उत्तराखंड में जिस टिहरी की बिजली से पूरा देश रोशन हो रहा है। उसका गौरवशाली इतिहास अंधेरे कमरों में कैद है। बिजली की जरूरतों के लिए पुरानी टिहरी ने जलसमाधि ली तो उसमें यहां के राजा का महल भी पानी में डूब गया। महल की ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित जगह पर रख दिया गया।
उत्तराखंड: ‘अंधेरे’ में कैद है देश को रोशन कर रहे टिहरी का गौरवशाली इतिहास, 'कबाड़' बन रहीं बेशकीमती निशानियां
खराब होने लगी हैं वस्तुएं
टिहरी रियासत से जुड़ी ऐतिहासिक चीजों को नवदुर्गा मंदिर और रानीचौरी में रखा गया है। रखरखाव के अभाव में कई चीजें खराब होने लगी हैं। 1949 में रियासत के विलय के दौरान कुछ समान देहरादून मालखाने में भी रखा गया था। पुराना दरबार ट्रस्ट और अन्य कई लोगों के पास भी टिहरी रियासत की निशानियां हैं।
पुराना दरबार ट्रस्ट ऐतिहासिक अस्त्र-शस्त्र, वस्त्र, मूर्तियां, पांडुलिपियां, अष्ट धातु के बर्तन आदि का संरक्षण कर रहा है। उसमें कुछ निजी संपत्ति भी है। सरकार जगह उपलब्ध कराती है तो ट्रस्ट पीपीपी मोड में संग्रहालय बना सकता है।
- ठाकुर भवानी प्रताप सिंह, ट्रस्टी पुराना दरबार।
पुरानी टिहरी में शिल्प कला की अलग-अलग शैली में भवन बनाए गए थे। इनमें सिमलासू में स्थित गोल कोठी, शीश महल, हुजूर कोर्ट, ग्रीक शैली का ऑडोटोरियम, महारानी नेपालिया इंटर कॉलेज जैसे भवन शामिल हैं। उनके मुकाबले नई टिहरी में एक भी भवन नहीं बन पाया।
- विक्रम बिष्ट, वरिष्ठ पत्रकार, नई टिहरी
नई टिहरी के आसपास संग्रहालय निर्माण के लिए भूमि का चयन किया जाएगा। कोटी काॅलोनी या नई टिहरी में निर्माण होना है। स्थानीय लोगों के साथ बैठक कर निर्णय लिया जाएगा। 2018 में शासन से भूमि चिन्हित करने के लिए स्वीकृति मिल गई थी। कहां मामला लंबित है इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
-धीरेंद्र सिंह नेगी, ईई, पुनर्वास निदेशालय।
ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए नई टिहरी बसाते समय ही संग्रहालय बनाया जाना चाहिए था। कई बार जमीन उपलब्ध कराने को पत्राचार किया गया लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अलग-अलग जगहों पर रखी कुछ धरोहर खराब हो रही हैं।
-महीपाल सिंह नेगी, इतिहासकार