लोगों के खून पसीने की कमाई से बनाए गए एम्स की दुर्दशा हैरान कर देने वाली है। यहां की अव्यवस्था देखकर कोई भी दांतो तले उंगली दबाने को मजबूर हो जाएगा। हालत यह है कि चिकित्सीय सुविधाओं के सिरमौर कहे जाने वाले एम्स ऋषिकेश के शौचालय में शराब की बोतलें मिल रही हैं। जो ग्लूकोज लोगों की जान बचाता है वह कबाड़खाने में लावारिस पड़ा सड़ रहा है।
हालत ये हैं कि मुस्तैदी के अभाव में शराबी यहां शराब पीने आ रहे हैं। इसकी बानगी तृतीय तल स्थित एंडोकार्नियोलॉजी वार्ड के शौचालयों में देखने को मिली। यहां शराब की बोतलें, बीड़ी और सिगरेट के ढेर पाए गए। हैरानी वाली बात यह है कि इसी तल पर संत गोपालदास भर्ती हैं और एम्स प्रबंधन के आला अफसरों का आनाजाना पिछले कुछ दिनों से लगातार जारी है।
इसके बावजूद किसी की नजर इस तरफ नहीं गई। इस अनदेखी का नतीजा यह है कि सीढ़ियों की रेलिंग कपड़े सुखाने का अड्डा बन चुकी हैं। बदइंतजामी का सिलसिला यहीं नहीं रुकता। चतुर्थ तल पर बर्न यूनिट के पास बायोमेडिकल वेस्ट पूरी फर्श पर बिखरा हुआ पाया गया है।
ग्लूकोज की बोतलें कबाड़खाने में दबी सड़ रही हैं। खास बात यह है कि एम्स में कबाड़ जमा करने की कोई नियत जगह नहीं है। हर तल पर आपको किसी कोने में कबाड़खाना मिल जाएगा। यहां तक कि सीढ़ियों पर भी रद्दी का पहाड़ लाद दिया गया है। ट्रामा सेंटर के सामने पार्क नुमा खाली मैदान में मेडिकल उपकरण फेंके पाए गए हैं।
फाउंटेन का पानी खाली करवा दिया गया है। निर्देश दे दिया गया है कि जब तक संचालित न हो उसमें पानी न डाला जाए। जहां तक बात संस्थान में शराब सेवन की बात है तो जानकारी नहीं है। मैं पता करवाता हूं। जहां गंदगी होगी उसे भी साफ करवाया जाएगा।
- हरीश थपलियाल, जनसंपर्क अधिकारी, एम्स