आमिर खान की दंगल तो आपने देखी ही होगी। यहां यह कहानी बिल्कुल सच हो रही है। पहलवान पिता अब अपने सपने बेटियों के दांवपेंच में देखते हैं। तस्वीरों में आप भी देखिए...
आमिर के 'दंगल' से कम नहीं इस पिता की कहानी, तीनों बेटियों को अखाड़े में उतारा, ऐसे सिखा रहे पहलवानी
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इनसे प्रेरित होकर आस-पास के गांवों के लोग भी अपनी बेटियों को कुश्ती में दो-दो हाथ आजमाने के लिए भेज रहे हैं। सैनिक कॉलोनी निवासी तेजपाल खुद पहलवानी करते रहे हैं। वे अपनी तीनों बेटियों को कुश्ती के मैदान का विजेता होने का सपना देखते हैं। यही वजह है कि वह उनसे खूब मेहनत करवाते हैं। खुद भी उन्हें दांव-पेंच सिखाते हैं। पहलवान पिता तेजपाल की बेटियां शैफाली और स्नेहा (कक्षा 12) और कृतिका (कक्षा नौ) में पढ़ती हैं। दो साल पहले पिता तेजपाल ने तीनों बेटियों को अंबर तालाब स्थित हनुमान अखाड़ा में कुश्ती के दांव-पेच सीखाने के लिए भेजा। धीरे-धीरे क्षेत्र में तीनों बेटियों की कुश्ती की चर्चाएं होने लगी।
शैफाली, स्नेहा और कृतिका का कहना है कि वह अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रही हैं। कुश्ती के मैदान में इन तीनों बहनों को दांव-पेंच सीखते देखकर हनुमान अखाड़ा में मिली (कक्षा-पांच) और छह साल की कीर्ति भी प्रशिक्षण ले रही हैं। मिली ने बताया कि उसका घर अखाड़े के पास ही है। यहां रोज वह लड़कियों को कुश्ती खेलते हुए देखा करती थी। उन्हीं से वह कुश्ती के मैदान में आने को प्रेरित हुईं। कीर्ति के पापा भी पहलवान रहे हैं। वह अपने पापा की तरह पहलवानी के क्षेत्र में नाम कमाना चाहती हैं। इसके साथ ही अखाड़े में सती मोहल्ले की गीता भी दो साल से कुश्ती के दांव-पेंच सीख रही हैं।
हनुमान अखाड़े में प्रशिक्षण देने वाले अशोक पहलवान, बॉडी बिल्डिंग के नेशनल जज जयपाल पहलवान का कहना है कि अखाड़े में युवा मिट्टी पर कुश्ती के दांव-पेंच सीखते हैं, लेकिन जब यहीं युवा बाहर मैच खेलने जाते है तो उन्हें मैट पर प्रतियोगिता जीतनी होती है। यहीं आकर वे फेल हो जाते हैं। इस मैट की कीमत करीब चार लाख रुपये है, लेकिन इन्हें खरीदने के लिए कोई मदद नहीं मिलती। अशोक पहलवान ने बताया कि विधायक, सांसद से लेकर तमाम जनप्रतिनिधियों से सहयोग मांगा गया, लेकिन किसी ने मदद नहीं की।