दिल्ली में आप-कांग्रेस के गठबंधन को लेकर चल रही ऊहापोह खत्म होने का नाम नहीं ले रही। कल तक जहां यह माना जा रहा था कि राजधानी में आप-कांग्रेस का गठबंधन तय है वहीं आज सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि दोनों पार्टियों का साथ आना मुश्किल ही है। यानी गठबंधन नहीं होगा। आगे पढ़ें क्या हो सकती है इस गठबंधन के बनते-बनते रह जाने की वजह...
दिल्ली में आप-कांग्रेस गठबंधन की उम्मीदें क्यों बेहद कम, 5 कारण
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अब तक पार्टी सूत्रों से आ रही खबर के मुताबिक दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच 4-3 के सूत्र पर सीटों का बंटवारा हुआ था। इसके तहत आप 4 सीटों पर और कांग्रेस 3 सीटों पर चुनाव लड़ रही थी। चूंकि आप ने दिल्ली में कांग्रेस को सिर्फ तीन सीटें दी थीं इसलिए वह हरियाणा में तीन सीटें मांग रही थी, जिस पर सहमति नहीं बन सकी।
सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि हरियाणा कांग्रेस ने राज्य में आम आदमी पार्टी को एक भी सीट देने से मना कर दिया है। यही वजह है कि आप ने कांग्रेस से दूरी बना ली है और गठबंधन उन्हीं शर्तों पर करने को राजी है जब कांग्रेस उसकी शर्त मान ले। कांग्रेस के उच्चस्तरीय सूत्रों का कहना है कि मंगलवार को एक बड़ी बैठक हुई थी जिसमें गठबंधन की संभावनाओं को खत्म कर दिल्ली में सभी सीटों पर अपने नेताओं से चुनाव लड़ने को तैयार रहने के लिए कहा है।
गठबंधन टूटा तो नेता किस मुंह से मांगेंगे वोट
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि गठबंधन के बाद कांग्रेस का विधानसभा की तीस सीटों पर दावा बनेगा। क्या आप विधानसभा में इतनी सीटें कांग्रेस को देगी। यह संभव नहीं है। ऐसे में कांग्रेस को विधानसभा का चुनाव अपने स्तर पर लड़ना पड़ेगा। एक साल में ही गठबंधन टूटेगा और फिर हम किस प्रकार से आप के खिलाफ वोट मांगने मतदाताओं के पास जाएंगे।
आप के खिलाफ माहौल कांग्रेस के लिए शुभ संकेत
कांग्रेस के कई नेताओं का यह भी मानना है कि जिस प्रकार दिन प्रति दिन दिल्ली में आप के खिलाफ माहौल बन रहा है, वह आने वाले समय में कांग्रेस के लिए शुभ संकेत है। ऐसे में गठबंधन कांग्रेस की दिल्ली में वापसी में बाधा बनेगा। इसके अलावा आप की 49 दिन की सरकार बनवाकर कांग्रेस को क्या मिला, कांग्रेस पहली बार दिल्ली में जीरो पर पहुंच गई।