भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO - Indian Space Research Organisation) के वैज्ञानिक लगातार चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) के विक्रम लैंडर से संपर्क साधने की कोशिश में लगे हैं। विक्रम लैंडर से संपर्क करने के लिए ये दिन रात एक कर काम कर रहे हैं। सिर्फ इसरो ही नहीं, अब अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) भी विक्रम से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है। नासा ने विक्रम को 'हैलो' का मैसेज भी भेजा है।
Chandrayaan 2: क्यों बिगड़ी 'विक्रम' की लैंडिंग, ISRO वैज्ञानिक ने बताए ये बड़े कारण
- इसरो साइंटिस्ट ने बताया - विक्रम लैंडर क्यों नहीं कर सका सॉफ्ट लैंडिंग
- इसरो के साथ अब नासा भी कर रहा है विक्रम से संपर्क की कोशिश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अहमदाबाद स्थित इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC) के पूर्व निदेशक और आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) के एडजंक्ट प्रोफेसर तपन मिश्रा ने ये कारण बताए हैं। उन्होंने इस बारे में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया है।
प्रो. तपन मिश्रा ने विक्रम की लैंडिंग बिगड़ने के जो कारण बताए, वो हम आपको आगे की स्लाइड्स में समझा रहे हैं।
ईंधन की इंजन तक पहुंच
ईंधन की टंकी विक्रम लैंडर का एक बड़ा हिस्सा है। जब विक्रम लैंडर तेज गति से चांद की ओर बढ़ रहा था, तब बीच-बीच में उसमें ब्रेक भी लगाए जा रहे थे। तेज गति और ब्रेक के कारण ईंधन अपनी टंकी में उछल रहा होगा। जिस कारण वह इंजन के नॉजल तक सही से पहुंच नहीं सका होगा। लैंडिंग के समय विक्रम लैंडर के थ्रस्टर्स को पूरा ईंधन न मिलने से गड़बड़ी आ सकती है।
ये भी पढ़ें- स्नातक लें प्रतियोगिता में भाग, जीतने वाले को मिल रहे हैं 5 लाख रुपये
क्या होते हैं थ्रस्टर्स और क्या है दूसरा कारण? आगे पढ़ें।
थ्रस्टर्स - जो एक साथ स्टार्ट नहीं हुए
विक्रम लैंडर को चांद की सतह पर उतरते समय सीधा रहना था। साथ ही उसकी गति भी 2 मीटर प्रति सेकंड होनी थी। इस लैंडिंग में विक्रम में लगे पांच बड़े थ्रस्टर्स को मदद करनी थी। चार थ्रस्टर्स विक्रम के चार कोनों पर लगे थे और एक लैंडर के बीच में। लेकिन लैंडिंग के समय चार कोनों पर लगे थ्रस्टर्स तो काम कर रहे थे, पर बीच वाला बंद था।
हो सकता है सभी बड़े थ्रस्टर्स में एकसाथ ईंधन न पहुंचा हो और वे एक साथ स्टार्ट नहीं हो पाए। इस कारण लैंडर तेजी से घूमने लगा होगा , जिससे उसका संतुलन बिगड़ गया। लैंडिंग से समय वह उल्टा हो चुका था। यानी उसकी दिशा हॉरिजेंटल से वर्टिकल हो चुकी थी।
ये भी पढ़ें- स्नातक लें प्रतियोगिता में भाग, जीतने वाले को मिल रहे हैं 5 लाख रुपये
क्या होते हैं थ्रस्टर्स?
थ्रस्टर्स छोटे रॉकेट जैसे होते हैं। ये किसी चीज को आगे या पीछे की दिशा में बढ़ने में मदद करते हैं। विक्रम लैंडर में पांच बड़े थ्रस्टर्स के अलावा आठ छोटे थ्रस्टर्स लगाए गए थे। इन्हीं की मदद से विक्रम ने चांद के चक्कर भी लगाए।
आगे पढ़ें इसरो वैज्ञानिक प्रो. तपन मिश्रा द्वारा बताया गया तीसरा बड़ा कारण।
कमेंट
कमेंट X