सत्ता हासिल करने के बाद लालकिले की प्राचीर से पहली बार बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसद आदर्श ग्राम योजना का एलान किया था। इसके तहत सांसदों को पांच साल में तीन आदर्श गांव बनाने थे। योजना जयप्रकाश नारायण की जयंती 11 अक्तूबर 2014 को लांच की गई। दूसरे प्रदेश की तरह दिल्ली के भी सातों सांसदों ने पहली खेप में सात गांव गोद लिए।
योजना के अनुसार, दिल्ली का पहला आदर्श गांव 2016 में बन जाना चाहिए था। लेकिन अभी ये सभी गांव आदर्श बनने के करीब भी नहीं पहुंचे सके हैं। आदर्श गांव योजना की गाइडलाइन करीब 40 पन्नों की है, जिसमें 80 से ज्यादा काम बताए गए हैं। अमर उजाला ने गोद लिए गांवों की सड़क, स्कूल, डिस्पेंसरी, पानी, सीवर जैसी बुनियादी जरूरतों की पड़ताल की। आदर्श गांवों की हकीकत बताती पेश है एक रिपोर्ट...
1 . कादीपुर आदर्श गांव: उत्तर पूर्वी दिल्ली (लोकसभा सीट)
आबादी : कुशक नगर एक व दो के साथ कादीपुर की आबादी करीब 8,000।
सड़क : बीते दिनों हुई मरम्मत।
स्कूल: प्राइमरी स्कूल, क्षमता से ज्यादा छात्र।
डिस्पेंसरी: कोई नहीं।
पानी: पेयजल की बड़ी किल्लत।
सीवर: हालत खराब।
स्थानीय निवासियों की राय
गांव के बीच से गुजरी जीटी रोड को बराड़ी-बख्तावरपुर रोड से मिलाने वाली सड़क पिछले सालों में टूटी पड़ी थी। इस वक्त इसमें पैबंद जरूर लग गया है। पानी के लिए भी बहुत मारामारी रहती है। लोगों को खरीदकर पानी पीना पड़ता है। -विकास सैनी, स्थानीय निवासी
गांव में न तो डिस्पेंसरी है और न ही कायदे का स्कूल। गांव की सड़कें भी अमूमन टूटी रहती हैं। वाई-फाई भी आए दिन बंद रहता है। कहने को कादीपुर आदर्श गांव है, लेकिन सुविधा यहां की आदर्श नहीं हैं। -राहुल कुमार, स्थानीय निवासी
सांसद बोले
गांव के लोगों के साथ बैठक कर ऐसे सारे प्रोजेक्ट पूरे कराए हैं, जिनकी मांग की गई थी। गांव के विकास पर करीब 1.5 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। पिछले साल पार्क का निर्माण कराया गया। पानी की कमी दूर करने, डिस्पेंसरी व ढलाव घर बनवाने कोशिश जारी है। दिल्ली सरकार से उचित सहयोग न मिलने के कारण यह पूरा नहीं हो सका है। -मनोज तिवारी, सांसद व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, उत्तर पूर्वी दिल्ली
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महेश गिरी, सांसद, पूर्वी दिल्ली संसदीय क्षेत्र
2. चिल्ला आदर्श गांव: पूर्वी दिल्ली संसदीय क्षेत्र
आबादी: करीब 25,000
स्कूल: गांव की जमीन पर बने तीन बड़े निजी स्कूलों में गांव के बच्चों को नहीं मिलता दाखिला।
पानी: दूषित पानी की होती सप्लाई।
सीवर: अमूमन रहा जाम।
डिस्पेंसरी: नहीं है।
सड़क: टूटी-फूटी।
स्थानीय निवासियों की राय
पेयजल की गांव में बहुत दिक्कत है। अमूमन इलाके में गंदा पानी आता है। कई बार पानी में सीवर की गंदगी तक आ जाती है। हालांकि, अभी स्थिति थोड़ी ठीक है। गांव के अंदर की सड़कें भी टूटती रहती हैं। -नरेंद्र सिंह, स्थानीय निवासी
गांव की जमीन पर तीन-तीन निजी स्कूल चल रहे हैं, लेकिन यहां के बच्चों को दाखिला इनमें नहीं मिलता। गांव की सीमा से बाहर के सरकारी स्कूलों में बच्चों को भेजना पड़ता है। सीवर की भी समस्या है। आए दिन ओवरफ्लो होता है। -रविंद्र कुमार, स्थानीय निवासी
सामुदायिक भवन व चौपाल बनकर तैयार है। सीसीटीवी की व्यवस्था की गई है। स्ट्रीट लाइट भी लगवाईं गई हैं। प्रधानमंत्री की तरफ से चलाई जाने वाली योजनाओं का फायदा पहुंचाने के लिए कई शिविर लगाए गए हैं। पानी-सीवर आदि की दिक्कत दिल्ली सरकार से उचित सहयोग न मिलने से बनी हुई है। -महेश गिरी, सांसद, पूर्वी दिल्ली संसदीय क्षेत्र
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डॉ. उदित राज, सांसद, उत्तर-पश्चिमी संसदीय क्षेत्र
3. जौंती आदर्श गांव: उत्तर-पश्चिमी संसदीय क्षेत्र
आबादी: करीब 6,200
सड़क: बेहतर स्थिति में हैं।
स्कूल: क्षमता से ज्यादा छात्र
अस्पताल: बनने का इंतजार।
पानी: गर्मियांं बढ़ते ही पेयजल किल्लत शुरू।
सीवर: नहीं है।
अस्पताल व पॉलीटेक्निक कॉलेज की दरकार है। सड़क आदि बुनियादी सुविधाओं से जुड़े करीब 26 काम हुए हैं। इनमें खासतौर से सड़क निर्माण, शौचालय निर्माण, मिनी स्टेडियम, बिजली, पानी की सुविधा बेहतर हुई है। -ईश्वर सैनी, स्थानीय निवासी
सांसद ने बेहतर काम किया। हम जात-पात वाला गांव नहीं चाहते हैं। प्राचीन शिक्षा के लिए बेहतर केंद्र होना चाहिए ताकि गांव की पुरानी संस्कृति को संजोया जा सके। हम अपने गांव को दुनिया का अनोखा गांव बनाना चाहते हैं। -ईश्वर चिकारा, स्थानीय निवासी
जौंटी गांव में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। ग्रामीण पर्यटन स्थल से जोड़ने का काम चल रहा है। पहले गांव के लोग खुले में शौच जाते थे, उनके घरों शौचालय का निर्माण किया गया। हाई-मास्ट लाइट, सड़क निर्माण, चौपाल, फिरनी रोड, पानी का पाइप लाइन बदलने का काम, पशु चिकित्सा केंद्र, स्पोर्ट्स कांप्लेक्स को मंजूरी, ओपन जिम समेत कई मूलभूत सुविधा दी गई। -डॉ. उदित राज, स्थानीय सांसद
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रमेश बिधूड़ी, सांसद, दक्षिणी दिल्ली संसदीय क्षेत्र
4. भाटी कलां आदर्श गांव: दक्षिणी दिल्ली संसदीय क्षेत्र
आबादी: करीब 6000 हजार
सड़क: हालत टूटी-फूटी है।
स्कूल: पांचवी के बाद कोई इंतजाम नहीं।
डिस्पेंसरी: चिकित्सा की कोई सुविधा नहीं।
पानी: जल बोर्ड की लाइन न होने से पानी खरीदना पड़ता है।
सीवर: नहीं है।
स्कूल न होने से हमारी बच्ची पांचवी के बाद आगे नहीं पढ़ सकी। इलाके का माहौल इतना असुरक्षित है कि बेटी को पढ़ने के लिए दूर नहीं भेज सकती। शाम होते ही घर से बाहर निकलने में डर लगता है। -सुमन, स्थानीय निवासी
रोजगार तो तब मिलेगा जब शिक्षा होगी। मैं भी उसी पांचवी कक्षा वाले स्कूल में पढ़ा, मेरा बेटा भी और अब मेरा पोता भी उसी स्कूल में पढ़ रहा है। आबादी बढ़ने के बावजूद स्कूलों की दशा व दिशा नहीं बदली। -किशन, स्थानीय निवासी
दिल्ली सरकार से जमीन न मिलने पर स्कूल व अस्पताल नहीं बन सका। इसके साथ ही गांव में पानी पहुंचाने के लिए जल बोर्ड की भी कोई दिलचस्पी है। जबकि इसके लिए कई बार मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से पत्राचार हुआ है। सड़कें व स्ट्रीट लाइट के लिए काम किया है।- रमेश बिधूड़ी, सांसद, दक्षिणी दिल्ली संसदीय क्षेत्र
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डॉ. हर्ष वर्धन, सांसद व केंद्रीय मंत्री, चांदनी चौक संसदीय क्षेत्र
5. धीरपुर आदर्श गांव: चांदनी चौक संसदीय क्षेत्र
आबादी: करीब 46,578 हजार।
सड़क: टूटी-फूटी हालत में।
स्कूल: प्राइमरी तक एक स्कूल, क्षमता से ज्यादा छात्र।
डिस्पेंसरी: चिकित्सा सुविधा नहीं है।
पानी: आपूर्ति बाधित, देर रात आता पानी।
सीवर: कई बार होता ओवर फ्लो।
गांव में न कोई डिस्पेंसरी है, न ही कोई सरकारी अस्पताल व बारात घर। इससे लोगों को दूसरे इलाकों पर निर्भर रहना पड़ता है। हालांकि, प्राथमिक विद्यालय और अंबेडकर चौपाल का कायाकल्प हुआ है। पानी की सप्लाई का आलम यह है कि रात 12 बजे तक इसके लिए जागना पड़ता है। दिन में पानी की सप्लाई ही नहीं दी जाती। - सुरेन्द्र मलिक, अध्यक्ष, धीरपुर गांव रेजिडेंट वेलफेयर विकास समिति
बच्चों के खलने के लिए कोई पार्क नहीं है। यहां सरकार ने श्मशाम भूमि पर विकास कार्य किया, इससे लोगों को फायदा हुआ, लेकिन सरकारी सुविधाओं के अभाव में इलाके के लोग परेशान हैं। यहां सरकारी जमीनों को डीडीए ने किसानों से अधिकृत कर लिया, लेकिन सरकारी सुविधाओं के नाम पर कोई नया निर्माण नहीं कराया गया। -शेर सिंह, स्थानीय निवासी
सांसद बोले
गांव की चौपाल व प्राथमिक विद्यालय का कायाकल्प कराया गया है। पानी की समस्या को लेकर स्थानीय लोगों से अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है और पानी की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की है। वहीं, दिल्ली सरकार ने 500 स्कूल खोलने का दावा किया था, लेकिन इस गांव में कोई स्कूल नहीं खोला गया। -डॉ. हर्ष वर्धन, सांसद व केंद्रीय मंत्री