पिछले साल कोरोना की दस्तक के बाद तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए 22 मार्च को दिल्ली सहित पूरे देश में जनता कर्फ्यू लगा दिया गया था। जनता का, जनता के लिए, जनता के द्वारा लागू इस कर्फ्यू का मकसद कोरोना वायरस को समुदायों के बीच फैलने से रोकना था। तब लोगों ने अपने घरों में रहकर संक्रमण के प्रसार को रोकने में अहम भूमिका अदा की थी। दिसंबर से लेकर फरवरी के बीच संक्रमण खत्म होता नजर आ रहा था, लेकिन अब एक साल बाद वही हालात फिर से बनने की आशंका हर दिन बढ़ती जा रही है। रोजाना कोरोना के रिकॉर्ड मामले चिंता बढ़ा रहे हैं।
जनता कर्फ्यू का एक साल : दिनभर सड़कों पर सन्नाटे को ताकती रही थीं निगाहें, एक साल में क्या हुआ हाल
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दिल्ली में बीते साल 02 मार्च को संक्रमण का पहला मामला आया था। तब अप्रैल तक भी केस ज्यादा नहीं बढ़े थे। पहले 1 हजार मामले आने में 41 दिन का समय लगा था। इसका कारण था कि लोग कोविड से बचाव के नियमों का सख्ती से पालन कर रहे थे, लेकिन अब तस्वीर बदल रही हैं। प्रतिदिन 600 से ज्यादा केस आ रहे हैं। तब के मुकाबले कई गुना रफ्तार से संक्रमण बढ़ रहा है। इसका प्रमुख कारण लोगों की लापरवाही है।
बाजारों व सार्वजनिक स्थलों के अलावा परिवहन के साधनों में भी कोविड से बचाव के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। लोग बिना मास्क के घुम रहे हैं। कहीं भी शारीरिक दूरी का पालन भी नहीं किया जा रहा है। बुखार या खांसी, जुकाम होने पर खुद ही दवाई ले रहे हैं। लोगों की लापरवाही को देखते हुए प्रशासन ने अब सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। हालांकि, यह उस तरह लागू नहीं हो पा रही, जैसी पिछले साल थी।
हालांकि दिल्ली के लोगों को एक दिन का जनता कर्फ्यू याद है। ग्रेटर कैलाश में रहने वाले कैलाश बताते हैं कि जनता कर्फ्यू याद है। बालकॉनी में खड़े होकर सड़का हाल देखा था। एक तरह का अजीब सन्नाटा था। न हॉर्न की आवाज और न ही कोई और हलचल। सिर्फ पक्षियों की आवाज सुनाई दे रही थी।
स्वास्थ्य विभाग का दावा: की जा रही है सख्ती
- दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि संक्रमण के बढ़ते मामलोें को देखते हुए सख्ती की जा रही है। कंटेनमेंट जोन में इजाफा हो रहा है। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर खास निगरानी रखी जा रही है। बैरिकेंडिंग लगाकर अतिरिक्त वालंटियरों को तैनात किया गया है। बाजारों व सार्वजनिक स्थानों पर कोविड प्रोटोकॉल का पालन न करने वालों के चालान काटे जा रहे हैं। साथ ही अलग-अलग स्थानों पर कैंप लगातर लोगों की जांच की जा रही है। प्रतिदिन 75 हजार से ज्यादा टेस्ट हो रहे है। इनमे 60 फीसदी से ज्यादा आरटी-पीसीआर प्रणाली से किए जा रहे हैं। संक्रमितोें के संपर्क में आए लोगों की पहचान भी तेज कर दी गई है। जो व्यक्ति भी संक्रमित मिल रहा है। उसे संपर्क में आए कम से कम 25 लोगों की पहचान कर उनकी कोरोना जांच की जा रही है। इसमें संक्रमित मिलने वालोें को आईसोलेट किया जा रहा है।