फरीदाबाद सेक्टर-88 स्थित 15 मंजिल इमारत डिस्कवरी पार्क सोसायटी के टॉप फ्लोर से कथित रूप से छलांग लगाकर आत्महत्या करने वाले 10वीं कक्षा के छात्र गौरव (बदला हुआ नाम) ने अपनी मौत का कारण स्कूल व प्रबंधन के उच्च अधिकारियों को माना है। अपनी सैक्शुएल्टी के बारे में मृतक छात्र ने सुसाइड नोट में जिक्र किया है। बीते दो साल से स्कूल बंद थे। इससे पहले सामाजिक विज्ञान की कक्षा के दौरान समलैंगिक व संबंधित समुदायों के बारे में पढ़ते हुए असहज हो गया। उस दौरान उसे पैनिक अटैक आया और तब से वह सामान्य होने के लिए जूझ रहा था। मृतक को पास से समझने वालों ने बताया कि वह एलजीबीटीक्यू व संबंधित विषयों पर बात करते समय सामान्य नहीं हो सका।
15वें माले से कूदा छात्र: बचाई जा सकती थी गौरव की जान, अगर दो सप्ताह पहले समझ लिया होता 'इशारा'
इस बीच बृहस्पतिवार देर रात 17 वर्षीय छात्र ने कथित रूप से छत से कूदकर अपनी जान दे दी। छात्र दो साल पहले स्कूल में पढ़ाए गए पाठ के बाद से अपनी पसंद, व्यवहार, सोच इत्यादि पर खुलकर बोलने लगा। स्कूल प्रबंधन से बात करने पर पता चला कि कुछ दो साल पहले कुछ विद्यार्थियों ने स्कूल कक्षा में उसके साथ दुर्वव्यहार किया। इसकी शिकायत छात्र ने अपनी मां से की। वह कहता था कि बच्चे उसे गे कहते हैं। स्कूल प्रबंधन से भी इन दिनों इसकी शिकायत की गई।
सुरजीत ने बताया कि परीक्षा को लेकर भी छात्र तनाव में था। वह कुछ समय पूर्व आयोजित हुई टेस्ट परीक्षा में आधा घंटे देरी से पहुंचा। इस बीच अपने परीक्षा के तनाव को छात्र ने अध्यापक से यह कहकर कम किया कि आप टेंशन मत लो, मैं परीक्षा कर लूंगा। आप मत घबराओ।
दो सप्ताह पहले दिया होगा इशारा
बीके नागरिक अस्पताल में बतौर मनोरोग चिकित्सक नियुक्त धर्मवीर नेहरा ने बताया कि छात्र यदि किसी अटैक या सदमे से गुजरा है तो वह निश्चित ही तनाव में होगा। ऐसे किशोरों को तुरंत चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता होती है। छात्र ने यदि आत्महत्या की है कि तो निश्चित रूप से एक या दो सप्ताह पहले कोई इशारा कर अपने इस कदम की हिंट दी होगी। बोर्ड कक्षा का छात्र होने के कारण वह निश्चित रूप से पढ़ाई के तनाव में भी होगा। सामाजिक व शैक्षणिक तनाव छात्र को परेशान कर रहे थे। ऐसे किशोरों पर नजदीक से निगरानी रखनी चाहिए। जरूरत है कि समय रहते मनोदशा को समझा जाए। कोई भी कदम अचानक उठाने के मामले नाम मात्र ही होते हैं। यदि ऐसे मामलों में डॉक्टर दवा सुझाते हैं तो उन्हें लगातार फॉलोअप कराते रहना चाहिए।