विश्वभर में ऋषिकेश की योगनगरी के रूप में पहचान है। देश-विदेश से पर्यटक यहां घूमने के लिए पहुंचते हैं। लॉकडाउन और कोविड कर्फ्यू के दौरान पर्यटकों के आवागमन पर रोक से पर्यटन कारोबार पूरी तरह ठप हो गया था। लेकिन अब कोविड कर्फ्यू में छूट से कारोबार फिर रफ्तार पकड़ रहा है। छूट मिलने के बाद मई 2021 से अब तक करीब 36 हजार पर्यटक तीर्थनगरी पहुंच चुके हैं। इसके अलावा लक्ष्मण झूला, मुनिकीरेती क्षेत्र में करीब 50 विदेशी पर्यटक ठहरे हुए हैं।
पर्यटन स्थल मुनिकीरेती, तपोवन, स्वर्गाश्रम, लक्ष्मण झूला वर्षभर देशी, विदेशी पर्यटकों से गुलजार रहते थे। कोरोनाकाल से पहले इन क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या हर महीने एक लाख से अधिक पहुंच जाती थी। कोरोनाकाल के चलते मार्च 2020 से इन क्षेत्रों में सन्नाटा पसरा गया।
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पर्यटकों पर निर्भर व्यापारी मंदी और भूखमरी की कगार पर आ गए। प्रदेश सरकार की ओर से अप्रैल 2021 में कोविड कर्फ्यू में थोड़ी राहत मिली। जिससे धीरे-धीरे अब इन क्षेत्रों में सैलानियों की चहलकदमी शुरू होने लग गई है। अंतरराष्ट्रीय सेवाएं बंद होने से इन क्षेत्रों में अभी भी विदेशी पर्यटकों की आवाजाही नहीं हो पा रही है। क्षेत्र में वही विदेशी पर्यटक रुके हुए हैं जो कोरोनाकाल में अपने देश नहीं लौट पाए थे। जिनकी संख्या लगभग 50 हैं। जिनमें यूएसए, इजराइल और रसिया के पर्यटक शामिल हैं।
जिला पर्यटन विभाग पौड़ी के अनुसार मई 2021 से लेकर अब तक क्षेत्र में लक्ष्मण झूला, स्वर्गाश्रम क्षेत्र में 16 हजार पर्यटक पहुंच चुके हैं। जिला पर्यटन विभाग टिहरी के अनुसार मुनिकीरेती और तपोवन क्षेत्र में अब तक 20 हजार सैलानियों की आवाजाही हो चुकी है।
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ऋषिकेश पहुंचे सैलानी
- फोटो : अमर उजाला
स्वर्गाश्रम के व्यापारी नारायण सिंह रावत, इंद्रप्रकाश अग्रवाल, गौरीशंकर, मनोज राजपूत, मनीष राजपूत ने बताया कि कोरोनाकाल से क्षेत्र में सब चौपट हो गया था। प्रदेश सरकार की ओर से कोविड कर्फ्यू में थोड़ी राहत मिलने के बाद अब क्षेत्र में सैलानियों की चहलकदमी शुरू हो गई है। कहा तीर्थनगरी का व्यापार विदेशी पर्यटकों पर निर्भर है। जब तक विदेशी पर्यटक की आवाजाही नहीं होगी, तब तक क्षेत्रीय व्यवसाय को पंख लगना नामुकिन है। लेकिन इसमें क्षेत्र में संचालित लघु व्यापारियों को थोड़ी राहत मिल रही है।
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ऋषिकेश में गंगा मं अटखेलियां करते पर्यटक
- फोटो : अमर उजाला
तीर्थनगरी में स्वर्गाश्रम, रामझूलापुल, लक्ष्मणझूला पुल, जानकीसेतु, आस्था पथ, गंगा तट और घाट, लक्ष्मणझूला, मुनिकीरेती, तपोवन के अलावा त्रिवेणीघाट, नीरगड्डू वाटर फॉल, पटना वाटर फॉल, मौनी बाबा गुफा, कालकुंड, नीलकंठ मंदिर, बालकुंवारी मंदिर, भुवनेश्वरी मंदिर, झिलमिल गुफा, चौरासी कुटिया, कैंपिंग, राफ्टिंग, बंजिंग जंपिंग, मां गंगा दर्शन, शिवपुरी, ब्रह्मपुरी, आदि पर्यटक स्थल हैं। जहां पर्यटकों की चहलकदमी होती है।
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ऋषिकेश पहुंचे सैलानी
- फोटो : अमर उजाला
कैंपिंग स्थल शिवपुरी, ब्रह्मपुरी, तपोवन घुघतानी, गरुड्चट्टी, फूलचट्टी, घट्टूगाड़, रत्तापानी, मोहनचट्टी, बैरागढ़, नैल, बिजनी के अलावा रामझूला, जानकीसेतुु और लक्ष्मण झूला पुल, चौरासी कुटिया, नीलकंठ धाम क्षेत्र में सैलानियों की अधिक चहलकदमी होती है।
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ऋषिकेश में राफ्टिंग
- फोटो : अमर उजाला
19 सितंबर से ऋषिकेश में राफ्टिंग सत्र शुरू हो गया था। अभी फिलहाल ब्रह्मपुरी और क्लब हाउस से राफ्टिंग ट्रेक खोले गए हैं। इसके बावजूद रोजना 400 से 500 पर्यटक राफ्टिंग के रोमांच का मजा उठा रहे हैं। जैसे-जैसे पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी शिवपुरी, मरीन ड्राइव, कौड़ियाला के लंबी दूरी के राफ्टिंग ट्रैक खोल दिए जाएंगे। कौड़ियाला का राफ्टिंग ट्रैक 32 किलोमीटर लंबा है।