अनाज मंडी इलाके में रविवार को जिस भीषण आग्निकांड में 43 लोगों ने अपनी जान गंवा दी, उसका सबसे बड़ा कारण था कि बिल्डिंग में फंसे लोगों के पास भागने के लिए जगह नहीं थी। दम घुटने और खुद को आग से घिरा देखकर भी अधिकतर लोग इमारत से सिर्फ इसलिए नहीं भाग पाए क्योंकि आने-जाने के लिए एक ही रास्ता था, वो भी पतला सा। पूरी राजधानी में यह इकलौती ऐसी बिल्डिंग नहीं है जहां इतने पतले रास्ते हैं, बल्कि ऐसे कई मौत के कारखाने भरे पड़े हैं जहां एक कमरे में पूरी फैक्ट्री बनी है और सुरंग जैसे रास्ते से लोग आते-जाते हैं-
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फैक्ट्री की पतली सीढ़ियां
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली में एक दरवाजे वाली हजारों फैक्टरियां चल रही हैं। इमारत में आने-जाने का एक ही रास्ता है और हर मंजिल पर स्थित कमरों में फैक्टरियां चल रही हैं। ज्यादातर किराए पर हैं। यहां काम करने वाले मजदूर हजारों में हैं। काम खत्म करने के बाद ये इन्हीं फैक्टरियों में सो जाते हैं। निवासियों का कहना है कि अनाज मंडी में ज्यादातर मकान बिहार और यूपी के रहने वाले लोगों के हैं। ज्यादातर ने अवैध रूप से अपने घरों पर मंजिलें चढ़ा ली हैं। यहां तक कि एक-दो इमारतें तो छह मंजिला हैं। इनमें जाने और आने का एक ही रास्ता है। सभी मंजिलों पर छोटे-छोटे कमरे बने हुए हैं।
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एक कमरे में चल रही फैक्ट्री
- फोटो : अमर उजाला
इन्हें मालिकों ने किराए पर दे दिया है। किराएदार इन कमरों में अपनी छोटी-छोटी फैक्टरियां चला रहे हैं। हरेक में दस से पंद्रह लोग काम करते हैं और यहीं सोते भी हैं। इमारत कितनी भी मंजिल की हो, उसमें सीढ़ियां ऐसी हैं कि एक बार में दो लोग नहीं जा सकते। यहां काम करने वाले मजदूरों ने बताया कि इलाके में थैले, टिफिन बैग, प्लास्टिक खिलौने और अन्य सामान बनाने की फैक्टरियां हैं।
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काम के बाद यहीं सो जाते हैं मजदूर
- फोटो : अमर उजाला
दमकल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि राजधानी का लगभग 70 फीसदी हिस्सा आग के मुहाने पर हैं। पुरानी दिल्ली के अलावा राजधानी की अनधिकृत कॉलोनियों में हादसों को दावत दे रही हजारों अवैध फैक्ट्रियां धड़ल्ले से चलाई जा रही हैं। यहां न तो आग से बचाव के कोई इंतजाम नहीं हैं। नियमों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर संकरी गलियों में 50-50 फीट ऊंची इमारतें बना दी गई हैं। अगस्त माह में जामिया नगर के जाकिर नगर इलाके में हुआ हादसा इसकी एक बड़ी मिसाल है।
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संकरी सीढ़ियां
- फोटो : अमर उजाला
चीफ फायर ऑफिसर विपिन कैंटल ने बताया कि बिना डिजाइन और बिना नक्शे के बनी इमारतें ज्यादा खतरनाक हैं। पुरानी दिल्ली और अनधिकृत कॉलोनियां इस तरह से बसीं हैं कि वहां किसी हादसे के समय बचाव करना भी बेहद मुश्किल होता है। रिहायशी इलाकों में प्राइवेट बिल्डर ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग बनाकर पीछे की ओर सीढ़ियां बनाते हैं। बिल्डिंग में आने-जाने का एक ही रास्ता होता है। ऐसे में आग लगने की सूरत में वहां से बचकर निकलना बेहद मुश्किल होता है।