सड़कों, छतों और रास्तों पर बिछी बर्फ की ये सफेद चादर जो आप देख रहे हैं, ये शिमला, मनाली या कश्मीर की नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के मुरादनगर की है। बुधवार शाम करीब पांच बजे अचानक पश्चिमी दिशा से आई आंधी के बाद यहां झमाझम बारिश के साथ भारी ओलावृष्टि हुई। इसके बाद से जैसे पूरे शहर ने सफेद रंग की ठंडी चादर ओढ़ ली है। आगे देखें शहर की और भी खूबसूरत तस्वीरें-
शिमला नहीं ये उत्तर प्रदेश की सड़कें हैं, तस्वीरें देखकर हैरान रह जाएंगे आप
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बुधवार दिनभर शहर का मौसम साफ था। शाम करीब पांच बजे आसमान में पश्चिम की ओर से शहर की ओर तेजी से बादल बढ़ते नजर आए। कुछ ही देर में भयंकर धूल भरी तूफानी आंधी चली और बारिश होने लगी। इसी के साथ आसमान से बड़े-बड़े ओले भी गिरने लगे। सड़कों पर चल रहे नागरिकों ने इधर-उधर भागकर दुकानों और अन्य जगहों में छिपकर खुद को बचाया।
ओलों की यह चादर देखने में जितनी अच्छी लग रही थी, इसका परिणाम उतना ही बुरा रहा। अभी बारिश बंद भी नहीं हुई कि ग्रामीण क्षेत्र से खबर आने लगी कि ओलावृष्टि ने फसलों को तबाह कर दिया है। ओलावृष्टि से अनेक गांवों में फसलों को भारी क्षति हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 50 वर्षों में भी इतने अधिक ओले नहीं पड़े। गढ़मुक्तेश्वर तहसील क्षेत्र में भी भारी ओलावृष्टि और बारिश हुई है साथ ही कई लोग घायल भी हुए हैं।
सबसे अधिक नुकसान गेहूं, सरसों, आलू, टमाटर, बंद गोभी, धनिया और चारा आदि फसलों को हुआ है। कई स्थानों पर फसलें ओलों के नीचे दबकर नष्ट हो गईं। उधर गढ़मुक्तेश्वर तहसील क्षेत्र में भी भारी ओलावृष्टि और बारिश पड़ी है। ग्रामीणों का दावा है कि 25 से 30 ग्राम तक के ओले पड़े हैं। आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में पेड़ टूट गये हैं।
हापुड़ के पश्चिम व उत्तरी क्षेत्र के गांव अधिक प्रभावित
बारिश व ओलावृष्टि से हापुड़ के पश्चिमी व उत्तरी क्षेत्र के गांव अधिक प्रभावित हुए हैं। जानकारी के अनुसार बदनौली, सरावा, नगौला, गोयना, दस्तोई, दादरी, असौड़ा, दोयमी धनौरा, वझीलपुर, टयाला, सूदना, श्यामपुर, ददायरा, मलकपुर, बाबूगढ़, माधापुर आदि अनेक गांवों में फसलों को ओलावृष्टि से भारी क्षति हुई है। ग्रामीणों की मानें तो कई स्थानों पर तो 50 साल में ओले पड़ने का रिकॉर्ड टूट गया है।