सियाचिन में शहीद हुए उत्तराखंड के पौड़ी जिले में धारकोट गांव निवासी विपिन सिंह को मंगलवार को नम आंखों के साथ अंतिम विदाई दी गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गांव पहुंचकर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि विपिन सिंह एक परिवार या उत्तराखंड का नहीं बल्कि पूरा देश का बेटा है। सरकार शहीद के परिवार की हर संभव मदद करेगी। उच्च शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत व सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने भी शहीद को श्रद्धांजलि दी।
उत्तराखंड: सियाचिन में शहीद पौड़ी के जवान विपिन सिंह का पार्थिव शरीर पहुंचा घर, सीएम ने दी श्रद्धांजलि
बेटे की शहादत के सम्मान में पिता सूबेदार सिंह गुसाईं ने अपने आंसू थामे रखे, लेकिन मां पार्वती देवी बेटे के अंतिम दर्शन कर बेसुध हो गई। परिजनों ने किसी तरह उन्हें संभाला। पिता ने सीएम से बातचीत की। सीएम धामी ने उन्हें ढांढस बंधाया। सीएम ने कहा कि मां की पीड़ा को कोई और महसूस नहीं कर सकता।
शहीद विपिन के पिता सूबेदार सिंह गुसाईं बंगाल इंजीनियर से सेवानिवृत्त हैं। जबकि बड़े भाई रूपेश सिंह गुसाईं भी बंगाल इंजीनियर में ही सेवारत हैं। पिता ने बताया कि विपिन के भीतर बालपन से ही देश सेवा का जज्बा था। वह हमेशा से ही सेना में जाना चाहता था।
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शहीद विपिन की अंत्येष्टि
- फोटो : अमर उजाला
विपिन की मां पार्वती देवी गृहणी हैं और बहन की शादी हो चुकी है। माता-पिता गांव में ही रहते हैं। जबकि बड़े भाई का परिवार कोटद्वार में रहता है। 57 बंगाल इंजीनियरिंग में तैनात 24 वर्षीय विपिन सिंह इन दिनों सियाचिन में ड्यूटी पर थे।
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शहीद विपिन की अंत्येष्टि
- फोटो : अमर उजाला
पैर फिसलने के बाद ग्लेशियर की चपेट आने से वह बीते रविवार को शहीद हो गए थे। मंगलवार को शहीद विपिन सिंह के पार्थिव शरीर को सेना के वाहन से लाया गया। शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके पैतृक घर पर भारी भीड़ उमड़ी रही।
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शहीद विपिन की अंत्येष्टि
- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान शहीद के जयकारे गूंजते रहे। गांव पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीद के माता-पिता को ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा गांव के मोटर मार्ग धारकोट-इठुड और राजकीय इंटर कॉलेज चंपेश्वर का नाम शहीद विपिन सिंह के नाम पर होगा।
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शहीद विपिन की अंत्येष्टि
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सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि सरकार सदैव शहीद के परिवार के साथ खड़ी है। बाद में शहीद विपिन सिंह की अंत्येष्टि उनके पैतृक घाट उमराण नयार नदी तट पर हुई। पिता ने उन्हें मुखाग्नि दी। साथ ही भाई रूपेश सिंह ने उन्हें अंतिम विदाई देते हुए सलामी दी।