फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में लगभग दो महीने बाद अदालत ने इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो(सीबीआई) को सौंप दी है। सीबीआई अपनी जांच शुरू कर चुकी है और इसी कड़ी में उसने सुशांत की मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी(साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी) कराने का निर्णय लिया है। भारत में सुशांत का केस तीसरा ऐसा केस है जिसमें साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी होगी। इससे पहले ऐसा सुनंदा पुष्कर मौत केस और बुराड़ी के एक घर में नौ लोगों की सामूहिक मौत के मामले में हुआ था। यह जानना दिलचस्प होगा कि आखिर यह जांच कैसे होती है और बुराड़ी और सुनंदा पुष्कर मामले में साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी की क्या रिपोर्ट आई थी...
सुशांत केस: मौत के बाद किया जाने वाला वो टेस्ट, जिसने सुशांत के पहले बुराड़ी केस में भी किए थे चौंकाने वाले खुलासे
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मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी खास तौर से आत्महत्या के केस में होती है ताकि यह पता लगाया जा सके कि मरने से पहले शख्स की मानसिक स्थिति कैसी थी। वह किस तरह से सोचता था या फिर उसके जहन में क्या बातें चल रही थीं और क्या उसके अंदर आत्महत्या का ख्याल भी था या नहीं। मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी में मनोचिकित्सक, फॉरेंसिक की टीम (एफएसएल) आदि मृतक के मरने से पहले जिन जगहों, लोगों या चीजों से जुड़ा था उन सबका अध्ययन किया जाता है। उसके मैसेज, सोशल मीडिया पोस्ट व लोगों से की गई बातचीत का अध्ययन। उसकी मानसिक स्थिति का पता लगाया जाता है कि वह सुसाइड कर सकता था या नहीं। इस अध्ययन के सहारे बुराड़ी के एक घर में 11 लोगों की आत्महत्या की गुत्थी को सुलझाया गया था। जानिए क्या थी वो रिपोर्ट....
उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी में 2018 जुलाई महीने में एक परिवार के 11 सदस्यों के उनके घर में मृत मिलने के मामले में 2018 सितंबर में आई मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि उन लोगों ने खुदकुशी नहीं की थी बल्कि एक अनुष्ठान के दौरान दुर्घटनावश वे सभी मारे गए थे। दिल्ली पुलिस ने जुलाई में सीबीआई को साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी करने को कहा था। रिपोर्ट के अनुसार, मृतकों की मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी के अध्ययन के आधार पर घटना आत्महत्या की नहीं थी बल्कि दुर्घटना थी जो एक अनुष्ठान करते समय घटी। किसी भी सदस्य का अपनी जान लेने का इरादा नहीं था। मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी के दौरान सीबीआई की केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) ने घर में मिले रजिस्टरों में लिखी बातों का तथा पुलिस द्वारा दर्ज किए गए चूंडावत परिवार के सदस्यों और मित्रों के बयानों का विश्लेषण किया था।
सीएफएसएल ने परिवार के सबसे बड़े सदस्य दिनेश सिंह चूंडावत और उनकी बहन सुजाता नागपाल तथा अन्य परिजनों से भी पूछताछ की। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी में किसी व्यक्ति के मेडिकल रिकॉर्ड का विश्लेषण करके, मित्रों और परिवार के सदस्यों से पूछताछ करके तथा मृत्यु से पहले उसकी मानसिक दशा का अध्ययन करके उस शख्स की मानसिक स्थिति पता लगाने का प्रयास किया जाता है।
सूत्रों के अनुसार पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि परिवार का सदस्य ललित चूंडावत अपने दिवंगत पिता की तरफ से निर्देश मिलने का दावा करता था और उसी हिसाब से परिवार के अन्य सदस्यों से कुछ गतिविधियां कराता था। उसने ही परिवार को ऐसा अनुष्ठान कराया जिसमें उन्होंने अपने हाथ-पैर बांधे तथा चेहरे को भी कपड़े से ढंक लिया। चूंडावत परिवार के ये 11 सदस्य बुराड़ी स्थित घर में मृत मिले थे।
देश में सबसे पहले सुनंदा पुष्कर मौत मामले में मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी की गई थी। इसके जो परिणाम सामने आए उसके चलते ही आज तक इस केस का फैसला नहीं हो सका।