उपेंद्र की कार में जैसे ही आग लगी वह निकलने की बजाय पहले कार को फ्लाईओवर के किनारे ले गया और फिर उसने अपनी बेटी को निकाला। यह बात वहां मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताई है। अगर उपेंद्र अपनी कार बीच फ्लाईओवर पर रोकता तो कई कारें उसकी जद में आ जातीं फिर और बड़ा हादसा होता।
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कार में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
इस घटना से साफ पता चलता है कि अक्षरधाम फ्लाईओवर पर बर्निंग कार के चालक उपेंद्र मिश्रा काफी समझदार थे और उन्होंने अपनी और अपनों की जिंदगी से ज्यादा और पहले दूसरों के बारे में सोचा तभी वह अपनी कार किनारे ले गए।
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कार में लगी आग
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दुर्घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर स्थित टेंट हाउस में काम करने वाले बबलू कुमार ने बताया कि शुरुआत में कार के पिछले हिस्से में आग लगी थी। लेकिन जब तक उसने फ्लाईओवर के किनारे कार लगाई तब तक आधी से ज्यादा कार में आग लग चुकी थी। वह कार से कूदा और अपने बगल में बैठी बेटी को बाहर खींच लिया।
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रोता-बिलखता उपेंद्र
- फोटो : अमर उजाला
बबलू कुमार ने ये भी बताया कि वहां से गुजर रहे राहगीरों ने कार का लॉक खोलने और कार का दरवाजा खोलने की कोशिश लेकिन असफल रहे। बबलू ने कहा कि वो लोग डर गए थे कि कार में ब्लास्ट होगा और इसलिए दूर जाकर खड़े हो गए। दमकल अधिकारी का कहना है कि पिछले दरवाजे लॉक हो गए होंगे।
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कार में लगी आग
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एक अन्य चश्मदीद करन सरकार ने बताया कि कार चालक उपेंद्र मिश्रा लगातार कार करे पिछले दरवाजे को तोड़ने की कोशिश करते रहे ताकि वह अपने परिवार को बचा सकें। लोगों ने उन्हें पीछे खींच लिया वरना वो भी मर जाते। वह जोर-जोर से चिल्लाकर रो रहे थे। हालांकि आग की आंच इतनी तेज थी कि कोई भी कार के ज्यादा पास नहीं खड़ा हो सका।