नौ महीने का कड़ा प्रशिक्षण हासिल करने के बाद मंगलवार को देहरादून जिले को 175 नए कांस्टेबल मिल गए। इसमें 141 महिला कांस्टेबल शामिल हैं। पुलिस लाइन में आयोजित पासिंग आउट परेड में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने परेड की सलामी ली। डीजीपी अनिल रतूड़ी ने आरक्षियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
खाकी वर्दी पहनकर कारगी चौक की सगी बहनें निधि और नेहा धुलासिया के सपने साकार हो गए। दोनों ने एकसाथ पुलिस भर्ती की तैयारी की और साथ ही उनका चयन हुआ। दीक्षांत परेड में बेटियों को खाकी वर्दी में कदमताल करते देख मां-बाप अपने आंसू नहीं रोक पाए। निधि और नेहा ने एसजीआर पीजी कॉलेज से स्नातक किया है। इनकी उम्र में दो वर्ष का अंतर है।
दोनों एक-दूसरे से हर बात शेयर करती हैं। निधि और नेहा का भाई मनीष भी पीएसी 40वीं बटालियन हरिद्वार में तैनात है। पिता रमेश चंद्र प्राइवेट नौकरी में और मां गृहणी हैं। नेहा और निधि ने बताया कि पुलिस फोर्स में नौकरी उनका सपना था। लिहाजा उन्होंने खुद को पुलिस भर्ती के लिए तैयार किया। 11 नवंबर 2016 की भर्ती में दोनों का चयन हो गया। परेड ग्राउंड से बाहर आने के बाद बेटियों ने अभिभावकों को सैल्यूट किया।
जिले में 175 आरक्षियों में 141 महिला कांस्टेबल हैं। महिला आरक्षियों में 127 सीधी भर्ती और 14 मृतक आश्रित कोटे से हैं। जबकि, 34 पुरुष कांस्टेबल हैं। मृतक आश्रित वर्ग का प्रशिक्षण तीन अक्तूबर 2016 से और सीधी भर्ती का प्रशिक्षण 11 नवंबर 2016 से शुरू हुआ था। आरक्षियों को आईपीसी, सीआरपीसी, पुलिस रेगुलेशन, अपराध शास्त्र, भारतीय संविधान विषयों के अलावा शस्त्र प्रशिक्षण, पुलिस प्रशिक्षण, पीटी, योग, फील्ड क्राफ्ट और फायरिंग का अभ्यास कराया गया।
प्रशिक्षण में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कांस्टेबल को सीएम ने पुरस्कृत किया। इनमें प्रथम परेड कमांडर कांस्टेबल अंकित बिष्ट, द्वितीय महिला कांस्टेबल अंजना बेलवाल, तृतीय महिला कांस्टेबल अमरजीत सिंह, सीधी भर्ती महिला कांस्टेबल रश्मि रौथाण और मृतक आश्रित महिला कांस्टेबल कविता का सम्मान हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड में ‘बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ’ नारा सार्थक साबित हो रहा है। बेटियां हर क्षेत्र में नाम कमा रही हैं।