सरकार और किसान संगठनों के बीच आठवें दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही। किसान संगठन तीनों कृषि कानूनों की वापसी की मांग पर अड़े रहे, जबकि सरकार ने इस मांग पर विचार करने से साफ इंकार कर दिया। बातचीत के दौरान कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि अच्छा हो कि अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट निर्णय करे। हालांकि बातचीत में हल न निकलने के बावजूद दोनों पक्ष एक फिर से 15 जनवरी को वार्ता की मेज पर आने पर सहमत हुए। हालांकि इस बैठक के बाद किसानों की एक पर्ची वायरल हुई, जिसमें बड़े-बड़े अक्षरों में 'मरेंगे या जीतेंगे' लिखा है, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह....
सरकार संग आठवें दौर की बैठक में किसानों की एक पर्ची वायरल, जानें क्यों लिखा- 'मरेंगे या जीतेंगे'
दोपहर दो बजे के बाद शुरू हुई इस बैठक के प्रारंभ में ही दोनों पक्षों में तनातनी दिखी। बैठक शुरू होते ही किसान संगठनों ने सरकार से तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की। सरकार ने इस मांग को अस्वीकार करते हुए तीनों कानूनों के उन प्रावधानों पर चर्चा की पेशकश की जिस पर किसान संगठनों को आपत्ति है। इसी बीच किसान नेता बलवंत सिंह ने 'मरेंगे या जीतेंगे'- संबंधी नोट लिखा।
इसलिए लहराई पर्ची
बैठक में मौजूद एक नेता ने बताया कि जब सरकार ने कानून वापस लेने से इनकार कर दिया तो किसान नेताओ में बैठक में मौन धारण करने का फैसला किया। हालांकि इस दौरान वह की तरह की पर्चियां लिखकर लहराते रहे। इसी में से एक पर्ची थी 'मरेंगे या जीतेंगे' वाली। ये सब देख बैठक में मौजूद केंद्रीय मंत्री आपस में सलाह के लिए मीटिंग हॉल से बाहर चले गए।
बैठक में तू तू मैं मैं
बैठक शुरू होते ही जब किसान संगठनों ने एक सुर में तीनों कानूनों की वापसी की मांग की तो कृषि मंत्री नाराज हो गए। किसान संगठनों ने कहा कि उन्होंने सरकार से पहले ही कह रखा है कि बातचीत सिर्फ कानून वापसी पर होगी। इस पर कृषि मंत्री ने कहा कि तीनों कानून किसी राज्य विशेष के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए है। अन्य राज्यों के किसान इन कानूनों के समर्थन में हैं। ऐसे में कानून वापसी का सवाल ही पैदा नहीं होता। किसान संगठनों के अपनी मांग पर अडऩे के बाद कृषि मंत्री ने कहा कि अच्छा हो कि अब इस बारे में सुप्रीम कोर्ट ही फैसला करे।
सोमवार की सुनवाई अहम
सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सोमवार को सुनवाई करेगी। यह सुनवाई बेहद अहम है। सरकार और किसान संगठन दोनों की निगाहें इस सुनवाई पर टिकी है और दोनों ही पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट के रुख के अनुरूप आगे की रणनीति तय करने की योजना बनाई है। जाहिर तौर पर किसान आंदोलन मामले में आगे क्या होगा यह इस सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के रुख पर निर्भर करेगा।
हमारी मांग शुरू से स्पष्ट है। हम तीनों कृषि कानूनों की वापसी चाहते हैं। हमने बार-बार सरकार के समक्ष अपना रुख स्पष्ट किया है। यह भी साफ है कि हम अदालत नहीं जाएंगे। जब तक मांगें नहीं मानी जाती हमारा आंदोलन जारी रहेगा।-हन्नान मोल्ला, किसान नेता
सरकार सिर्फ संशोधन पर बात करना चाहती है, जबकि हम कानून वापसी चाहते हैं। अब 15 जनवरी को फिर बातचीत होगी। जब तक सरकार हमारी मांग नहीं मानती तब तक आंदोलन खत्म होने का सवाल ही पैदा नहीं होता।-राकेश टिकैत
भारत एक लोकतांत्रिक देश है। हमारे यहां की लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद द्वारा बनाए गए कानून के विश्लेषण करने का हक सुप्रीम कोर्ट का है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हो रही है। आज की बैठक में सरकार ने किसान संगठनों से प्रावधानों पर चर्चा करने और आंदोलन वापस लेने की अपील की। सरकार ने किसान संगठनों से कहा कि कानून वापस लेने के अलावा किसानों की सभी मांगों पर सरकार बातचीत के लिए तैयार है। किसान संगठन कोई विकल्प प्रस्तुत नहीं कर रहे।-नरेंद्र सिंह तोमर