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भक्त के सपने में आकर मां दुर्गा ने बताया था अपने प्रकट होने का स्थान, तब सामने आया ये मंदिर

Sun, 09 Oct 2016 04:59 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 09 Oct 2016 04:59 PM IST
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jhandewalan mandir delhi

राजधानी दिल्ली के मध्य में एक ऐसा मंदिर है जो दिल्ली की पहचान बन चुका है। हम बात कर रहे हैं झंडेवाला मंदिर की जो झंडेवाली देवी को समर्पित एक सिद्धपीठ है। यहां नवरात्र के मौके पर भक्तों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। अपने धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के कारण राज्य सरकार ने भी दिल्ली के प्रासिद्ध दर्शनीय स्थलों में इसे शामिल किया है।


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वैसे तो इस मंदिर में नवरात्र में लाखों श्रद्धालु दर्शन करते हैं लेकिन ऐसा नहीं ‌है कि अन्य दिनों में यहां कम भीड़ होती है। झंडेवाली देवी के मंदिर में साल भर उत्सव सा ही माहौल रहता है। मंदिर में आने वाला प्रत्येक भक़्त यहां से मानसिक शांति और आनंद की अनुभूति लेकर ही जाता है।

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झंडेवाला मंदिर का इतिहास 18वीं सदी के उत्तरार्ध से प्रारंभ होता है, जो अपने आप में ही बहुत दिलचस्प है। उसके बारे में बताने से पहले हम आपको ये बता दें कि आज जिस भीड़-भाड़ वाली जगह पर झंडेवाला मंदिर स्थित है वह हमेशा से ऐसी शोरगुल वाली जगह नहीं थी।

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आज जिस स्थान पर मंदिर स्थित है वहां पहले अरावली पर्वत श्रॄंखला की हरी भरी पहाडियां , घने वन और कलकल करते झरने बहते थे। अनेक पशु पक्षियों का यहां बसेरा था। इस शांत और रमणीय स्थान पर आसपास के निवासी सैर करने आया करते थे। ऐसे ही लोगों में चांदनी चौक के एक प्रसिद्ध कपड़ा व्यापारी श्री बद्री दास भी थे। श्री बद्री दास धार्मिक व्यक्ति थे और वैष्णो देवी के भक़्त थे। वे नियमित रूप से यहां पर सैर करने आते थे और ध्यान में लीन हो जाते थे।

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एक दिन वो रोजाना की तरह ही अपने ध्यान में मग्न थे‌ कि उन्हें ऐसी अनुभूति हुई कि वहीं निकट ही एक झरने के पास स्थित एक गुफा में कोई प्राचीन मंदिर दबा हुआ है। एक दिन फिर से उन्हें उसी जगह एक मंदिर दिखाई पड़ा और ये भी लगा कि कोई अंजानी शक्ति उन्हें इसे खोजने के लिए भी प्रेरित कर रही है।

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