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नरेला इमारत हादसा: रुकैया के इंतकाल से टूटा परिवार, अली के सिर पर नौ भाई-बहनों का भार, फूट-फूटकर रोता रहा युवक
Sun, 13 Feb 2022 08:47 AM IST
शाहरुख खान
आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 13 Feb 2022 08:47 AM IST
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नरेला में हादसा
- फोटो : अमर उजाला
पिता को दो साल पहले लकवा मार गया था। अब मां ही पूरे परिवार की देखभाल करती थी। अचानक उनके दुनिया से चले जाने के बाद पिता की देखभाल और पूरे परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी अकेले अली इमाम के कंधों पर आ गई है। शनिवार को मां रुकैया का पोस्टमार्टम होने के बाद अस्पताल ने शव सुपुर्द किया, तो अली की आंखें छलक पड़ीं। वह नौ भाई-बहनों में से एक हैं, लेकिन मां को मिट्टी के सुपुर्द करने की जिम्मेदारी अकेले उनके कंधों पर थी। अली इमाम की उम्र 25 साल है और वह बवाना जेजे कॉलोनी में ई-2220 में मां रुकैया और पिता के साथ रहता है। साथ में, उनकी पत्नी और एक छोटी बच्ची भी है। परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी अली पर है। वह पास ही एक फैक्टरी में काम करता है। साथ में, गाड़ी चलाकर कुछ अधिक पैसे कमा लेता है। अली ने बताया कि उनके पिता पहले यमुना किनारे शांति वन झुग्गी में रहते थे।
मोर्चरी के बाहर खड़े मृतकों के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
बिहार के सहरसा से आकर वह यहां रहने लगे। यहीं उनके नौ बच्चे हुए, जिनमें सात बेटियां और दो बेटे हैं। बाद में यहां झुग्गियां टूटीं तो वह परिवार समेत बवाना जेजे कॉलोनी में रहने लगे। रुकैया करीब 35 साल से पति के साथ दिल्ली में रहती थीं।
मोर्चरी के बाहर खड़े मृतकों के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान उन्होंने कठिनाई से बच्चों को पाल पोश कर बड़ा किया। बच्चों का जैसे-तैसे विवाह किया, लेकिन देखते ही देखते उनके एक-एक बच्चे अपने परिवार संग उनसे दूर होते गए।
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नरेला में हादसा
- फोटो : अमर उजाला
अकेले अली अपने मां-बाप के साथ रहा। दो साल पहले पिता को लकवा मार गया, लेकिन मां रुकैया अपने पति का पूरा देखभाल करती थी, शुक्रवार को हादसे में अचानक उनकी मौत हो गई। अली अकेले ही अपनी मां का शव लेने के लिए मोर्चरी आया था। यहां उसके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहा थे।
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नरेला में हादसा
- फोटो : अमर उजाला
सभी मरने वालों का हो गया पोस्टमार्टम
नरेला में बिल्डिंग गिरने से दबकर मरने वाले सभी मृतकों के पोस्टमार्टम कर शनिवार को ही शवों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया। मरने वालों के परिजनों ने बताया कि नरेला में ऐसे अनगिनत फ्लैट हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं। असलम ने बताया कि फ्लैटों के आसपास बड़ी-बड़ी घास उगी है, जिनके लिए लोग बकरियां लेकर यहां जाते हैं। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को भी लोग बकरियां लेकर गए थे।
नरेला में बिल्डिंग गिरने से दबकर मरने वाले सभी मृतकों के पोस्टमार्टम कर शनिवार को ही शवों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया। मरने वालों के परिजनों ने बताया कि नरेला में ऐसे अनगिनत फ्लैट हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं। असलम ने बताया कि फ्लैटों के आसपास बड़ी-बड़ी घास उगी है, जिनके लिए लोग बकरियां लेकर यहां जाते हैं। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को भी लोग बकरियां लेकर गए थे।