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इन तस्वीरों में छुपा है बोतल बंद पानी का खतरनाक सच

Fri, 04 Dec 2015 06:13 AM IST
Updated Fri, 04 Dec 2015 06:13 AM IST
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इन तस्वीरों में छुपा है बोतल बंद पानी का खतरनाक सच

These pictures will then will leave to drink bottled water

अच्छे स्वाद के फेर में जिस बोतल बंद पानी को आप पी रहे हैं, वह स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। पानी गांवों में अवैध प्लाटों से बोतल में भरकर आपके घर तक पहुंचाया जा रहा है। इस काम में न तो मानकों का पालन हो रहा और न ही इनकी गुणवत्ता का कोई प्रमाण है। जानकारों के मुताबिक नोएडा के 50 से अधिक गांवों में 250 से ज्यादा पानी के अवैध प्लांट चल रहे हैं। निगरानी न होने के कारण भारतीय मानक ब्यूरो से पीने के पानी के लिए तय मानकों का पालन नहीं हो रहा। इस काम में लगे लोग भूजल निकालकर प्लांट पर लगे आरओ सिस्टम में डालते हैं। (रिपोर्ट: अरविंद सिंह/ प्रगति मिश्रा/अमर उजाला, नोएडा।)


इन तस्वीरों में छुपा है बोतल बंद पानी का खतरनाक सच

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वहां से बोतलों में भरकर आपूर्ति कर देते हैं। इस प्रक्रिया में पानी में पाए जाने वाले अवयव के लिए तय मानकों का ख्याल नहीं रखा जाता। 15 से 20 रुपये में मिलने वाले 20 लीटर पानी से प्यास तो बुझ जाती है, मगर ये स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। जानकार बताते हैं कि इनका सालाना कारोबार 70 करोड़ रुपये से अधिक का है, मगर अवैध होने के कारण इन प्लांटों से सरकार को कोई राजस्व नहीं मिल रहा। ये प्लांट प्रमुख रूप से ममूरा, हल्दौनी, छलेरा, सदरपुर, चौड़ा रघुनाथपुर, निठारी, भंगेल, सलारपुर, गेझा और आगाहपुर में लगे हैं। वहीं, प्रदूषण विभाग की मानें तो लाइसेंस लेकर चलने वाली कंपनियों की संख्या आधा दर्जन भी नहीं है।

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फोर्टिस हॉस्पिटल के सीनियर फिजीशियन डॉ. अजय भल्ला कहते हैं कि पीने केपानी में पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) सामान्यतया 100 से 200 के बीच होनी चाहिए, मगर यहां 1500 से 1800 के बीच है। ज्यादा पीपीएम से पानी की कठोरता बढ़ जाती है। पानी की लवणता मानक के अनुसार न होने पर लंबे समय तक सेवन करने से शरीर की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। इसका बुरा असर किडनी और ब्रेन पर भी पड़ता है। साथ ही सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (एसपीएम) भी मानक से ज्यादा है, जिसका असर त्वचा और और बालों पर पड़ता है। इसी वजह से इनके रोगियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।

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जिला खाद्य अधिकारी विनीत कुमार के अनुसार नवंबर में 26 सैंपल लिए गए थे। रिपोर्ट में एक भी सैंपल मानक के अनुरूप नहीं पाए गए। इनमें कई नामी-गिरामी कंपनियां भी शामिल हैं। इनके भी पानी में मेटल पार्टिकल्स मानक से ज्यादा पाए गए हैं। इन रिपोर्ट के आधार पर खाद्य निरीक्षकों से आख्या मांगी गई है, जिसके मिलने पर मुकदमे दर्ज किए जाएंगे। इसके अलावा मानकों का उल्लंघन करने वाले 23 प्लांट सील भी कर दिए गए। श्रीराम प्रोडक्ट इंडिया के मालिक विनोद पांडेय कहते हैं कि 2004 में उन्होंने बोतल बंद पानी की कंपनी की स्थापना की। उस समय अवैध कंपनियां बहुत कम थीं।

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बाद में हर गांव में अवैध प्लांट चलने लगे। 15 से 20 रुपये में बोतल पहुंचानी लगी, जबकि मानकों का पालन करते हुए 20 लीटर के बोतल पर 25 से 30 रुपये खर्च रुपये आता है। परिवहन और लाभ जोड़ने पर कीमत 30 से 35 रुपये हो जाती है। महंगा होने के कारण लोग खरीद नहीं रहे थे। इसलिए 2014 में पानी का कारोबार बंद करना पड़ा। फोनरवा के अध्यक्ष एनपी सिंह कहते हैं कि अवैध प्लांटों का बोतल बंद पानी पीना लोगों की मजबूरी भी है। प्राधिकरण से मिलने वाले पानी पर भरोसा नहीं हो रहा। कुछ दिन साफ पानी के बाद अचानक गंदा पानी शुरू हो जाता है। गंगाजल से गुणवत्ता सुधरी है, मगर अभी और सुधार की जरूरत है। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण के चेयरमैन से इस मसले पर बात हुई है। उनसे जगह-जगह प्लांटों पर आरओ सिस्टम लगाने की मांग की गई है।
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