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'जान भी और जहां भी' की जद्दोजहद में एक साल पहले लगा था जनता कर्फ्यू, पूरे देश में पसर गया था सन्नाटा

Mon, 22 Mar 2021 11:23 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Mon, 22 Mar 2021 11:23 AM IST
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Coronavirus janta curfew one year see in photos what was the scene on 22 march 2020
जनता कर्फ्यू का एक साल - फोटो : अमर उजाला

'जान भी और जहां भी' की भावना के साथ आज से ठीक एक साल पहले देशभर में 22 मार्च के दिन जनता कर्फ्यू लगाया गया था। प्रधानमंत्री के आह्वान पर कोरोना से लोहा लेने की इस पहली मुहिम को लोगों ने भी सफल बनाया था। पूरे दिन लोग अपने घरों में रहे और शाम को पांच बजे ताली और थाली बजाकर कोरोना से जंग लड़ने वाले फ्रंट लाइन वर्करों को सम्मान दिया गया था। यह पहला ऐसा कर्फ्यू था जिसमें कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और आसाम से लेकर गुजरात तक एक भी आदमी सड़क पर नहीं दिखाई दे रहा था।


गलियों में भी सन्नाटा पसरा हुआ था और इलाकों के जानवर ज्यादा बेचैन दिख रहे थे क्योंकि ऐसा अनुभव उनके लिए भी नया था। आगे देखें एक साल पहले की कुछ ऐसी ही तस्वीरें जब सड़कों से लेकर गली कूचे तक हो गए थे चुप और हर ओर थी खामोशी ही खामोशी....

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जनता कर्फ्यू का एक साल - फोटो : अमर उजाला

जनता का, जनता के लिए, जनता के द्वारा लागू इस कर्फ्यू का मकसद कोरोना वायरस को समुदायों के बीच फैलने से रोकना था। तब लोगों ने अपने घरों में रहकर संक्रमण के प्रसार को रोकने में अहम भूमिका अदा की थी। दिसंबर से लेकर फरवरी के बीच संक्रमण खत्म होता नजर आ रहा था, लेकिन अब एक साल बाद वही हालात फिर से बनने की आशंका हर दिन बढ़ती जा रही है। रोजाना कोरोना के रिकॉर्ड मामले चिंता बढ़ा रहे हैं।

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जनता कर्फ्यू का एक साल - फोटो : अमर उजाला

एक साल पहले कोरोना बचाव के लिए जनता कर्फ्यू लगाया गया। इसमें जनता ने पूरा सहयोग दिया। कोविड-19 के बढ़ते मामलों के कारण पूरे देश में लॉकडाउन लगा। इस दौरान लोगों ने एक ऐसा दौर जिया जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की। एक दूसरे को देखना मुश्किल हो गया। घर से निकलने पर पाबंदी। एक दूसरे को छूने तक में लोग भयभीत थे। हर शख्स कोरोना पीड़ित संदिग्ध दिखाई दे रहा था। यह शायद पहली बार रहा कि मंदिरों के कपाट बंद थे। घंटी बांध दी गई। लोग मंदिर के दरवाजे के बाहर से ही अपने ईष्ट की आराधना कर रहे थे। लोगों की चाह थी कि जिंदगी बच जाए तो बेहतर कल के साथ हर नियम और सबक याद रखेंगे। हालांकि एक साल बाद ही उस बुरे दौर की यादें धुंधली पड़ गईं हैं।

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जनता कर्फ्यू का एक साल - फोटो : अमर उजाला

जैसे ही बढ़े मामले वैसे ही बढ़ा लॉकडाउन
जनता कर्फ्यू के बीच लोग पीएम मोदी की अपील पर घरों में बैठे रहे। सन्नाटे की लाइव तस्वीरें अखबार, टीवी और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को देखने को मिली। एक ऐसी शांति जो तूफान के आने से पहले पसरी थी। कोरोना के मामले जैसे-जैसे बढ़े वैसे-वैसे लॉकडाउन और सख्ती के दिन भी देखे। एक दिन के जनता कर्फ्यू के दौरान लोगों को इसका एहसास भी नहीं था कि यह आपदा वैश्विक महामारी बन देश में घर कर लेगी।

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जनता कर्फ्यू का एक साल - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली में बीते साल 02 मार्च को संक्रमण का पहला मामला आया था। तब अप्रैल तक भी केस ज्यादा नहीं बढ़े थे। पहले 1 हजार मामले आने में 41 दिन का समय लगा था। इसका कारण था कि लोग कोविड से बचाव के नियमों का सख्ती से पालन कर रहे थे, लेकिन अब तस्वीर बदल रही हैं। प्रतिदिन 600 से ज्यादा केस आ रहे हैं। तब के मुकाबले कई गुना रफ्तार से संक्रमण बढ़ रहा है। इसका प्रमुख कारण लोगों की लापरवाही है।

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