यूपी के अमरोहा में 13 साल पहले सात अपनों का ही खून बहानेे वाली शबनम के बारे में इन दिनों रोज कोई न कोई नई बात सामने आती रहती है। अब उसे लेकर ये सामने आया है कि फांसी होने तक उसका नया ठिकाना संभवतः बरेली की जेल ही होगी। हालांकि इसके पीछे की क्या वजह है यह जानकर आपको हैरानी होगी और देश की जेलों की व्यवस्था पर भी कई सवाल जहन में आएंगे। इससे पहले शबनम रामपुर जेल में थी और रामपुर से पहले किसी और जेल में थी। जानिए क्यों उसे एक जेल से दूसरे जेल में भेजा जाता है और इस बार उसके जेल बदलने के पीछे क्या वजह है...
अमरोहाः देखिए शबनम की वो तस्वीर जिसके वायरल होते ही जेल प्रशासन ने बदल दिया उसका ठिकाना
अवैध प्रेम संबंधों के लिए अपने ही परिवार के सात लोगों का बेरहमी से खून करने वाली बावनखेड़ी की शबनम अब संभवत: फांसी होने तक बरेली जिला जेल में रहेगी। अब तक शबनम रामपुर जिला जेल में कैद थी जहां कुछ समय पहले उसकी एक दूसरी महिला बंदी के साथ हंसते हुए फोटो वायरल हुई थी। इसके बाद दोनों को बरेली भेजने का फैसला लिया गया। दोनों को बरेली जिला जेल की कोविड बैरक में रखा गया है। सिर्फ यही नहीं शबनम की इस फोटो को वायरल करने वाले दो पुलिसवालों को भी सस्पेंड कर दिया गया है।
अमरोहा (जेपीनगर) के गांव बावनखेड़ी में 2008 में शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ अपने परिवार के सात लोगों का कत्ल कर दिया था। इस हत्याकांड में उसका हाथ पाए जाने के बाद उसे गिरफ्तार कर मुरादाबाद जेल में रखा गया था। 2019 में उसे रामपुर जेल भेज दिया गया था। तब से वह रामपुर जेल में ही थी। शबनम को फांसी की सजा हो चुकी है और मथुरा जेल में उसे फांसी देने की तैयारियां भी चल रही हैं। इसी बीच कुछ दिन पहले उसका रामपुर जेल में एक अन्य महिला कैदी के साथ हंसते हुए फोटो वायरल हो गया। जेल में फोटोग्राफी होने पर सवाल उठा तो रामपुर जेल प्रशासन ने इसे पुरानी तस्वीर बताते हुए पल्ला झाड़ने की कोशिश की थी।
रामपुर के डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने जांच कराई तो पता चला कि वायरल फोटो रामपुर जेल के भीतर ही खींचा गया था। फोटो में शबनम के साथ दिख रही दूसरी बंदी आरती शर्मा भी रामपुर जेल में बंद थी। उसे भी हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है। इसके बाद डीएम की रिपोर्ट पर शासन ने शबनम और आरती को बरेली जेल शिफ्ट कर दिया।
शबनम और दूसरी महिला कैदी आरती जिला कारागार में आ गई हैं। कोविड के नियमों को ध्यान में रखते हुए दोनों को करीब 21 दिन तक कोविड बैरक में रखा जाएगा। - विजय विक्रम सिंह, जेल अधीक्षक