राजधानी के लिए दाग बन चुके कूड़े के तीन पहाड़ों के खत्म होने की नए सिरे से उम्मीद जागी है। पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने इस दिशा में ठोस पहल की है। वह एनटीपीसी के साथ मिलकर अपनी तरह का पहला प्लांट लगाने जा रहा है। इससे कचरे से बिजली, खाद, गैस जैसे उत्पाद तैयार होंगे। आम लोग इनका इस्तेमाल करेंगे। अधिकारियों को इस प्लांट के डेढ़ साल में तैयार होने की उम्मीद है। इसके बाद प्लांट में रोज करीब 2,000 मीट्रिक टन कूड़े का निपटान होगा। उधर, उत्तरी व दक्षिणी दिल्ली नगर निगम भी इसी तरह के दूसरे प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।
नगर निगम-एनटीपीसी का समझौता: कूड़े से बनेगी बिजली, गैस और खाद
दक्षिणी निगम तेहखंड में लगाएगा वेस्ट टू एनर्जी प्लांट
दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ओखला लैंडफिल साइट से कूड़े का बोझ कम करने के लिए तेहखंड में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाएगा। इसके लिए दिसंबर 2021 तक का लक्ष्य है। निगम यहां रोज दो हजार मीट्रिक टन कूड़े को निस्तारित कर बिजली का उत्पादन करेगा। बताया जा रहा है कि निगम का लक्ष्य यहां 20 मेगावाट से अधिक बिजली का उत्पादन करना है। इसके अतिरिक्त तेहखंड में ही इंजीनियर्ड सैनिटरी लैंडफिल (एसएलएफ) को 15 एकड़ में स्थापित कर कूड़े को कम करने की तैयारी है।
उत्तरी निगम के तीन जोन के कूड़े से बनेगी ऊर्जा
उत्तरी निगम ने अपने तीन जोन के कूड़े से ऊर्जा बनाने के लिए इंडियन ऑयल के साथ करार किया है। इसके तहत दो हजार मीट्रिक टन कूड़े से ऊर्जा का उत्पादन किया जाएगा। करार के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को निगम कूड़ा उपलब्ध कराएगा। इस योजना को दिसंबर 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में सदर पहाड़गंज जोन, करोल बाग व नरेला जोन का कूड़ा भलस्वा लैंडफिल साइट पर जाता है। इस योजना से इन जोन का कूड़ा भलस्वा साइट पर नहीं पहुंचेगा और इसका निस्तारण जल्द हो सकेगा।
बदलेगी तस्वीर और मिलेगी हरियाली
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, नगर निगम की इस योजना से कुछ ही साल में दिल्ली के कूड़े के पहाड़ कल की बात बन जाएंगे। इससे मौजूदा लैंडफिल साइट पर कूड़े की मात्रा कम होने के साथ हरियाली भी बढ़ेगी। आसपास के लोगों को भी बेहतर हवा व अच्छा वातावरण मिल सकेगा।
उत्तरी निगम 4500 मीट्रिक टन
पूर्वी निगम 2700 मीट्रिक टन
दक्षिणी निगम 3600 मीट्रिक टन
ढलावघरों की संख्या
उत्तरी निगम 632
पूर्वी निगम 304
दक्षिणी निगम 539
फिलहाल रोज निस्तारित कूड़ा
उत्तरी निगम 2400 मीट्रिक टन (53फीसदी)
दक्षिणी निगम 1850 मीट्रिक टन (51 फीसदी)
पूर्वी निगम 700 मीट्रिक टन (26 फीसदी)