उत्तराखंड के कद्दावर नेताओं में शुमार और कुमाऊं की आयरन लेडी के रूप में विख्यात डॉ. इंदिरा हृदयेश ने 1962 में समाजसेवा का व्रत लेकर राजनीति में प्रवेश किया और उत्तराखंड की राजनीति के शिखर तक पहुंचीं। उनका मूल निवास (मायका) पिथौरागढ़ के बेड़ीनाग विकासखंड का बेड़ीनाग गांव है। यह गांव कुमाऊं की प्रसिद्ध न्याय की देवी कोटगाड़ी मंदिर (धरमघर-पांखू) के निकट है।
यादें: यूं ही कुमाऊं की 'आयरन लेडी' नहीं बन गईं कद्दावर नेताओं में शुमार इंदिरा, पढ़ें राजनीतिक सफर और खास बातें...
जीवन परिचय
- सामान्य कुमाऊंनी परिवार में जन्मी इंदिरा ने शिक्षक के रूप में शुरू किया करियर।
- 1962 में सामाजिक सरोकारों के साथ राजनीति में किया प्रवेश।
- 1974 में स्नातक शिक्षक कोटे से उत्तरप्रदेश विधान परिषद में चुनीं गईं एमएलसी।
- लगातार चार बार उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य के लिए निर्वाचित हुईं।
- वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद उत्तराखंड में बनी अंतरिम सरकार में उन्हें विधायक का दर्जा देकर कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया और वह नेता प्रतिपक्ष बनीं।
- 2002 में हल्द्वानी विधानसभा से चुनाव जीता और कांग्रेस के सत्ता में आने पर मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की सरकार में उनको पीडब्ल्यूडी, संपदा, सूचना संसदीय कार्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री बनाया गया।
- 2007 में वह चुनाव हार गईं और 2012 में कांग्रेस के पुन: सत्ता में आने पर उन्हें वित्त मंत्री बनाया गया।
- 2017 में भाजपा सरकार के सत्ता में आने पर उनके अनुभवों को देखते हुए उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाया गया।
विदेशों में भी किया भारत का प्रतिनिधित्व
- 1965 में पाराडेनिया विवि सीलोन में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में उत्तप्रदेश ने यंग पीपल यंग में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। डॉ. इंदिरा ने इसमें शामिल हुईं थीं।
- 1974 में विज्ञान भवन नई दिल्ली में विश्व शांति सम्मेलन में विशेष आमंत्रित सदस्य के बतौर भाग लिया।
- 1984 में सिंगापुर और थाईलैंड में एक अध्ययन के दौरे में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
- 1998 में यूरोप में संसदीय समिति के साथ यूपी के 18 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहीं।
- उन्होंने वियना, जर्मनी, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, पेरिस, इंग्लैंड, चीन, जापान, कनाडा, अमेरिका, जोहांसबर्ग-दक्षिण अफ्रीका, काहिरा-मिस्र, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, थाईलैंड, यूएसए, मलयेशिया, सिंगापुर आदि देशों में अलग-अलग क्षेत्रों में शोध,अध्ययन आदि में भारत की ओर से प्रतिनिधित्व किया।
कांग्रेस की संस्कृति की सोच रखने वाले एक सामान्य राजनीतिक परिवार में जन्मीं डॉ. इंदिरा हृदयेश ने उच्च शिक्षा के साथ ही पीएचडी की डिग्री ली। साथ ही शिक्षक के रूप में स्वयं को स्थापित किया। दूरदर्शी और विकास की सोच रखने वाली डॉ. इंदिरा ने विभिन्न ट्रेड यूनियनों, शिक्षकों, सरकारी, अर्धसरकारी कर्मचारियों, सफाई मजदूरों के साथ जुड़कर उनके हित में काम किया। प्रखर वक्ता और विकास की सोच रखने वाली डॉ. इंदिरा ने महिलाओं, आदिवासियों, पिछड़ों, निरक्षरों और कामकाजी महिलाओं के उत्थान के लिए देश और विदेश में कई यात्राएं कीं और महिलाओं को संगठित किया।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सदस्य बनने के बाद 1974 में गढ़वाल और कुमाऊं के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी चुनीं गईं और लगातार चार बार विधान परिषद सदस्य बनीं। वह अविभाजित उत्तरप्रदेश में आश्वासन समिति अध्यक्ष, विकास प्राधिकरण जांच समिति, अध्यक्ष, अखिल भारतीय जनजातीय महिला संघ अध्यक्ष, विधान समाधिकार समिति अध्यक्ष, लोक लेखा समिति, याचिका समिति, नियम समिति, पहाड़ी विकास बोर्ड, राज्य उपभोक्ता संरक्षण समिति, 20 सूत्री कार्यक्रम समिति, राज्य महिला कल्याण बोर्ड उत्तरप्रदेश समेत तमाम संगठनों की सदस्य रहीं। प्रतिनिधि सदस्य कार्यकारी परिषद एचएन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, सदस्य प्रबंधन बोर्ड जीबी पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर आदि पदों पर रहीं। आश्वासन समिति, नियम समिति की सदस्य भी बनाई गईं।