।

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नासा का क्यूरियॉसिटी मार्स मिशन (ग्राफिक्स) - फोटो : NASA, JPL

क्यूरियोसिटी एक छोटे आकार का रोवर था, जिसे एक हीट शील्ड से कवर कर सुरक्षित किया गया था। यह रोवर छोटी कार की तरह दिखता था। इसे मंगल की सतह पर उतने में जो 7 मिनट लगने थे वो भी चंद्रयान 2 के इन 15 मिनट की तरह ही थे। तभी जेपीएल के वैज्ञानिकों ने इसे 'खौफ के 7 मिनट' (7 Minutes of Terror) का नाम दिया था। इसरो के पूर्व वैज्ञानिक और आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर तपन मिश्रा ने भी अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस बात का जिक्र किया है। हालांकि यह अंग्रेजी का फ्रेज है जिसका इस्तेमाल कहीं भी किया जा सकता है। लेकिन विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में सार्वजनिक रूप से इसका इस्तेमाल तभी पहली बार किया गया था। आगे पढ़ें, क्या क्यूरियॉसिटी सुरक्षित उतर पाया?

ये भी पढ़ें : Chandrayaan 2: क्यों बिगड़ी 'विक्रम' की लैंडिंग, ISRO वैज्ञानिक ने बताए ये बड़े कारण

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