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पिथौरागढ़ आपदा: 'श्मशान' में बदली इंसानों की बस्ती, मकान मलबे और गांव 'कब्रिस्तान' में हुआ तब्दील

Tue, 21 Jul 2020 01:30 AM IST
अलका त्यागी भक्तदर्शन पांडेय, अमर उजाला, टांगा (पिथौरागढ़)
भक्तदर्शन पांडेय, अमर उजाला, टांगा (पिथौरागढ़) Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 21 Jul 2020 01:30 AM IST
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Uttarakhand weather: Pithoragarh Disaster Horrible Story, Village become Cemetery
- फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड के सीमांत पिथौरागढ़ जिले का टांगा गांव कभी चर्चा में नहीं रहा। मगर जब इस गांव का नाम लोगों ने सुना, तो उनके मुंह से एक आह निकली। अब ये गांव इंसानों की बस्ती नहीं रह गया, बल्कि जमीन फटने से श्मशान में तब्दील हो गया है। गांव के जिन लोगों ने मूसलाधार बारिश के बीच रात का खौफनाक मंजर देखा, उन्हें दिन के वक्त भी हर आहट डराती है। 

Uttarakhand weather: Pithoragarh Disaster Horrible Story, Village become Cemetery
- फोटो : अमर उजाला

रात को लापता हुए 11 लोगों के बीच बच गए लोगों में आगे की जिंदगी की कम से कम इस गांव में अब कोई आस नहीं है। वे यहां से जल्द से जल्द दूसरी जगह जाना चाहते हैं। अपनों को गंवाने वाले इन लोगों के मुंह से बार-बार दूसरी जगह विस्थापन की पुकार निकल रही है। टांगा गांव में करीब 500 मीटर में 200 से अधिक जगह जमीन फटी है। मकान मलबे, तो खेत रेगिस्तान में तब्दील हो गए। 

Uttarakhand weather: Pithoragarh Disaster Horrible Story, Village become Cemetery
- फोटो : अमर उजाला

गांव में भले ही 66 लोग मौजूद हैं, लेकिन ऐसा सूनापन, सन्नाटा और शोक गांव ने न कभी देखा न कभी कल्पना की। सकते में आए गांव को काठ मार गया। किसी के मुंह से शब्द नहीं निकल रहे। बहुत कहने पर इक्का दुक्का लोग बताते हैं कि नदी पहले से कटाव कर रही थी। लेकिन किसी ने ये नहीं सोचा कि टांगा के हंसते-खेलते लोगों के लिए कल-कल करती ये नदी काल बन जाएगी। गांव के महिमन कहते हैं कि कहीं शमशान में रहा जाता है क्या? हम अब यहां क्यों रहें? कैसे रहें? हमें नहीं रहना? हमें कभी भी भेज दो, पर यहां से ले जाओ। मौत के मुंह से बचे गांव के लोग सोमवार को दिनभर यही कहते रहे। 

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Uttarakhand weather: Pithoragarh Disaster Horrible Story, Village become Cemetery
- फोटो : अमर उजाला

तबाही के मंजर के गवाह बने 80 साल के चंद्र राम रात रात को चैन की नींद सोये थे। एकाएक तेज आवाज ने उनकी नींद तोड़ी, तो जो देखा उसने उनके सपनों को भी तोड़ा। कहते हैं कि वे खुद बहू, बेटे और पोते को लेकर सुरक्षित ऊपर की तरफ को दौड़ पड़े और शोर मचाते गांव के दूसरे लोगों को अनहोनी से अगाह किया। सभी 66 लोगों ने मूसलाधार बारिश के बीच एक साथ रात गुजारी। चंद्र राम बताते हैं कि अपनी जिंदगी में शायद इतनी स्फूर्ति उनमें कभी नहीं रही, जितनी सैलाब की आवाज आने पर टार्च की रोशनी से बाहर देखने पर आई। 

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Uttarakhand weather: Pithoragarh Disaster Horrible Story, Village become Cemetery
- फोटो : अमर उजाला

बमुश्किल  से15 मीटर दूर आए सैलाब ने माधो सिंह के मकान की छत, दीवार को मलबे में तब्दील कर दिया। शोर के बावजूद एक हल्की सी चीख सुनाई दी। शायद ये दो मासूमों की चीख थी। और यह मलबा हंसते-खेलते दो मासूमों का कब्रगाह बन गया। बुरी तरह टूट चुके इस मकान में गोपाल सिंह के दो मासूम (छठी कक्षा दिवांश व चौथी कक्षा लतिका) बच्चों के शव दूर से नजर आ रहे हैं। 

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