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दिल्ली की पहली महिला उबर ड्राइवर: पति की मौत के बाद जब छूट गई सारी आस तो पकड़ी स्टेयरिंग
Sat, 18 Mar 2017 09:31 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 18 Mar 2017 09:31 AM IST
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shanno begum
- फोटो : स्क्रॉल
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'आदमियों वाले क्यों सीख रही हो?' यही वो लाइन है जो शन्नो बेगम से लोग बार-बार पूछते जब वो अपने पति की मौत के बाद जिंदगी को चलाने की कोशिश कर रही थीं। यहीं वो लाइनें हैं जो उन्हें बार-बार आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित करती रहीं।
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- फोटो : स्क्रॉल
पति के बाद तीन बच्चों को पालने और परिवार चलाने की सारी जिम्मेदारी अब अनपढ़ शन्नो पर थी। उसने सब्जी का ठेला लगाने से लेकर घरों में खाना बनाने तक सब कर लिया लेकिन कुछ भी करके वो इतना नहीं कमा सकी जिससे चार पेट भरे जा सकें और तीन बच्चों को अच्छी शिक्षा दी जाए।
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- फोटो : स्क्रॉल
इन सारी कठिनाइयों के बाद भी शन्नो बेगम ने हार नहीं मानी। घरेलू हिंसा के साथ ही उन सभी अत्याचारों की शिकार शन्नो जो किसी का भी मनोबल तोड़ने के लिए काफी हैं के बाद भी वो एक विजेता बनकर उभरीं।
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- फोटो : स्क्रॉल
पहले तो उन्होंने इतनी पढ़ाई की जो उबर ड्राइवर बनने के लिए जरूरी थी। इसके लिए उन्हें दो बार दसवीं बोर्ड की परीक्षा देनी पड़ी। ये सब सिर्फ अपने बच्चों के लिए ताकि उन्हें अच्छा खाना और बेहतर शिक्षा मिले ताकि बच्चों की जिंदगी मां से अच्छी हो सके।
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- फोटो : सीएनबीसी वीडियो से
शन्नो बेगम ने सब्जी का ठेला लगाने के बाद ये बात तो जान ली थी कि वो इससे कभी इतना नहीं कमा पाएंगी कि वो अपने चार बच्चों का पेट भरने के साथ ही उन्हें अच्छी शिक्षा भी दे सकें। इसीलिए इस काम को छोड़कर वो मरीजों की तीमारदारी में लग गईं। शन्नो वो सारे काम करती थीं जो अमूमन एक नर्स करती है। फर्क सिर्फ इतना था कि वो नर्स नहीं थीं।
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