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केदारनाथ में मौजूद आपदा के जख्म अब भी पैदा करते हैं सिहरन

Fri, 11 Mar 2016 03:03 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 11 Mar 2016 03:03 PM IST
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wounds still alive in kedarnath disaster.
केदारनाथ आपदा - फोटो : amar ujala

केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्य जोरों पर होने के बावजूद आपदा के जख्म अब भी जहां-तहां मौजूद हैं। मलबे के ढेर, भारी बोल्डर और टूटे आवासीय मकान/धर्मशाला बर्बादी की कहानी बयां कर रहे हैं। यात्रा सीजन शुरू होने वाला है, ऐसे में इन जख्मों पर मलहम लगाने के लिए तेजी से काम करने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि जब इस सीजन में यात्री आएं तो वह केदार धाम की नई तस्वीर मन में बसाकर जाएं।

केदारनाथ में मौजूद आपदा के जख्म अब भी पैदा करते हैं सिहरन

wounds still alive in kedarnath disaster.
केदारनाथ आपदा - फोटो : amar ujala

दिसंबर 2013 से केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण के दौर से गुजर रहा है। यहां एमआई-26 हेलीपैड से लेकर वैली ब्रिज सहित कई निर्माण हो चुके हैं। यात्रा भी पिछले वर्ष से पटरी पर लौट चुकी हैं। बावजूद इसके जलप्रलय के कहर के निशान अब भी सिहरन पैदा करते हैं। रुद्रा प्वाइंट से एमआई-26 हेलीपैड पर पहुंचने के बाद से मलबे के ढेर शुरू हो जाते हैं।

केदारनाथ में मौजूद आपदा के जख्म अब भी पैदा करते हैं सिहरन

wounds still alive in kedarnath disaster.
केदारनाथ आपदा - फोटो : amar ujala

मंदिर मार्ग के मंदिर परिसर के निकट तक टूटे भवन, सरिया सहित खिसके पिलर, लटकी छतें और हवा में झूलती टीन की चादरें अब भी नजर आती हैं। यहां हल्की सी चूक जीवन पर भारी पड़ सकती है।

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केदारनाथ में मौजूद आपदा के जख्म अब भी पैदा करते हैं सिहरन

wounds still alive in kedarnath disaster.
केदारनाथ आपदा - फोटो : amar ujala

कुछ टूटे मकानों के अंदर झांकने पर आज भी मलबे में दबी रजाई, कपड़े और अन्य सामग्री जस की तस पड़ी हैं। मंदिर के ठीक पीछे काफी बड़े क्षेत्र में भारी बोल्डर बिखरे पड़े हैं। मंदिर के बाईं तरफ नदी से लगे भवन भी टूटे पड़े हैं।

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केदारनाथ में मौजूद आपदा के जख्म अब भी पैदा करते हैं सिहरन

wounds still alive in kedarnath disaster.
केदारनाथ आपदा - फोटो : amar ujala

ढाई वर्ष से केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण हो रहे हैं। केदारपुरी को नई तकनीकी से सुरक्षा घेरे में बांधा जा रहा है। निम के मजदूरों से लेकर मशीनों की आवाजें हिमालयी क्षेत्र में गूंज रही हैं। बावजूद यहां आज भी अजीब सा सूनापन महसूस किया जा सकता है। केदारनाथ के तीर्थ पुरोहित दिनेश बगवाड़ी और माधव कर्नाटकी का कहना है कि जब तक केदारपुरी की वृहद स्तर पर सफाई नहीं की जाती, तब तक खतरा बना रहेगा।

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