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दुनिया में ऐसी कोई चीज नहीं जो वेल्लु न बना सके, इसलिए कहलाने लगे 8वां अजूबा 

Thu, 28 Sep 2017 08:21 PM IST
Updated Thu, 28 Sep 2017 08:21 PM IST
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There is no such thing in the world that can not be made by Vellu
चेन्नई के वेल्लु ने यूं बना दिए सात अजूबे - फोटो : अमर उजाला
चेन्नई के रहने वाले इस साधारण से शख्स ने कहीं से कोई तालीम हासिल नहीं की लेकिन कलाकारी ऐसी कि महज 25 साल में वो मुकाम हासिल कर दिखाया जहां खुद उन्हें दुनिया का 8वां अजूबा कहा जाने लगा। आप भी सोच में पड़ गए ना कि आखिर कौन है ये शख्सियत...? तो चलिए आपको मिलाते हैं वेल्लु से... 


 
There is no such thing in the world that can not be made by Vellu
वेल्लु द्वारा तैयार की गई चीन की दीवार - फोटो : अमर उजाला
वेल्लु का जन्म चेन्नई में हुआ और वहीं पर ही वे पले-बढ़े। छोटे से थे तभी से जबरदस्त कला का शौक रखते थे। रोज नए-नए नमूने बनाते। यही सब करते-करते वे नमूने तैयार करने में मशगूल रहते और इस विद्या में इतने निपूण हो गए कि फिर आगे चलकर बढ़े काम इन्हें मिलने लगे। यहीं से उनकी असल उड़ान शुरू हो जाती है। 

वेल्लु अब अपने काम की पहचान से अलग-अलग राज्यों की सैर करने लगे हैं। उनकी कला की डिमांड तेजी से बढ़ी है। वे कहते हैं कि जब उन्होंने इसकी शुरुआत की थी तो उन्हें खुद ये अंदाजा नहीं था कि उनकी कला आने वक्त में इतनी फेमस होने वाली है। 

वे कहते है कि आज लोग अपनी भाग-दौड़ भरी जिंदगी से ऊब चुके हैं तो बस एक बार मेरे बनाए नमूनों के दर्शन कर लें तो तबीयत हरी हो जाएगी। बातचीत में साउथ इंडियन एक्टर स्टाइल में वेल्लु कहते हैं 'ऐसी कोई चीज नहीं जो वेल्लु ना बना सके...' 

 
There is no such thing in the world that can not be made by Vellu
मेले की भीड़ को आकर्षित कर रही वेल्लु की रचना - फोटो : अमर उजाला
आगे जोड़ते हुए वेल्लु बोले कि बस एक बार तस्वीर में दिखा दो कि ये बनाना है और फिर सब मुझ पर छोड़ दो। बड़े से बड़ा और छोटे से भी छोटा आकार का या जैसा कहोगे वैसा नमूना बनाकर के दूंगा। 

बता दें वेल्लु ज्यादा पढ़ें-लिखे नहीं हैं लेकिन अपने काम में उनसे बड़ा ज्ञानी पुरुष शायद ही कोई मिले। वेल्लु बताते हैं कि उनकी टीम में तकरीबन 25 से 30 लोग काम करते हैं। खासियत ऐसी कि जितने लोग उनकी टीम में होते हैं, सभी तमिलनाडु के रहने वाले है। 

वेल्लु के अलावा इनमें से कोई भी हिंदी बोलना नहीं जानता है। वे अपनी टीम मेंबर को जो दिशा-निर्देश देते हैं सभी वैसे ही काम करते हैं। वेल्लु ने इस बार अपनी कला से दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके के रामलीला मैदान में ऐसी जान डाली है कि वहां आने वाला हर शख्स उनका कायल हो गया है।

 
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वेल्लु के टीम के लोग काम के वक्त - फोटो : अमर उजाला
यहां उन्होंने दुनिया के 7 अजूबे बनाकर खड़े कर दिए। इन अजूबों को देखने के लिए शुरुआत चीन की दिवार से करनी होगी। सबसे पहले चीन की दीवार का नमूना लगाया गया है। तकरीबन 40 फीट ऊंचा दीवारनूमा बैनर जिस पर चीन की दिवार बनी है ठीक वैसा फील देती है जैसे असलियत में चीन के दीवार सामने देख रहे हों।

इसे पार करने के लिए पूल तैयार किया गया है। इसके पीछे बाकी के छह नमूने खड़े किए गए हैं। बाहर से इन नमुनों के सिर चमकते हैं जो भीड़ के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए है। अंदर दाखिल होते ही सबसे पहले सामने बने विशालकाय ताजमहल के दर्शन होते हैं। साथ में पीसा की झूलती मिनार, स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी, आइफिल टावर, रोम का कोलोसियम, क्राइस्ट द रिडिमर और मिस्र का पिरामिड  नजर आते हैं।

उनके इन नमूनों को लेकर मेले में आने-जाने वाले लोगों के चेहरों पर जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है। वेल्लु बताते हैं कि पिछले साल रामलीला के दौरान यहीं पर उन्होंने माता वैष्णों देवी का भव्य मंदिर तैयार किया था जिसे देखने के लिए उस वक्त मेले में सैलाब उमड़ आया था, जबकि इससे पहले उन्होंने अमरनाथ का बर्फ से बना शिवलिंग भी बनाया था।
 
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दिखने में एक दम साधारण रहते हैं वेल्लु - फोटो : अमर उजाला
वेल्लु बताते हैं कि वे 1988 में दिल्ली आए थे। यहां आकर पहले उन्होंने यहां का कल्चर समझा और फिर उसमें ढलना शुरू कर दिया। उन्हें इसमें ज्यादा वक्त नहीं लगा। लोग वेल्लु को नाम से जानने लगे।

वेल्लु ने कुछ छोटे-छोटे नमूने बनाए लेकिन इससे उनका कुछ नहीं होने वाला था ये बात वेल्लु ने जल्द समझ ली। उनको समझ आ गया ये शहर के लोग बड़ी चीजे दे्खना पसंद करते हैं जहां जाना केवल इनका ख्वाब हो सकता है। बस फिर क्या था वेल्लु ने वैसा ही किया।

1992 में वेल्लु ने दिल्ली के लाल किला के सामने विशालकाय चीन का ड्रैगन बनाकर तैयार किया। लोगों को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ। चमचमाती लाइटों के बीच में मानों मुंह से आग फेंकता सचमुच का कोई ड्रैगन देख रहे हों। उनकी इस रचना ने उन्हें यहां कामयाबी दिलाई जिसके बलबूते उन्हें गुरुग्राम के फन एंड फूड विलेज को तैयार करने का कॉन्ट्रेक्ट मिल गया। जी हां गुरुग्राम स्थित फन फूड विलेज को डिजाइन करने वाले वेल्लु ही हैं। 

उनके जीवन की इस सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत छिपी है जो उन्हें यहां तक ले आई है। वेल्लु कहते हैं कि उनका सफर यहीं नहीं थमने वाला। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि विश्व में जो चीजे नमूनों के तोर कल्पना 
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