राजस्थान से शुरू हुए महिलाओं की चोटी कटने के मामले हरियाणा के मेवात, पलवल, गुरुग्राम और फरीदाबाद सहित कई जिलों में लगातार सामने आ रहे हैं और यह घटनाएं खतरनाक रुख अख्तियार करती जा रही हैं। महिलाओं और उनके परिजनों में भय का माहौल है। मनोचिकित्सक जहां इन घटनाओं को अफवाह करार दे रहे हैं, वहीं पुलिस के हाथ भी अभी तक इसकी तह तक नहीं पहुंचे हैं। कई गांवों से कुछ एफआईआर दर्ज की गई हैं, लेकिन जांच में अब तक कुछ भी सामने नहीं आया है। ग्रामीण गांव में दिखाई देने वाले हर किसी अनजान व्यक्ति को शक की निगाह से देखते हैं और इसके चलते कई लोग पिट चुके हैं। कई विक्षिप्त पुलिस के हवाले किए जा चुके हैं, लेकिन सच क्या है अभी इस पर रहस्य बना हुआ है। जानें चोटी काटने की रहस्यमयी घटनाओं के पीछे क्या है सच्चाई?
बिल्ली जैसी परछाई ने पीछे से धक्का दिया और काट ले गई चोटी... ये है रहस्यमयी घटनाओं के पीछे का सच?
अफवाहों के इस दौर में जहां तांत्रिक लोगों को इस संकट से छुटकारा दिलाने के नाम पर वसूली करने में लगे हैं, वहीं लोग भी उनकी कही बातों पर आंख मूंदकर भरोसा कर रहे हैं। घरों के दरवाजे पर मेहंदी के हाथों की थाप और ताबीज बांधने के टोटके आम हो चुके हैं। पुलिस प्रशासन अफवाहों से बचने की एडवाइजरी जारी कर रहा है, लेकिन कोई नतीजा अब तक निकलता नहीं दिख रहा। अमर उजाला टीम बुधवार को पड़ताल के लिए कई गांवों में गई और कुछ पीड़ित महिलाओं से सीधी बात की।
शरारती तत्व का काम नहीं बल्कि किसी जादू टोने का है असर
यह किसी गिरोह व शरारती तत्व का काम नहीं बल्कि यह किसी जादू टोने का असर है। यह कहना है तावड़ू के गांव बिस्सर अकबरपुर की पीड़ित महिला माया पत्नी बिल्लू का। अमर उजाला टीम ने जब उससे हकीकत जाननी चाही तो वह बोली ‘ मैं 29 जुलाई को अपनी जेठानी बीना के साथ अपने खेत में सुबह करीब सवा सात बजे घास काट रही थी। अचानक कंधे पर वजन सा महसूस हुआ। इसके बाद में बहोश हो गई। जेठानी ने मुझे उठाया तो देखा कि मेरी चोटी के बाल कटकर नीचे पड़े थे। जेठ महेंद्र जो स्वंय झाड़ फूंक का काम करते हैं। उन्होंने झाड़ा लगाया तो मुझे होश आया गया। पुलिस से हमें इस समस्या को सुलझाने की कोई उम्मीद नहीं है। हम झाड़ फूंक में ही विश्वास करते हैं। झाड़ फूंक ही इसका समाधान है। इस घटना के बाद से घर में दहशत का माहौल है। मैं घास काटने के लिए जंगल जाती हूं तो परिवार का कोई सदस्य साथ में जरूर होता है।’
शरीर में कुछ हलचल सी महसूस हुई और बाल कटे पड़े थे
शिकारपुर की परवीन पत्नी भुल्लू उर्फ शहीद ने बताया की ‘ मेरी चोटी के बाल दो बार कट चुके हैं। इस घटना से मेैं पूरी तरह डर-सहमी हूं। गत 25 जुलाई की रात करीब 8:30 बजे व 29 जुलाई सुबह 9 बजे मैें खाना बनाने जा रही थी। रसोई के दरवाजे पर पहुंची तो शरीर में कुछ हलचल सी महसूस हुई। पीछे मुडकर देखा तो मेरी चोटी के बाल कट कर नीचे गिरे हुए थे। पहली घटना के समय मुझे एक औरत का साया दिखाई दिया था। जबकि दूसरी बार ऐसा कुछ नहीं दिखा। यह सब जादू टोने का असर है, जिसका इलाज सिर्फ झाड फूंक है। किसी गिरोह या शरारती तत्व का यह काम नहीं हो सकता। बाल कटने की घटना के बाद वह बहोश हो गई थी।’
पीछे सू काइने कमर पर धक्का दियो और मैं नीचे गिर गई
पुन्हाना-नगीना रोड से गंाव शाह चौखा के पास लिंक रोड गांव फलैंडी को जाता है। सुबह के साढ़े 11 बज चुके हैं। कुछ ही देर में अमर उजाला टीम गांव फलैंडी में तिराहे पर स्थित आस मोहम्मद के मकान में पहुंचती है। आस मोहम्मद की 22 वर्षीय विवाहिता बेटी अफसाना की गत 30 जुलाई की रात करीब साढे़ नौ बजे चोटी कट गई थी। अमर उजाला के साथ आपबीती साझा करते हुए अफसाना ने बताया, ‘रात की साढ़े 9 बजे को टाइम हो, घर पर मैं और माई थे। माई कुछ काम में जुटी थी और मैं नमाज पढ़ने के लिए बदना में पानी लेकर वजू करने के लिए बैठी थी। इस बीच उसे एक सफेद कुत्ता दिखाई दियो, कमरा में रोटी-सब्जी रखी और वाको दरवाजो खुल्लो पड़ो थो। कहीं कुत्ता रोटी न कू खा जाऐ यासू वह वजू छोड़कर कमरा को दरवाजा बंद करन कू चल दी। जैसे ही वह दरवाजा बंद करने लगी पीछे सू काइने कमर पर धक्का दियो और मैं नीचे गिर गई, और चोटी कट गई।'