जंगल में जान बूझकर आग लगाने के मामले में पुलिस ने 10 मुकदमे दर्ज किए हैं। इनमें चार लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि छह अज्ञात हैं। वन विभाग ने 351 मुकदमे दर्ज किए हैं, जिसमें 290 अज्ञात, जबकि 61 नामजद मुकदमे हैं। पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार के मुताबिक, वन, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम ऐसे लोगों की पहचान कर रही है।
Uttarakhand Forest Fire: रील बनाने के लिए लगा दी जंगल में आग, डीजीपी बोले- लोगों की मानसिकता हो चुकी खराब
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जंगलों की आग की राज्य में अब तक 930 घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे 1,196 हेक्टेयर से अधिक जंगल जल चुका है। सबसे अधिक 491 घटनाएं कुमाऊं और 365 घटनाएं गढ़वाल में हुईं, जबकि 74 मामले वन्य जीव क्षेत्र के हैं। बेकाबू हो चुकी आग से अब तक पांच लोगों की मौत और चार लोग झुलस चुके हैं। वन विभाग के अफसरों के मुताबिक, संवेदनशील जिलों में जरूरत पड़ने पर पुलिस, पीएसी, होमगार्ड और पीआरडी के जवानों की भी मदद ली जाएगी।
कहा, महिला और युवक मंगल दलों के साथ ही स्वयं सेवी संस्थाओं को भी आग बुझाने में फायर वाचर के रूप में सहयोग लिया जाएगा। जंगलों में आग की रोकथाम के लिए खरपतवार और कूड़ा जलाने पर भी रोक लगा दी गई है। जंगलों में आग लगाने वालों से सख्ती से निपटा जा रहा है। अब तक 383 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया, जिसमें 315 अज्ञात और 60 नामजद लोग शामिल हैं।
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प्रदेश में भूमि संरक्षण रानीखेत वन प्रभाग में एक, बागेश्वर वन प्रभाग में चार, तराई केंद्रीय व प्रभाग में एक, रामनगर वन प्रभाग में तीन, मसूरी वन प्रभाग में तीन, चकराता वन प्रभाग में एक, लैंसडोन वन प्रभाग में एक, भूमि संरक्षण लैंसडोन वन प्रभाग में दो, भूमि संरक्षण अलकनंदा वन प्रभाग में एक, राजाजी टाइगर रिजर्व में आग की एक एवं दो अन्य घटनाएं हुई है।