शुक्रवार को चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी को एक बड़ा झटका देते हुए इसके 20 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की सिफारिश राष्ट्रपति को भेज दी। आप के इन 20 विधायकों पर लाभ के पद का इस्तेमाल करने का आरोप लगा है। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों कोई वेतन, गाड़ी, बंगला या घर न लेने के बावजूद चुनाव आयोग ने इन विधायकों को लाभ के पद का उपयोग करने का दोषी माना है...
चुनाव आयोग का फैसला आते ही आप के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आयोग ने आप के विधायकों को लाभ के पद का दोषी माना है जबकि संसदीय सचिव के पद पर तैनात 20 में से कोई भी विधायक न तो वेतन लेता था न ही कोई सरकारी बंगला या गाड़ी का इस्तेमाल करता था। इसके बावजूद आयोग ने किस आधार पर इन्हें अयोग्य साबित किया है ये समझ से परे है।
सौरभ ने यह भी कहा चुनाव आयोग ने अपना फैसला सुनाने से पहले आप के 20 में से एक भी विधायक को न तो चुनाव आयोग बुलाया और न ही उनकी प्रॉपर्टी या बैंक खातों की जांच की। जबकि किसी भी आरोप को साबित करने से पहले कम से कम आरोपी विधायकों को अपना पक्ष रखने का मौका तो दिया ही जाना चाहिए था।
हालांकि इस मामले में संविधान और कानून के जानकारों का कहना है कि असल में संविधान में लाभ के पद की जो व्याख्या की गई है उसके मुताबिक कोई विधायक या सांसद अपने पद पर रहते हुए किसी ऐसे पद का उपयोग नहीं कर सकता जिसमें वेतन, पेंशन जैसा कोई भी लाभ दिया जाता है। हालांकि संविधान के इसी भाग में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि कुछ ऐसे पद भी हैं जिन्हें लाभ का पद माना गया है।
यानि यह स्पष्ट है कि लाभ का पद का मतलब सिर्फ इतना नहीं है कि कोई विधायक या सांसद वेतन या अन्य कोई लाभ लेता है या नहीं। इसका मतलब यह भी है कि अगर वह लाभ के पद के तहत आने वाला कोई भी पद धारण करता है तो भी उसे इसका दोषी माना जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक संसदीय सचिव का पद भी लाभ के पद के तहत आता है और इसी पद पर आप के 20 विधायकों को सरकार द्वारा नियुक्त किया गया था।