फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

यादें: यूं ही कुमाऊं की 'आयरन लेडी' नहीं बन गईं कद्दावर नेताओं में शुमार इंदिरा, पढ़ें राजनीतिक सफर और खास बातें...

Sun, 13 Jun 2021 10:01 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 13 Jun 2021 10:01 PM IST
विज्ञापन
Uttarakhand Indira hridayesh Death: Congress Leader Indira hridayesh Political and Social life All Story
इंदिरा हृदयेश - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

उत्तराखंड के कद्दावर नेताओं में शुमार और कुमाऊं की आयरन लेडी के रूप में विख्यात डॉ. इंदिरा हृदयेश ने 1962 में समाजसेवा का व्रत लेकर राजनीति में प्रवेश किया और उत्तराखंड की राजनीति के शिखर तक पहुंचीं। उनका मूल निवास (मायका) पिथौरागढ़ के बेड़ीनाग विकासखंड का बेड़ीनाग गांव है। यह गांव कुमाऊं की प्रसिद्ध न्याय की देवी कोटगाड़ी मंदिर (धरमघर-पांखू) के निकट है।



उत्तराखंड : कांग्रेस को बड़ा झटका, नहीं रहीं कांग्रेस की कद्दावर नेता डॉ. इंदिरा हृदयेश

इंदिरा का परिवार 1910 में पीलीभीत आकर बस गया। उनके पिता पंडित टीकाराम पाठक आजादी की लड़ाई के महानायकों में एक थे। उन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन में शिरकत की और गांधी जी के साथ दांडी मार्च में भाग लेकर कई पदयात्राएं कीं।

उत्तराखंड: रात में फिल्म देखी, फिर सुबह उठ नहीं सकीं इंदिरा, आकस्मिक निधन से हर कोई स्तब्ध

पंडित टीकाराम पाठक कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता थे। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने पंडित टीकाराम पाठक को 1936 में संयुक्त प्रांत का कांग्रेस कमेटी का सदस्य मनोनीत किया था। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन को मदद करने वाले कई समाचार पत्रों का संपादन भी किया। डॉ. इंदिरा हृदयेश को देशसेवा, सच्चाई, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा अपने पिता से विरासत में मिली थीं। उनकी माता रमा पाठक गृहिणी थीं।

Uttarakhand Indira hridayesh Death: Congress Leader Indira hridayesh Political and Social life All Story
इंदिरा हृदयेश - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

जीवन परिचय
- सामान्य कुमाऊंनी परिवार में जन्मी इंदिरा ने शिक्षक के रूप में शुरू किया करियर।
- 1962 में सामाजिक सरोकारों के साथ राजनीति में किया प्रवेश।
- 1974 में स्नातक शिक्षक कोटे से उत्तरप्रदेश विधान परिषद में चुनीं गईं एमएलसी।
- लगातार चार बार उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य के लिए निर्वाचित हुईं।
- वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद उत्तराखंड में बनी अंतरिम सरकार में उन्हें विधायक का दर्जा देकर कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया और वह नेता प्रतिपक्ष बनीं। 
- 2002 में हल्द्वानी विधानसभा से चुनाव जीता और कांग्रेस के सत्ता में आने पर मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की सरकार में उनको पीडब्ल्यूडी, संपदा, सूचना संसदीय कार्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री बनाया गया। 
- 2007 में वह चुनाव हार गईं और 2012 में कांग्रेस के पुन: सत्ता में आने पर उन्हें वित्त मंत्री बनाया गया। 
- 2017 में भाजपा सरकार के सत्ता में आने पर उनके अनुभवों को देखते हुए उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाया गया। 

Uttarakhand Indira hridayesh Death: Congress Leader Indira hridayesh Political and Social life All Story
डॉ. इंदिरा हृदयेश - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विदेशों में भी किया भारत का प्रतिनिधित्व
- 1965 में पाराडेनिया विवि सीलोन में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में उत्तप्रदेश ने यंग पीपल यंग में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। डॉ. इंदिरा ने इसमें शामिल हुईं थीं।
- 1974 में विज्ञान भवन नई दिल्ली में विश्व शांति सम्मेलन में विशेष आमंत्रित सदस्य के बतौर भाग लिया। 
- 1984 में सिंगापुर और थाईलैंड में एक अध्ययन के दौरे में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
- 1998 में यूरोप में संसदीय समिति के साथ यूपी के 18 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहीं।
- उन्होंने वियना, जर्मनी, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, पेरिस, इंग्लैंड, चीन, जापान, कनाडा, अमेरिका, जोहांसबर्ग-दक्षिण अफ्रीका, काहिरा-मिस्र, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, थाईलैंड, यूएसए, मलयेशिया, सिंगापुर आदि देशों में अलग-अलग क्षेत्रों में शोध,अध्ययन आदि में भारत की ओर से प्रतिनिधित्व किया।

विज्ञापन
विज्ञापन
Uttarakhand Indira hridayesh Death: Congress Leader Indira hridayesh Political and Social life All Story
इंदिरा हृदयेश - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

कांग्रेस की संस्कृति की सोच रखने वाले एक सामान्य राजनीतिक परिवार में जन्मीं डॉ. इंदिरा हृदयेश ने उच्च शिक्षा के साथ ही पीएचडी की डिग्री ली। साथ ही शिक्षक के रूप में स्वयं को स्थापित किया। दूरदर्शी और विकास की सोच रखने वाली डॉ. इंदिरा ने विभिन्न ट्रेड यूनियनों, शिक्षकों, सरकारी, अर्धसरकारी कर्मचारियों, सफाई मजदूरों के साथ जुड़कर उनके हित में काम किया। प्रखर वक्ता और विकास की सोच रखने वाली डॉ. इंदिरा ने महिलाओं, आदिवासियों, पिछड़ों, निरक्षरों और कामकाजी महिलाओं के उत्थान के लिए देश और विदेश में कई यात्राएं कीं और महिलाओं को संगठित किया।

विज्ञापन
Uttarakhand Indira hridayesh Death: Congress Leader Indira hridayesh Political and Social life All Story
इंदिरा हृदयेश - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सदस्य बनने के बाद 1974 में गढ़वाल और कुमाऊं के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी चुनीं गईं और लगातार चार बार विधान परिषद सदस्य बनीं। वह अविभाजित उत्तरप्रदेश में आश्वासन समिति अध्यक्ष, विकास प्राधिकरण जांच समिति, अध्यक्ष, अखिल भारतीय जनजातीय महिला संघ अध्यक्ष, विधान समाधिकार समिति अध्यक्ष, लोक लेखा समिति, याचिका समिति, नियम समिति, पहाड़ी विकास बोर्ड, राज्य उपभोक्ता संरक्षण समिति, 20 सूत्री कार्यक्रम समिति, राज्य महिला कल्याण बोर्ड उत्तरप्रदेश समेत तमाम संगठनों की सदस्य रहीं। प्रतिनिधि सदस्य कार्यकारी परिषद एचएन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, सदस्य प्रबंधन बोर्ड जीबी पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर आदि पदों पर रहीं। आश्वासन समिति, नियम समिति की सदस्य भी बनाई गईं। 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed