उत्तरकाशी जिले के सिलक्यारा में निर्माणाधीन सुरंग में फंसे 40 मजदूरों में कोटद्वार के सनेह क्षेत्र के बिशनपुर निवासी गब्बर सिंह भी शामिल हैं। गब्बर सिंह पिछले छह सालों से सुरंग निर्माण कार्य में जुटे हैं। उनकी 11 नवंबर की रात को अपनी पत्नी यशोदा देवी से बात हुई थी।
इसके बाद से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है। घटना के बाद से परिजनों में कोहराम मचा है। बेटा और परिजन उत्तरकाशी के लिए रवाना हुए। मंगलवार को उत्तरकाशी पुलिस कंट्रोल रूम द्वारा श्रमिकों के परिजनों से सम्पर्क कर उनको अपडेट दिया गया।
इस दौरान यहां पहुंचे गब्बर सिंह के बेटे ने टनल में फंसे पिता से वॉकी-टॉकी से संपर्क कर कुशलक्षेम जानी। पिता की आवाज सुन बेटे ने राहत की सांस ली। सनेह क्षेत्र के अंतर्गत बिशनपुर कुंभीचौड़ निवासी यशोदा देवी ने बताया कि उनके पति गब्बर सिंह पिछले 20 सालों से नवयुग इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड में काम कर रहे हैं। वह वर्तमान में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत हैं।
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उत्तरकाशी टनल हादसा
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छह साल पहले यमुनोत्री हाईवे के चौड़ीकरण का कार्य शुरू हुआ था। यशोदा देवी ने बताया कि उनकी गत 11 नवंबर को रात करीब 8 बजे पति से बात हुई थी।
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उत्तरकाशी टनल में फंसे मजदूर
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उस दिन उनकी रात की ड्यूटी थी। अगले ही दिन भूस्खलन के कारण उनके सुरंग में फंसने की सूचना मिली।
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Uttarkashi Tunnel Collapse
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घटना के बाद से परिवार में कोहराम मचा है। उनका बड़ा बेटा आकाश (18) और छोटा बेटा विकास (15) है। आकाश उसके मामा व तीनों ताऊ उत्तरकाशी के लिए रवाना हो चुके हैं।
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उत्तरकाशी टनल में फंसे मजदूर
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गब्बर सिंह इससे पहले दिल्ली, सिक्किम, राजस्थान, जम्मू समेत कई राज्यों में कंपनी के निर्माण कार्य कर चुके हैं। इससे पहले वे सिक्किम में सुरंग निर्माण के दौरान ज्वालामुखी फटने से फंस गए थे। तब विषम हालात में वे दूसरों की हौसला अफजाई करते हुए सकुशल निकले थे।