जिला अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ द्वारा इंसानियत को शर्मसार करने का मामला सामने आया है। दिमागी रुप से बीमार किशोर (14) के अस्पताल स्टाफ ने पट्टी से हाथों को स्ट्रेचर के जरिये बांधकर शौचालय के बाहर लिटा दिया है। इसके पीछे स्टाफ का तर्क है कि अस्पताल में बुखार के मरीजों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि उसका ध्यान नहीं रख पा रहे हैं।
अस्पताल में इंसानियत हुई शर्मसार, बीमार मरीज को बांधकर शौचालय के बाहर छोड़ा
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जबकि अमर उजाला संवाददाता ने मौके पर देखा तो किशोर दर्द से तड़प रहा था। अस्पताल की इमरजेंसी के मुताबिक, 4 सितंबर को 108 एंबुलेंस किशोर को इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर आई थी। किशोर के परिजन साथ नहीं हैं। अज्ञात नाम से उसे भर्ती किया गया है। किशोर को रेफर किया गया है जिसकी जानकारी पुलिस को भी दी गई है।
लेकिन पुलिस उसे इलाज के लिए मानसिक रोगियों के अस्पताल लेकर ही नहीं जा रही है। एक अस्पताल कर्मी से पूछा गया तो उसने बताया कि किशोर स्टाफ को परेशान करता है, इसलिए हाथ बांधे गए हैं। जब खाना देते हैं तो हाथ खोल देते हैं। रविवार को उसे वार्ड से निकालकर इमरजेंसी के बाहर स्ट्रेचर पर लिटा दिया गया है।
मरीज दिमागी तौर पर बीमार है। अस्पताल को गंदा कर देता है। इस वजह से उसके हाथ बांध कर रखे हुए हैं। मरीज को दिमागी डॉक्टर को दिखाना है। अस्पताल में दिमाग का डॉक्टर नहीं है।
- डॉक्टर एनएम माथुर, सीएमएसहो सकता है कि मरीज को इंजेक्शन दिया जा रहा, इसलिए हाथ बांधें गए हों। इस बारे में अस्पताल के डॉक्टर बेहतर बता पाएंगे। - डॉक्टर विजय दीपक वर्मा, सीएमओ
अगर यहां पर इलाज नहीं हो सकता तो अस्पताल प्रशासन को तुरंत किशोर को दूसरे अस्पताल में इलाज के लिए भेजना चाहिए। चाइल्ड लाइन की टीम अस्पताल प्रशासन के खिलाफ शिकायत करेगी। ऐसे कैसे किसी के हाथ बांधकर नहीं रखे जा सकते।- सत्यप्रकाश, इंचार्ज, चाइल्ड लाइन