यूक्रेन संकट में खुद को बचाने की तमाम कोशिशों के साथ ही सैकड़ों छात्रों ने बगैर खाना-पीना के कई रातें गुजारीं। काफी मुश्किलों के बाद दूतावास की तरफ से छह छात्रों ने महज एक कटोरी चावल से गुजारा किया। मात्रा काफी कम होने की वजह से एक-एक चम्मच से ही गुजारा करना पड़ा। जिंदगी बचाने की जंग से जूझ रहे छात्रों की परेशानी सीमा पार करने के बाद ही थोड़ी कम हुईं। सीमावर्ती क्षेत्रों में खाने के लिए केवल मांसाहारी खाना होने की वजह से शाकाहारी छात्रों के लिए बिस्कुट और पानी का ही सहारा था। अगर पैसे खत्म हो गए तो मुश्किलें और बढ़ गईं।
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उन्होंने बताया कि बैंक और एटीएम से नकदी नहीं निकलने के कारण स्थिति और खराब हो गई। भारतीय दूतावास के सहयोग से एक स्कूल में दो रात किसी तरह गुजारी। इस दौरान खाने के नाम पर महज एक कटोरी चावल में छह दोस्तों को दिए गए। पेट की आग बुझाने के लिए एक-एक चम्मच चावल में किसी तरह गुजारा किया। वहां न तो शौचालय की सुविधा थी और न ही पानी का इंतजाम था।
छतरपुर निवासी चिराग के पिता नरेंद्र ने बताया कि कई बार मोबाइल पर बातचीत के दौरान भी धमाकों की आवाजें सुनने को मिली थीं। दो दिन बाद छात्रों ने रोमानिया बॉर्डर का रुख किया। खारकीव में एयरपोर्ट पर भी धमाका हुआ था, लेकिन उस वक्त तक चिराग उस शहर को छोड़ चुके थे।
शाकाहारी छात्रों को बिस्कुट से करना पड़ा गुजारा
खारकीव से लौटे छात्र गौरव ने बताया कि हंगरी सहित सभी सीमाओं पर खासतौर पर उन छात्रों को खाने में दिक्कत हुई, जो मांसाहारी नहीं थे। बॉर्डर के नजदीक घंटों इंतजार करने के दौरान अगर कुछ खाने के उपलब्ध था भी तो मांसाहारी। ऐसे में गौरव और उनके दोस्तों ने पानी और बिस्कुट से गुजारा किया। बॉर्डर पार करने के बाद छात्रों को राहत मिली। वहां एनजीओ के सहयोग से छात्रों को खाना खिलाया गया, जबकि पोलैंड और रोमानिया में छात्रों को जुराब और सर्द रातें बिताने के लिए कंबल सहित कई जरूरी सामान दिए गए।
मेडिकल छात्रा ने केंद्र सरकार और दूतावास का किया शुक्रिया
नई दिल्ली। यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रही छात्रा भानवी शर्मा के आईजीआई एयरपोट पहुंचते ही बिटिया को देख माता-पिता इतने भावुक हो गए कि शब्दों में बयां नहीं कर सकते हैं। हमले की चेतावनी के बाद बंकर में दो रातें बिताने के बाद ट्रेन, बस और फ्लाइट में 50 घंटे से अधिक देर तक सफर किया। हंगरी में दाखिल होने के बाद भारतीय दूतावास की तरफ से दी गई सहूलियतों को भानवी और उनके दोस्त कभी भूल नहीं पाएंगे। यूक्रेन में छात्रों के लिए लंगर, दूतावास और केंद्र सरकार की ओर से मुहैया की गई सुविधाओं के लिए शुक्रिया कहा।