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घरवाले कर रहे थे बेटे के सिर सेहरा सजाने की तैयारी, नवंबर में आना था घर, उससे पहले ही आ गई शहादत की खबर

Sun, 19 Jul 2020 09:38 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लालपुर (ऊधमसिंह नगर)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लालपुर (ऊधमसिंह नगर) Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 19 Jul 2020 09:38 PM IST
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Uttarakhand Soldiers Martyred on Ladakh Border before marriage, last talk to parents on video call
- फोटो : अमर उजाला

जवान बेटे की शहादत पर मां और पिता के साथ परिजनों का सिर गर्व से ऊंचा है, लेकिन सीने में असीम गम है जो आंखों के जरिए बाहर निकल रहा है। शहीद देव बहादुर की परिजनों से अंतिम बार बातचीत शुक्रवार को वीडियो कॉल के जरिये हुई थी। देव ने मां और बहन से नवंबर में आने की बात कही थी। पिता शेर बहादुर ने बताया कि देव ने कहा था कि अब मोबाइल पर कॉल मत करना, क्योंकि जहां ड्यूटी पर भेजा जा रहा हूं, वहां नेटवर्क नहीं होता। मां ने देव की शादी के लिए लड़की भी देख रखी थी। बड़ा भाई ग्वालियर में सेना में है जो भाई की खबर मिलते ही रविवार सुबह अपने घर पहुंच गया है। 

Uttarakhand Soldiers Martyred on Ladakh Border before marriage, last talk to parents on video call
- फोटो : अमर उजाला

क्षेत्र के ग्राम गौरीकला में शेर बहादुर अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनके तीन बेटे और एक बेटी है। बड़ा बेटा किशन बहादुर ग्वालियर में आर्मी में तैनात है। दूसरे नंबर का बेटा देव बहादुर (24) वर्ष 2016 में गोरखा रेजीमेंट में भर्ती होने के बाद वर्तमान में लद्दाख में तैनात था। छोटा बेटा और बेटी साथ रहते हैं। ग्राम प्रधान से देव के घायल होने की खबर मिलते ही परिजनों ने ग्वालियर में तैनात किशन से बात की। इस पर किशन रात में ही यूनिट से निकाला और सुबह ही कार से अपने घर गौरीकला पहुंच गया। सेना के अधिकारियों से जानकारी लेने पर देव बहादुर के शहीद होने की जानकारी मिली तो परिजनों बिलख पड़े। 

Uttarakhand Soldiers Martyred on Ladakh Border before marriage, last talk to parents on video call
- फोटो : अमर उजाला

देव बहादुर ने भर्ती के बाद हिमाचल प्रदेश के सुबाथू में अपनी ट्रेनिंग पूरी की थी। इसके बाद उसकी पहली तैनाती कारगिल में हुई थी। चार महीने कारगिल में रहने के बाद उसका तबादला झारखंड हो गया था। ढाई महीने पहले ही चीन से तनातनी के बीच देव बहादुर को लद्दाख भेजा गया था। शहीद के भाई किशन ने बताया कि दुर्घटना की सूचना शनिवार रात बनबसा आर्मी कैंप को दी गई थी। वहां से किच्छा कोतवाली और ग्राम प्रधान के माध्यम से परिजनों को सूचना मिली। देर शाम या सोमवार सुबह शहीद का पार्थिव देह घर पहुंचने की संभावना है। 

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- फोटो : अमर उजाला

पिता शेर बहादुर ने बताया कि बेटे की शहादत पर उन्हें गर्व है। बेटे ने देश की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर की है। देश के लिए जान देने का सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता है। उनका छोटा बेटा बेरोजगार है। वे चाहते हैं कि छोटा बेटा भी फौज में भर्ती होकर देश की सेवा करे। शेर बहादुर ने बताया कि शुक्रवार रात हुई बातचीत में देव ने बताया था कि उन्हें ड्यूटी के लिए एक टापू पर भेजा जा रहा है, वहां नेटवर्क नहीं होगा। मां लक्ष्मी देवी और बहन गीता ने बताया कि देव के लिए लड़की देख ली थी, लेकिन देव को नहीं बताया था। नवंबर में आने पर उसे सरप्राइज देने की तैयारी थी, लेकिन उसने इतना बड़ा दुख दे दिया। 

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Uttarakhand Soldiers Martyred on Ladakh Border before marriage, last talk to parents on video call
- फोटो : अमर उजाला

देव बहादुर को बचपन से ही देश की सेवा करने का जुनून था। उन्होंने अपने गांव के पास स्थित कनकपुर इंटर कॉलेज से हाईस्कूल, ग्राम चुकटी देवरिया स्थित इंटर कॉलेज से इंटर और रुद्रपुर डिग्री कॉलेज से बीए किया था। इस दौरान वह फौज में जाने की तैयारी भी करते रहे। वर्ष 2016 में गोरखा रेजीमेंट में भर्ती के बाद उनका फौज में जाने का सपना पूरा हुआ। देव के बड़ा भाई किशन बहादुर भी आर्मी में 2014 में भर्ती हो गए थे। 

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