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प्रॉपर्टी डीलर से बने ग्रेनो के कर्ता-धर्ता, आठ साल में ही संविदा सहायक मैनेजर से बन गए महाप्रबंधक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
Updated Wed, 19 Sep 2018 03:37 AM IST
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केंद्रीय मंत्री के साथ रविंद्र तोंगड़
- फोटो : अमर उजाला
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2002 में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में तैनाती से पूर्व रविंद्र तोंगड़ प्रॉपर्टी डीलर थे। इसके बाद वे प्राधिकरण में अस्थायी सहायक प्रबंधक बने। 2012 तक स्थिति यह रही कि जिस तरह चाहा, वैसे ग्रेटर नोएडा शहर को बसाया। नॉलेज पार्क में शिक्षण संस्थानों को जमीन आवंटन करना हो या फिर ग्रेटर नोएडा वेस्ट में उद्योग की जमीन को लैंडयूज बदलकर बिल्डरों को देना, सभी में रविंद्र तोंगड़ की तूती बोलती थी।
रविंद्र तोंगड़ का स्कूल
- फोटो : अमर उजाला
रविंद्र तोंगड़ ने 2002 में संविदा पर बतौर सहायक प्रबंधक ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ज्वाइन किया था। बसपा शासनकाल में ही कुछ समय बाद प्राधिकरण में पद रिक्त होने पर उन्होंने आवेदन किया। उनकी प्राधिकरण में स्थायी तौर पर प्रबंधक के पद पर तैनाती हो गई। बताया जाता है कि उस समय के एक मंत्री की सिफारिश इसमें काम आई। 2008-09 तक वे प्रबंधक रहे। उसके बाद पद से इस्तीफा दे दिया।
रविंद्र तोंगड़ के घर के बाहर खड़ी आयकर विभाग की गाड़ी
- फोटो : अमर उजाला
इसके तुरंत बाद प्राधिकरण में महाप्रबंधक के चार पद सृजित किए गए। इनमें से एक पद पर रविंद्र तोंगड़ की तैनाती कर दी गई। संपत्ति विभाग का जिम्मा उन्हें दे दिया गया। 2012 में सपा सरकार बनने के बाद कुछ समय तक वे प्राधिकरण के जीएम पद पर रहे। उसके बाद इस्तीफा दे दिया। बताया जाता है कि 2008-09 में जिस समय रविंद्र तोंगड़ को जीएम का चार्ज मिला, उस समय वे बसपा के शीर्ष नेतृत्व के बेहद करीब आ चुके थे।
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दोबारा आयकर सर्वे के पीछे पीसी गुप्ता का बयान अहम
आयकर विभाग के अधिकारी रविंद्र तोंगड़ के घर पहुंचे
- फोटो : अमर उजाला
इनको संपत्ति विभाग का चार्ज दिया गया। प्लानर की डिग्री से हालांकि उनका दूर तक वास्ता नहीं था, लेकिन पूरे ग्रेटर नोएडा शहर का प्लान उन्होंने अपनी मर्जी से बनवाया। जिसको जहां चाहा, जमीन आवंटित की। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में अधिकतर आवंटन रविंद्र तोंगड़ के समय हुए। यह जमीन औद्योगिक भूखंडों के लिए थी। इसका लैंडयूज बदलकर रिहाइश कर दिया गया और फिर बिल्डरों को जमीन आवंटित कर दी। हालांकि लैंडयूज मामले की जांच चल रही है। इस वजह से किसान कोर्ट गए और ग्रेटर नोएडा वेस्ट का विवाद खड़ा। इसमें ढाई लाख खरीदारों की गाढ़ी कमाई फंस गई। नॉलेज पार्क में तमाम शिक्षण संस्थानों का आवंटन भी रविंद्र ने ही किया।
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रविंद्र तोंगड़ के घर के बाहर आते आयकर विभाग के अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के पूर्व जीएम रविंद्र तोंगड़ के यहां आयकर छापा 2012 में भी पड़ चुका है। अब दोबारा छापे के पीछे पीसी गुप्ता के बयान को अहम बताया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि मथुरा जमीन घोटाले के आरोप में गिरफ्तार यीडा के पूर्व सीईओ पीसी गुप्ता ने पुलिस पूछताछ में रविंद्र तोंगड़ का नाम लिया है। वे खुद को मोहरा बताकर रविंद्र तोंगड़ को खिलाड़ी कह रहे थे। पीसी गुप्ता ने कहा था कि ज्यादा माल रविंद्र तोंगड़ के पास है। सूत्र बताते हैं कि तभी से आयकर की टीम उनकी रेकी में जुट गई थी। एक समय था जब ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के अधिकतर आवंटन इन दोनों अफसरों के इशारे पर किए जा रहे थे।