प्रियंका गांधी का कांग्रेस की राजनीति में पदार्पण 24 साल पहले 1995 में हुआ। तब वे मां सोनिया गांधी के साथ पहली बार किसी सार्वजनिक मंच पर दिखी थीं। राजीव गांधी के निधन के बाद सोनिया पहली बार पति की कर्मभूमि अमेठी गई थीं। कई छोटे-मोटे कार्यक्रमों के अलावा उन्होंने एक सार्वजनिक सभा को संबोधित किया।
2 of 5
priyanka gandhi
- फोटो : pti
रुंधी आवाज में सोनिया के कंठ से निकले एक वाक्य ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी। उन्होंने कहा था, मुझे बहुत दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि मेरे पति के हत्यारे अभी भी जिंदा हैं। उनकी हत्या के चार साल बाद भी इस मामले में जांच बहुत धीमी गति से चल रही है। तब प्रियंका ने भावुक हो मां को मंच पर संभाला था। मीडिया में लंबे समय तक बहस चली कि यह उनकी वेदना थी या नरसिंहा राव के नेतृत्व में चल रही तत्कालीन सरकार पर एक बड़ा हमला।
3 of 5
priyanka gandhi
- फोटो : pti
हालांकि सोनिया ने राजनीति में औपचारिक पदार्पण 1998 में किया और पहला चुनाव अमेठी से 1999 में लड़ा लेकिन अमेठी में विकास कार्यों की देखरेख की जिम्मेदारी लगातार प्रियंका ने ही उठाई। जब मां और भाई पूरे देश में चुनाव प्रचार करते थे, तब अमेठी और रायबरेली में प्रचार का जिम्मा प्रियंका पर रहता था। अब वे इसी जिम्मेदारी को पूर्वी उत्तर प्रदेश के 40 चुनाव क्षेत्रों में विस्तार देंगी।
4 of 5
priyanka gandhi
- फोटो : pti
ऐसे करती हैं प्रचार
दादी इंदिरा और मां सोनिया की तरह प्रियंका भी चुनाव प्रचार के दौरान सिर्फ सूती साड़ियां पहनती हैं। पूरे इलाके में वे लोगों से मिलतीं हैं और दुख-दर्द साझा करती हैं। कई लोगों को वे नाम से जानती हैं। बाकी के साथ बहन और काकी के रिश्ते बना लेती हैं। कस्बों में छोटी-छोटी सभा कर लोगों से सीधे जुड़ती हैं।
5 of 5
priyanka gandhi
- फोटो : pti
जेड श्रेणी की सुरक्षा भी स्थानीय महिलाओं को गले लगाने में आड़े नहीं आती है। यह बात और है कि 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा की आंधी ऐसी चली कि प्रियंका का जादू भी अमेठी और रायबरेली में नाकाम रहा।