राजधानी में दूसरे सम-विषम फॉर्मूले को जनता दिल से स्वीकार कर रही है। दिल्लीवासियों का कहना है कि हर महीने सम-विषम होना चाहिए। बेशक थोड़ी दिक्कत होगी लेकिन भावी पीढ़ियों को बीमारियों और जाम से बचाने के लिए यह कठिनाई बेहद छोटी है।
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Odd Even in Delhi
- फोटो : Anil Kumar
दिल्लीवासी मानते हैं कि एक बार सम-विषम की आदत पड़ जाएगी तो परेशानी नहीं होगी। हालांकि जनता का कहना है कि सरकार भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सुरक्षित और आरामदायक बनाएं, ताकि लोग कार की बजाय बस या मेट्रो से सफर करने को प्राथमिकता दें।
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सम-विषम फॉर्मूला बेशक दिक्कत देता है, लेकिन भावी पीढ़ियों को बीमारियों से बचाने के लिए यह कष्ट बेहद छोटा है। हालांकि जनता के सहयोग के साथ-साथ सरकार को बस और मेट्रो की कनेक्टिविटी और फ्रीक्वेंसी बढ़ाने पर जोर देना होगा। पब्लिक ट्रांसपोर्ट अच्छा होगा तो जनता धीरे-धीरे निजी वाहन का प्रयोग छोड़ देगी। अनिल, बिजनेसमैन, करोल बाग
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दिल्ली का नाम लेते ही दोस्त अजीब सा मुंह बनाते थे। दोस्तों की राय थी कि दिल्ली में एंट्री करते ही गंदगी, धूल, जाम और बदबू से सांस लेना दूभर हो जाता है। ऐसे कमेंट बेहद शर्मनाक थे क्योंकि दुनिया के सबसे गंदे और प्रदूषित शहर में रहना किसी को भी पसंद नहीं आता है। इसलिए मेरा मानना है कि सम-विषम फॉर्मूला हर महीने लागू होना चाहिए।-प्रियांशु कलानी, छात्र, गोल मार्केट
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बेशक सम-विषम फॉर्मूला प्रदूषण कम करने में सहायक सिद्ध होगा लेकिन केजरीवाल सरकार को सबसे पहले पब्लिक ट्रांसपोर्ट को दुरुस्त करना होगा। पब्लिक ट्रांसपोर्ट बेहतर होगा तो हर कोई निजी वाहन से सफर करना छोड़ देगा। मेट्रो की सेवाओं पर कोई शक नहीं है, लेकिन डीटीसी और नारंगी बस सेवा में सुधार के साथ संख्या बढ़ाने की सबसे अधिक जरूरत है। -रोहन मेहता, छात्र, ओल्ड राजेंद्र नगर